वैराग्य ही जीवन निर्माण की भूमिका है:विभाश्री माताजी
झांसी - अतिशय क्षेत्र करगुवांजी में चल रहे 48 दिवसीय 1008 भक्तामर महा मण्डल आराधना विधान के इक्कीसवें दिन रविवार को गणिनी आर्यिका 105 विशाश्री माताजी ने वैराग्य ही जीवन निर्माण की भूमिका है।जो व्यक्ति सत्य को पहचानता है वह सत्य का सम्मान भी करता है। आचार्य मानतुंग स्वामी द्वारा रचित भक्तामर स्तोत्र की महिमा का बखान करते हुए उन्होंने कहा कि भक्तामर का एक एक काव्य मंत्र, तंत्र और यंत्र भी है। श्रद्धा, आस्था और विश्वास से ही श्रेष्ठ फल की प्राप्ति संभव है। वे कहती हैं कि जो भी व्यक्ति अनुष्ठान के साथ चिंतन मनन करते हुए भगवान आदिनाथ की आराधना करता है उसके कष्टों का मोचन अवश्य ही हो जाता है।
इससे पूर्व रविवार के पुण्यार्जक डा. विमल मोदी श्रीमती सीमा सुनील मोदी, सुषमा दिनेश , जूली अभिनंदन,बूली नीलेश साहिल, सोमिल एवं समस्त मोदी परिवार सिविल लाइन झांसी,श्रीमती स्वाति अजय धमासिया,अतिशय जैन देबू, वर्धमान होटल वाले समस्त परिवार सीपरी बाजार एवं श्रीमती शांति देवी जैन, ममता राजेश जैन, नमन शैजल, अनंत, अनु एवं समस्त परिवार दीनदयाल नगर झांसी रहे,जिन्होंने शांतिधारा का सौभाग्य प्राप्त किया।माताजी को शास्त्र भेंटकर पाद प्रक्षालन किया एवं पं दीपक जैन करैरा के मार्गदर्शन में समस्त धार्मिक क्रियायें सम्पन्न कराते हुए अर्घ समर्पित किये। कमेटी पदाधिकारियों ने पुण्यार्जक परिवारों के पुण्य की अनुमोदना करते हुए माला एवं पगड़ी पहनाकर उनका अभिनंदन किया।संचालन दिगम्बर जैन पंचायत के महामंत्री कमल जैन लोकपथ एवं करगुवां मंत्री शिरोमणि जैन ने किया।अंत में विधि सलाहकार अशोक जैन ने सभी का आभार व्यक्त किया।इस मौके पर ललित जैन, डा.जिनेंद्र जैन,चौधरी जितेंद्र जैन तालबेहट, विनोद जैन ठेकेदार,राजीव जैन अहिंसा, बाहुवलि जैन, श्रीमती रानी भागचंद जैन निर्माण मंत्री,प्रीति शिरोमणि जैन, कुलदीप जैन रानू जैन, रौनक जैन, राजेंद्र जैन बिजना वाले, इंजीनियर बालचंद जैन,नरेंद्र जैन नारायण बाग आदि मौजूद रहे।
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