फसलों में लगने वाले सामयिक कीट, रोग एवं खरपतवार से बचाव हेतु एडवाइजरी जारी
झांसी- जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने अवगत कराया है कि फसलों में लगने वाले सामयिक कीट, रोग एवं खरपतवार से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की गई है, जिसके अन्तर्गत मक्का में तना बेधक इस कीट का 10 प्रतिशत मृतगोभ (आथिर्क क्षति स्तर) दिखाई पड़ने पर डाइमैथोएट 30 प्रतिशत ई0सी0 की 660 मिली0 मात्रा है0 700 ली0 पानी मे घोलकर छिडकाव करना चाहिए। फाल आर्मी बर्म-इस कीट से बचाव हेतु 20-25 पक्षी आश्रय तथा 3-4 की सं0 मे प्रकाश प्रपंच स्थापित करना चाहिए। 35-40 फैरोमेन ट्रैप प्रति है0 लगाकर भी इस कीट का प्रबन्धन किया जा सकता है। कीट के रासायनिक नियंत्रण -क्लोरेन्ट्रानिलीप्रोल 47.85 प्रतिशत की 75 मिली0 मात्रा प्रति हे0 की दर से 500 ली0 पानी मे घोलकर प्रयोग करना चाहिए। उन्होंने बताया कि अरहर में फल की मक्खी-फली मक्खी 5 प्रतिशत फली मिलने पर डाईमैथेाएट 30 ई0सी0 की 1 ली0 मात्रा इमिडाक्लोरप्रिड 17.8 एस0एल0 की 200 मिली अथवा एसिटामिप्रिड 20 डब्ल्यू0पी0 की 150 ग्रा0 मात्रा प्रति है0 की दर से प्रयोग करना चाहिए। बंझा (स्टेरिलिटी मौजेक)-यह रोग माइट द्वारा फैलता है डायमैथोएट 30 ई0सी0 की 1 ली0 मात्रा प्रति है0 की दर से 500-600 ली0 पानी मे घोलकर करने से रोग के प्रसार को रोका जा सकता हैं। फली बेधक-इस हेतु एथियन 50 प्रतिशत ई0सी0 की 1.2 ली0 मात्रा प्रति है0 अथवा फलुबैडामाईड 39.35 प्रतिशत एस0सी0 की 100 मिली0 मात्रा प्रति है0 की दर से 500-600 ली0 पानी मे घोलकर छिडकाव करना चाहिए। मूॅंग/उर्द- सकोर्स्पोरा पत्ती धब्बा-पत्ती धब्बा रोग का प्रकोप दिखने पर मैटीरम 70 प्रतिशत डब्ल्यू0जी0 की 1.25 ली0 मात्रा प्रति है0 अथवा टैबूकोनाजोल 25.9 प्रतिशत ई0सी0 की 750 मिली0 मात्रा प्रति है0 500 ली0 पानी मे घोलकर छिढकाव करने से रोग का प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है। पीला चित्तवर्ण रोग-इस रोग का बाहक सफेद मक्खी है रासायनिक नियंत्रण हेतु डाइमैथोएट 30 ई0सी0 की 1 ली0 मात्रा अथवा एजाडिरैक्टीन 0.15 प्रतिशत ई0सी0 की 2.5 ली0 मात्रा प्रति है0 की दर से 500-600 ली0 पानी मे घोलकर छिडकाव करना चाहिए।
गन्ना-लाल सडन रोग-इस रोग से बचाव हेतु प्रतिरोध किस्मो का प्रयोग करना चाहिए। रासायनिक नियंत्रण हेतु एजोक्सीस्ट्रोबन 18.2 डाईफैनोकोनाजोल 11.4 प्रतिशत एस0सी0 की 1 मिली0 मात्रा प्रति है0 की दर से घोल बनाकर छिडकाव करना चाहिए। पायरिला-रासायनिक नियंत्रण हेतु क्लोरपायरीफास 20 प्रतिशत ई0सी0 की 1.5 ली0 मात्रा प्रति है0 की दर से छिडकाव करना चाहिए। टाॅप बोरर- रासायनिक नियंत्रण हेतु क्लोरपायरीफास 20 प्रतिशत ई0सी0 की 1.5 ली0 अथवा क्लोरेन्ट्रानिलीप्रोल 18.5 प्रतिशत एस0सी0 375 मिली0 मात्रा प्रति है0 की दर से 600-800 ली0 पानी मे घोलकर छिडकाव करना चाहिए। आम-फलों को गिरने से बचाने के लिए अल्फानैफथलीन एसिटिक एसिड 4.5 प्रतिशत की 0.5 मिली0 मात्रा प्रति ली0 पानी मे घोलकर आवश्यकतानुसार 10-15 दिन के अन्तराल पर 2-3 छिडकाव करना चाहिए। राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली भारत सरकार कृषि एवं विकास कल्याण मंत्रालय के नवीनतम तकनीकियों का उपयोग करते हुए देश मे एक प्रोघोगिकीय आधारित राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली स्थापित की गई हैं। इस पोर्टल के माध्यम से लक्षित कीटों/फाल संयोजों के लिए जी0आई0एस0 आधारित कीट की जानकारी, कीट के प्रकोप की स्थिति के आंकलन हेतु क्षेत्र भ्रमण के दौरान फीड की गई सूचनाओ के आधार पर मोबाइल ऐप के साथ साथ विशेषज्ञो के सुझाव, संस्तुतियों दी जा सकेगी।
राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली एकीकृत सेंटर फसलों में कीट/रोग के संक्रमण की भविष्यवाणी, नियोजन एवं प्रबन्धन के लिए व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करेगी एवं कीट प्रबंधन को और बदावा देगी। जनपद स्तर पर कृषि रक्षा अधिकारी एवं तकनीकी सहायक की स्काउट आई0डी0 चलाई गई है जिसके द्वारा कीट/रोगो की सघन निगरानी की जा रही है एवं कृषको के बीच गोष्ठी, किसान पाठशाला आदि के माध्यम एन0पी0एस0एस0 एप का व्यापक प्रचार प्रसार किया जा रहा है।
रिपोर्ट अंकित साहू

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