त्रिभुवन का भूषण बना देती है भक्ति :विशाश्री माताजी
झांसी : अतिशय क्षेत्र करगुवांजी में चल रहे 48 दिवसीय 1008 भक्तामर महा मण्डल आराधना विधान के चौदहवें दिन सोमवार को गणिनी आर्यिका 105 विशाश्री माताजी ने मंगल देशना देते हुए कहा कि जिनवाणी को हम श्रद्धा और भक्ति के साथ श्रवण करते हैं तो हमें सभी सांसारिक सुख वैभव की प्राप्ति होने में कोई संदेह नहीं है, क्योंकि जिनवाणी की चर्चा आत्म वैभव को प्राप्त करने को होती है। जब जब लोग इसका स्मरण करते हैं तब तब अनंत सुख का भागी बनते हैं। आचार्य मानतुंग ने भक्तामर स्तोत्र में लिखा है कि जीव को समस्त दोषों से रहित प्रभु की भक्ति करना बड़ी बात है, वह कौन कर सकता है, किंतु तीन लोक के शिखर पर चंद्रमणि के समान विराजमान परमात्मा जो तीनों लोकों का भूषण है भक्ति करने वालों को स्वयं के समान बना देता है। चौदहवें दिवस सोमवार के पुण्यार्जक श्रीमती सीमा पुष्पेंद्र जैन,,पियूरिष, जैन, आयुशी,प्रभावी, निशा एवं समस्त परिवार रानीपुर तथा दिवाकर यशजी वैद्य मोहनवाडी जयपुर रहे,जिन्होंने शांतिधारा का सौभाग्य प्राप्त किया एवं माताजी को शास्त्र भेंटकर समस्त धार्मिक क्रियायें सम्पन्न कराते हुए अर्घ समर्पित किये। संचालन दिगम्बर जैन पंचायत समिति के महामंत्री कमल जैन एवं करगुवांजी मंत्री शिरोमणि जैन ने किया।अंत में विनोद जैन ठेकेदार ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर इं बालचंद्र जैन, चौधरी जितेंद्र जैन तालबेहट, बाहुबलि जैन, प्रीति शिरोमणि जैन, श्रीमती रानी जैन, सरोज जैन,अनिता जैन, राजकुमार जैन बाबा सहित अनेकों श्रद्धालु मौजूद रहे।
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