संत व भगवंत के दर्शनों से जीवन में प्रेम दया व करुणा का भाव जागृत होता है: विशाश्री माताजी
झांसी : दिगम्बर जैन पंचायत समिति, चातुर्मास समिति एवं सकल जैन समाज झांसी के तत्वावधान में आयोजित पावन वर्षायोग में लीन ससंघ (15 पिच्छी) परम पूज्य गणिनी आर्यिका 105 विशाश्री माताजी के पावन सानिध्य में आचार्य विद्यासागर सभागार में विश्व कल्याण की मंगल कामना के साथ चल रहे 48 दिवसीय 1008 भक्तामर महा मण्डल आराधना विधान के चतुर्थ दिवस की मंगल देशना देते हुए आर्यिका 105 विशाश्री माताजी ने कहा कि मंदिर जाने से नहीं बल्कि पापों का त्याग करने से पुण्य का बंध होता है। उन्होंने कहा कि यदि मंदिर जाने से पुण्य का बंध होता तो जो लोग वहां सदैव रहते हैं तो क्या वे अधिक पुण्यशाली है ? नहीं, लेकिन ऐसा नहीं मंदिर में रहने वालों में भी कुछ ऐसे हो सकते हों जिनके हृदय में परोपकार की भावना ही न हो। लेकिन बार-बार मंदिर जाने और श्रीजी के दर्शन करने तथा वहां साधना में लीन साधु, साध्वियों के दर्शन एवं उपदेश सुनने के साथ साथ वहां की सकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव के कारण जीव की सोच में परिवर्तन होता है और उसका हृदय दया,करुणा,प्रेम और परोपकार का प्रेरणा पुंज बन जाता है और उसी के चलते वह हिंसा त्यागकर अहिंसात्मक जीवन जीने की कोशिश करता है। चतुर्थ दिवस गुरुवार के पुण्यार्जक श्रीमती हेमा डा.अमित जैन,आर्या जैन, हर्षित जैन एवं समस्त परिवार रहे। शांति धारा का सौभाग्य विवेक जैन आस्था को प्राप्त हुआ। पं.दीपक कुमार जैन करैरा के संचालन एवं सह पुजारी रोवन जैन, सुरेन्द्र जैन एवं नरेन्द्र जैन के सहयोग से राजीव जैन रानू , अक्षय जैन, विकास जैन, रानू जैन कटरा, राजीव जैन, भागचंद जैन एवं महिला मंडल ने सभी धार्मिक क्रियायें सम्पन्न कर अर्घ समर्पित किये। संचालन दिगम्बर जैन पंचायत समिति के महामंत्री कमल जैन लोकपथ एवं करगुवां मंत्री एड. शिरोमणि जैन ने किया।अंत में चातुर्मास समिति के मुख्य संयोजक विनोद जैन ठेकेदार ने सभी का आभार व्यक्त किया।इस मौके पर अशोक जैन जैनिथ, रविन्द्र जैन रेल्वे,राजकुमार जैन बाबा, बाहुबलि जैन, श्रीमती सरोज जैन, गुणमाला जैन,प्रीति जैन, डा.निकिता जैन,पूनम जैन ,शशि जैनिथ, दिव्या जैन,रानी जैन,रचना जैन, नीलम जैन,शगुन जैन,शैली जैन,ऊषा जैन,अंजली जैन मंगलपुर, उर्मिला जैन, अनीता जैन एवं मिली जैन आदि मौजूद रहे।
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