भारत से अमेरिका तक : पोषण विज्ञान में नेतृत्व और समर्पण की प्रेरणादायक यात्रा
झांसी : डॉ. संगीता श्रीवास्तव की भारत से लेकर अमेरिका तक में जीवन की सफलता की यात्रा यह सिद्ध करती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और सीखने का जुनून हो, तो छोटे शहर से निकलकर भी वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है। डॉ. संगीता श्रीवास्तव का जन्म और पालन-पोषण झाँसी की टहरौली के एक छोटे से गांव इमलिया में हुआ। वे अपने माता-पिता के प्रति विशेष आभार व्यक्त करती हैं, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सभी बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने का संकल्प लिया। बचपन से ही उन्हें पोषण एवं स्वास्थ्य विज्ञान के प्रति गहरी रुचि थी, जिसने उनके जीवन की दिशा तय की। इंटरमीडिएट के बाद उन्होंने जबलपुर होम साइंस कॉलेज से बैचलर ऑफ होम साइंस तथा फूड एंड न्यूट्रिशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की। शिक्षा पूर्ण करने के बाद वे झाँसी लौटीं। उस समय वहाँ डायटीशियन के रूप में रोजगार के अवसर सीमित थे, इसलिए उन्होंने वर्ष 1995 से फ्रीलांस डायटीशियन के रूप में अपनी सेवाएँ देना प्रारंभ किया। उन्होंने न्यूट्रीशनल बायोकेमेस्ट्री में बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से पीएचडी की उपाधि हासिल की। इससे पहले वर्ष 1995 से 2002 के दौरान उन्होंने एक ओर फ्रीलांस न्यूट्रिशन कंसल्टेंट के रूप में कार्य किया और दूसरी ओर विश्वविद्यालय में फैकल्टी के रूप में अध्यापन किया। इस दौरान उन्होंने अनेक प्रतिभाशाली विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया, जो आज विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान दे रहे हैं। यह उपलब्धि उनके लिए गर्व और संतोष का विषय है।
झांसी प्रवास के दौरान आज पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि वर्ष 2002 में वे संयुक्त राज्य अमेरिका यूएसए चली गईं। वहाँ भारतीय डाइटेटिक्स योग्यता की प्रत्यक्ष मान्यता न होने के कारण उन्होंने पुनः शिक्षा प्राप्त करने का निर्णय लिया। उन्होंने अमेरिका में दोबारा अध्ययन किया, इंटर्नशिप पूरी की, आवश्यक बोर्ड प्रमाणन प्राप्त किया और उसके बाद अस्पतालों में क्लिनिकल डायटीशियन के रूप में सेवाएँ दीं। साथ ही विश्वविद्यालय स्तर पर अध्यापन का कार्य भी जारी रखा। कई वर्षों के अस्पताल अनुभव के बाद वर्ष 2020 में उन्होंने अपनी इंश्योरेंस-आधारित निजी न्यूट्रिशन प्रैक्टिस की स्थापना की। वर्तमान में वे सफल निजी प्रैक्टिस संचालित करने के साथ-साथ विश्वविद्यालय में पार्ट-टाइम अध्यापन भी कर रही हैं। डॉ. संगीता श्रीवास्तव ने पेशेवर नेतृत्व के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। वर्तमान में वे एकेडमी ऑफ़ न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के बोर्ड आफ डायरेक्टर्स में डायरेक्ट एट लार्ज के रूप में कार्यरत हैंम यह उपलब्धि उन्होंने हाल ही में हासिल की है। उनका तीन वर्षीय कार्यकाल 1 जून से प्रारंभ हुआ है। यह संस्था विश्व की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित फूड एवं न्यूट्रिशन पेशेवर संस्था है, जिसके सदस्य अनेक देशों से जुड़े हुए हैं। इससे पूर्व वे कैलिफोर्निया एकेडमी ऑफ़ न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स की प्रेसिडेंट रह चुकी हैं। साथ ही वे इंडियन न्यूट्रिशन एंड डायटेटिक्स मेंबर इंटरेस्ट ग्रुप की चेयरपर्सन के रूप में भी अपनी सेवाएँ दे चुकी हैं। उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अनेक नेतृत्वकारी भूमिकाएँ निभाई हैं। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें 2018 में एमरगिंग डायटेटिक लीडर अवार्ड, आईएनडी, एमआईजी स्टार अवॉर्ड 2019 में आउटस्टैंडिंग फैकल्टी अवार्ड, एक्सीलेंस इन कम्युनिटी न्यूट्रिशन अवार्ड इन केलिफोर्निया, फेलो ऑफ़ द एकेडमी ऑफ़ न्यूट्रिशन एंड डाइटेटिक्स सहित अनेक सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। भारत से उनका जुड़ाव आज भी उतना ही मजबूत है। वे इंडियन डायटेटिक्स संगठन तथा न्यूट्रिशन सोसाइटी ऑफ़ इंडिया की आजीवन सदस्य हैं और निरंतर भारतीय पोषण समुदाय से जुड़ी हुई हैं।
डॉ. संगीता श्रीवास्तव कहती हैं कि झाँसी से अमेरिका के कैलिफोर्निया तक का उनका सफर चुनौतियों, सीखने, संघर्ष और नेतृत्व का सफर रहा है। उन्हें गर्व है कि उन्होंने अपने ज्ञान, समर्पण और निरंतर सीखने की भावना के बल पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय प्रतिभा का प्रतिनिधित्व किया है। उनकी यात्रा आज हजारों विद्यार्थियों, न्यूट्रिशन प्रोफेशनल्स और युवा महिलाओं के लिए यह संदेश देती है कि दृढ़ संकल्प, सतत शिक्षा और नेतृत्व की भावना के साथ किसी भी सपने को वैश्विक पहचान में बदला जा सकता है। इस अवसर पर उनके भाई तथा पूर्व जिला शासकीय अधिवक्ता संजय खरे भी मौजूद रहे।
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