भये प्रकट कृपाला दीन दयाला कौशिल्या हितकारी ,श्रीरामकथा में जन्मे श्रीराम,अवधपुरी बना केशवपुर धाम

झांसी :  केशवपुर धाम में आयोजित रजत जयंती महोत्सव के उपलक्ष्य में संगीतमय श्रीरामकथा के लिए बनाये गये रामराजा  सरकार के मंदिर की आकृति के समान दिव्य एवं भव्य कथा मंडप में कथा के तृतीय दिवस धूमधाम से भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया गया। जन्मोत्सव के दौरान मानो ओरछाधाम एवं अयोध्या नगरी की मिली जुली झलक  दिखाई दी। एक ओर व्यास पीठ के ठीक पीछे ओरछा सरकार के मंदिर की राजसी छवि तो दूसरी ओर कथा मंडप में हुए जन्मोत्सव में अयोध्या धाम का वात्सल्य भाव श्रद्धालु श्रोताओं के चेहरों पर स्पष्ट नजर आया। मौका था रजत जयंती महोत्सव के दौरान केशवपुर धाम में चल रही संगीतमय श्रीराम कथा का। चित्रकूटधाम से पधारे श्रीराम कथा के श्रेष्ठ वक्ता कामदगिरि पीठाधीश्वर जगतगुरु स्वामी रामानंदाचार्य ने अपने कोकिल कंठ से रसिक श्रद्धालुओं को जैसे ही प्रभु राम अवतार के प्रसंग का रसास्वादन कराया तो श्रोता कुछ पल के लिए भाव विभोर हो गये। उनके मुख जैसे ही निकला "भये प्रकट कृपाला दीन दयाला कौशिल्या हितकारी"कथा मंडप में बैठे श्रोता भगवान की भक्ति में भावविभोर होकर झूम उठे। जगतगुरु ने कहा कि जन्म तो जीव का होता है, भगवान तो अजन्मा है उनका कभी जन्म नहीं होता है। जब जब पृथ्वी पर अत्याचार अनाचार और‌ व्यभिचार बढ़ता है तब तब  अत्याचारियों का नाश करने तथा संतों, गौमाता एवं  धर्म की रक्षा करने के लिए भगवान अवतार लेते हैं। महाराज दसरथ की जब साठ हजार वर्ष हो गयी तब वे मुनि वशिष्ठ के पास पुत्र की इच्छा लेकर‌ गये। गोस्वामी तुलसीदास जी यहां लिखते हैं "एक बार भूपत मन माही, भयी ग्लानि मोर सुत नाहीं"। गुरु गृह गये तुरत महिपाला,

चरन लाग करि विनय विशाला।"
वे कहते हैं कि संतान का संबंध अवस्था से है पर भगवान का संबंध तो आस्था से है। महाराज दशरथ साठ हजार वर्ष की उम्र होने पर परमात्मा को पुत्र के रूप में पाने की इच्छा के साथ गुरु वशिष्ठ के पास गये।
अपने श्रीमुख से श्रीराम कथा रुपी ज्ञान गंगा की अमृत वर्षा करते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए गाय का दूध अमृत है। इसलिए सभी संकल्प लें कि गौमाता का पालन कर अपनी संतानों को विवेकवान और बलिष्ठ बनायेंगे। उन्होंने कहा कि क्षीर और नीर का भेद बताने वाला हंस होता है। गाय के दूध में विवेक होता है। जगतगुरु ने कहा कि कर्म रुपी चावल में विवेक रुपी दूध और भक्ति रुपी शक्कर डालने पर खीर का जो प्रसाद बनता है, उसमें भक्ति का समावेश होने के कारण परमात्मा का वाश होता है और ऐसे प्रसाद को जो भी ग्रहण करते हैं उनके जीवन में परमात्मा ही पुत्र बनकर आते हैं।
कथा के प्रारंभ में पं. बृजमोहन मिश्रा (गुरुजी )ने चरण पूजन, पीठ पूजन एवं ग्रंथ का पूजन कर मानस की आरती उतारी एवं कथा व्यास का माल्यार्पण कर आशीर्वाद प्राप्त किया।मंच का संचालन पं अनूप शास्त्री ने किया।
प्रातः कालीन वेला में पंचकुंडीय श्रीसीताराम महायज्ञ में यज्ञाचार्य हेमंत कौशिक हरपालपुर के आचार्यत्व में श्रीमती शालिनी एकांश मिश्रा, उर्मिला महेश कुमार साहू, प्रियंका सचिन साहू,सरिता अनूप सहगल,साधना आमोद किलपन, प्रगति अमित गंधी, उमा विनोद साहू बालाजी, मोहिनी सत्येंद्र सेन ग्वालियर, मधु राघवेन्द्र सेन खनियांधाना, मनीषा राहुल सोनी,खुशबू नितिन साहू,रिंकी राजू साहू, स्वाति प्रिंस अग्रवाल, जयंती राजकुमार साहू,प्रियंका राहुल शर्मा,पुष्पा दयाशंकर,राधा आशीष यादव, सीमा प्रदीप अग्रवाल, कल्पना पुष्पेन्द्र सेन एवं रीना अजय अग्रवाल आदि सभी 21 यजमानों ने यज्ञ मंडप में बनी वेदियों का पूजन कर विश्व कल्याण की कामना के साथ आहुतियां दी।धाम पर अखण्ड श्री रामचरितमानस का पाठ, अखंड श्री सीताराम संकीर्तन एवं अखंड श्री हनुमान चालीसा का पाठ  अनवरत जारी रहा।आयोजन समिति  के संरक्षक रामस्वरूप साहू एवं मेला प्रभारी राजकुमार साहू ने बताया कि साधु संतों एवं यजमानों को फलाहार एवं आम जनमानस को भण्डारा प्रसादी की व्यवस्था की गयी है जो प्रातः 11बजे से शुरू होकर रात्रि 11अनवरत जारी है। सांस्कृतिक संध्या की श्रृंखला में बुधवार को रात्रि 8 बजे से0बाबा खाटू श्याम की भजन संध्या में कलाकारों द्वारा एक से बढ़कर एक धार्मिक भजनों की प्रस्तुति दी गयी। जिसमें देर रात्रि तक श्रद्धालु श्रोता मंत्रमुग्ध होकर लुत्फ उठाते रहे। इस मौके पर श्रीमती साधना मिश्रा, उर्मिला महेश कुमार साहू,राजेश कुमार शर्मा, राघव‌ किलपन, सत्यम साहू,जैमिनी यादव आदि सैकड़ों लोग मौजूद रहे।अंत में बैकुंठ प्रसाद चतुर्वेदी ने सभी का आभार व्यक्त किया।

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.