बाह्य सौंदर्य से नहीं प्रभु की आराधना कर स्वयं को सुंदर बनायें:विभाश्री माताजी
झांसी : अतिशय क्षेत्र करगुवांजी में चल रहे 48 दिवसीय 1008 भक्तामर महा मण्डल आराधना विधान के सत्रहवें दिन गुरुवार को गणिनी आर्यिका 105 विशाश्री माताजी ने मंगल देशना देते हुए कहा कि संसार में प्रभु का सौंदर्य अद्वितीय है। तीनों लोकों में उनके समान सुंदर दूसरा कोई नहीं है, क्योंकि वे राग द्वेष रहित हैं और उनमें कोई भी अवगुण नहीं है। वे शांत और गंभीर है। भूतल के सभी सुंदर परमाणु उनमें समाहित हैं। उन्होंने कहा कि मनुष्य के शरीर में 9984 रोग भरे हैं जो कभी भी उभर कर ऊपर आ जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि आप सुंदर बनना चाहते हो तो सौंदर्य प्रसाधनों का उपयोग किये बिना पूरे भक्तिभाव से तीर्थंकर प्रभु की आराधना करो। उन्होंने कहा कि प्रभु की आराधना करते करते मनुष्य की काया सुंदर , रुपवान और गुणशील हो जाती है। सत्रहवें दिवस गुरुवार के प्रथम पुण्यार्जक श्रीमती डा. अनुपमा जैन, डा.प्रदीप जैन न्यूरो सर्जन, श्रीमती अलका डा.पी के जैन, अनन्य जैन,प्रिमल जैन एवं द्वितीय पुण्यार्जक श्रीमती हर्षा जिनेंद्र जैन, आचरण जैन,रैनी जैन, श्रीमती सुनीता मनोज जैन एवं समस्त परिवार बीड़ी वाले रहे,जिन्होंने शांतिधारा का सौभाग्य प्राप्त किया एवं माताजी को शास्त्र भेंटकर पं दीपक जैन करैरा के मार्गदर्शन में समस्त धार्मिक क्रियायें सम्पन्न कराते हुए अर्घ समर्पित किये। संचालन करगुवांजी मंत्री शिरोमणि जैन ने किया। अंत में अशोक जैन जैनिथ ने सभी का आभार व्यक्त किया।इस मौके पर इं बालचंद्र जैन, चौधरी जितेंद्र जैन तालबेहट, बाहुबलि जैन , अशोक जैन रत्न सेल्स,प्रीति शिरोमणि जैन, श्रीमती रानी भागचंद जैन आदि मौजूद रहे।
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