नगर आयुक्त ने किया पहुज नदी का निरीक्षण, डी एम ने कहा वैज्ञानिक आंकड़ों पर बनेगी कार्ययोजना
झांसी : पहुज नदी पुनरोद्धार एवं संरक्षण हेतु कार्ययोजना तैयार करने के दृष्टिगत आज नगर आयुक्त द्वारा पहुंज नदी के विभिन्न स्थलों का निरीक्षण किया गया जिसमें रेलवें डैम, अनसुईया घाट, पहुंज डैम आदि स्थलों का पहुज नदी पुनरोद्धार एवं संरक्षण हेतु नमामि गंगे लखनऊ, राष्ट्रीय नगर कार्य संस्थान नई दिल्ली, क्षेत्रीय शहरी एवं पर्यावरण अध्ययन केन्द्र लखनऊ, की टीम एवं सिचाई विभाग के अधिकारियों सहित निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के उपरान्त जिलाधिकारी महोदय की अध्यक्षता में नदी पुनर्जीवन, प्रदूषण नियंत्रण एवं पर्यावरण संरक्षण से संबंधित प्रस्तावित कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा करते हुए संबंधित विभागों एवं तकनीकी संस्थाओं को आवश्यक बैठक की गयी। नगर आयुक्त द्वारा निरीक्षण में पायी गयी नदी की यथा स्थिति का विवरण साझां किया गया। जिलाधिकारी द्वारा कहा गया कि नदी पुनर्जीवन हेतु प्री-फीजिबिलिटी स्टडी प्राथमिकता के आधार पर कराया जाए तथा इसमें राष्ट्रीय नगर कार्य संस्थान नई दिल्ली एवं क्षेत्रीय शहरी एवं पर्यावरण अध्ययन केन्द्र लखनऊ की भूमिकाएं एवं कार्यक्षेत्र स्पष्ट रूप से निर्धारित किए जाएं जिसमंे अध्ययन रिपोर्ट केवल प्रारंभिक आकलन तक सीमित न रहकर भविष्य की कार्ययोजना के लिए एक व्यवहारिक एवं क्रियान्वयन योग्य दस्तावेज के रूप में तैयार की जाए।
बैठक में नदी में पर्यावरणीय प्रवाह बनाए रखने के उद्देश्य से विस्तृत हाइड्रोलॉजी अध्ययन कराए जाने के सुझाव दिए गए, जिससे यह निर्धारित किया जा सके कि वर्षभर नदी प्रवाह बनाए रखने हेतु कितनी जल आवश्यकता होगी। जिलाधिकारी ने कहा कि वैज्ञानिक आंकड़ों पर आधारित यह अध्ययन आगामी परियोजना की आधारशिला सिद्ध होगा। नदी में ठोस अपशिष्ट डंपिंग की समस्या पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी ने ऐसे ब्लाइंड स्पॉट्स की पहचान कर उनकी नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने को कहा गया, जिससे कि अपशिष्ट निस्तारण एवं निगरानी तंत्र को कार्ययोजना का अभिन्न हिस्सा बनाया जाए, ताकि प्रदूषण के स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।
उन्होंने निर्देश दिए कि प्री-फीजिबिलिटी रिपोर्ट में प्रस्तावित गतिविधियों की विस्तृत सूची के साथ उनके संभावित बजट का भी समावेश किया जाए, जिससे परियोजना के विभिन्न चरणों के लिए संसाधन आवश्यकताओं का यथार्थ आकलन संभव हो सके। बैठक में तत्काल प्रभाव से लागू किए जाने वाले राहत उपायों पर भी विशेष बल दिया गया। जिलाधिकारी ने नालों की टैपिंग, नदी से जलकुंभी हटाने तथा डी-सिल्टिंग कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर प्रारंभ करने के लिए बताया गया साथ ही जलकुंभी निष्पादन हेतु उपलब्ध तकनीकों की टेक्नो-इकोनॉमिक फीजिबिलिटी का परीक्षण कराने को भी कहा गया। इसके अतिरिक्त नदी क्षेत्र का विस्तृत ऑन-साइट सर्वे कर स्थानीय समस्याओं, संभावित समाधानों एवं अनुमानित लागत का आकलन किए जाने के निर्देश दिए गए। बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि नदी पुनर्जीवन परियोजना के डिजाइन एवं इंजीनियरिंग कार्यों के साथ डी0पी0आर0 तैयार कर चरणबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों एवं संस्थाओं को निर्देशित किया कि प्रस्तावित बिंदुओं के आधार पर समन्वित एवं समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर शीघ्र प्रस्तुत की जाए, ताकि नदी संरक्षण एवं पुनर्जीवन कार्यों को प्रभावी रूप से धरातल पर उतारा जा सके। बैठक में अपर जिलाधिकारी (वि0रा0) सिटी मजिस्ट्रेट, नगर निगम झाँसी से अपर नगर आयुक्त, मुख्य अभियन्ता, पर्यावरण अभियन्ता, नमामि गंगे लखनऊ से यूनिट हेड, जिला परियोजना अधिकारी, राष्ट्रीय नगर कार्य संस्थान नई दिल्ली से नेश्नल प्रोग्राम लीड, सीनियर वॉटर रिसोर्स स्पेशलिस्ट, प्रोग्राम असोसिएट एवं क्षेत्रीय शहरी एवं पर्यावरण अध्ययन केन्द्र लखनऊ से कंसलटेंट की टीम उपस्थित रहें।
रिपोर्टर : अंकित साहू
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