छतरी लगाने का मतलब यह नहीं कि हम बच गए बारिश से, डुबोने वाला पानी तो पैरों से आता है - मुख्य कारखाना प्रबंधक : अजय श्रीवास्तव
झांसी : कारखाना साहित्यकार मंच द्वारा खड़ी बोली के प्रथम महत्वपूर्ण कवि राष्ट्रकवि दद्दा मैथिली शरण गुप्त जी की 140 वी जयंती पर मुख्य कारखाना प्रबंधक कार्यालय के भव्य सभा कक्ष में लोक भूषण कवि पन्नालाल असर के मुख्य आतिथ्य व मुख्य कारखाना प्रबंधक अजय श्रीवास्तव अजेय की अध्यक्षता में देश के नामचीन कवियों व शायरों द्वारा राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी को समर्पित काव्य पाठ प्रस्तुत किया गया, सर्वप्रथम मां शारदे एवं राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी के चित्र पर मंचासीन अतिथियों व कवियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर माल्यार्पण किया गया। तत्पश्चात कवयित्री डॉक्टर सुश्री प्रगति शर्मा बया द्वारा मां शारदे की वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया क्या। कवि गोष्ठी में मुख्य अतिथि लोक भूषण कवि पन्नालाल असर ने राष्ट्रकवि पर रचना सुनाई कि "वेशभूषा और वाणी में रही जिसके सरलता ,स्वयं था उपमा सादगी की जो धरोहर है।"पढ़कर सभी को भाव विभोर कर दिया ।
अध्यक्षता कर रहे मुख्य कारखाना प्रबंधक अजय श्रीवास्तव अजेय द्वारा रचना पड़ी गई कि" छतरी लगाने का मतलब यह नहीं कि हम बच गए बारिश से ,डुबोने वाला पानी तो पैरों से आता है" सुनाकर सभी का मार्गदर्शन किया ।
कवि गोष्ठी में गीत व गजलकार राजकुमार अंजुम ,अनूप शर्मा अनूप, रवि कुशवाहा नाराहट ,शैलेंद्र कुमार, डॉ सुश्री प्रगति शर्मा बया, यतीश अकिंचन, इंजीनियर वैभव दुबे, दीपशिखा शर्मा ,वरिष्ठ शायर आफाक अहमद,नियाज़ महोबी, वरिष्ठ कवि बृजेश शर्मा ,हितेश,आरजू अग्रवाल, धर्मेंद्र सारांश, गोपाल बावला,बृजेश शर्मा, द्वारा राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त को समर्पित काव्य पाठ प्रस्तुत किए गए।
उक्त अवसर पर राजभाषा सहायक एस सी कुरील, दीपक, पूरन मीणा, आदि अधिकारी व कर्मचारीगण बड़ी संख्या मे उपस्थित रहे। कवि गोष्ठी का संचालन कवि धर्मेंद्र सारांश व आभार कार्यक्रम संयोजक सीनियर सेक्शन इंजीनियर गोपाल बावला द्वारा व्यक्त किया गया।
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