सत्य के पथ पर जीवन को आगे बढायें : विशाश्री माताजी
झांसी : अतिशय क्षेत्र करगुवांजी में चल रहे 48 दिवसीय 1008 भक्तामर महा मण्डल आराधना विधान के तेतीसवें दिन शुक्रवार को गणिनी आर्यिका 105 विशाश्री माताजी ने मंगल देशना देते हुए कहा कि जिनवाणी की महिमा अपरंपार है। उसका एक एक अक्षर मंत्र तंत्र और यंत्र है। आचार्य मानतुंग स्वामी ने तो एक एक में काव्य में गागर में सागर भर दिया है। उन्होंने कहा कि आदिनाथ भगवान ही जिनवाणी के विधाता है। वे ही शंकर, विष्णु और ब्रह्मा स्वरुप हैं। संत विद्वानों ने तमाम शास्त्रों में उनके एक हजार नाम गिनायें है किन्तु वे अनंत हैं इसलिए उनके नाम भी अनंत है उन्होंने ही दीक्षा को धारण कर पुरुषार्थ के मार्ग को खोला है। वे कहती हैं कि हम सब पुरुषार्थ के साथ अपने जीवन को सत्य के पथ पर आगे बढ़ायें।
इससे पूर्व शुक्रवार के पुण्यार्जक गुरु सेवा संघ झांसी के अध्यक्ष ऋषभ कुमार जैन "ऋषि" एवं समस्त पदाधिकारियों ने शांतिधारा का सौभाग्य प्राप्त किया, माताजी को शास्त्र भेंटकर पाद प्रक्षालन कर पं दीपक जैन करैरा के मार्गदर्शन में समस्त धार्मिक क्रियायें सम्पन्न कराते हुए अर्घ समर्पित किये।तदुपरांत दिगम्बर तीर्थ क्षेत्र अनेकांत धाम पाटाखेड़ा चिचोली जिला बैतूल (म.प्र.) में भव्य सहस्रकूट जिनालय के बैनर का माताजी के सानिध्य में विमोचन करते हुए जिनालय निर्माण करा रहे प्रतिष्ठाचार्य वाणीभूषण पं संजय जैन सरल एवं बड़ी मूर्ति दानकर्ता जिनेंद्र जैन बैतूल का माला एवं पगड़ी पहनाकर दिगम्बर जैन पंचायत समिति के पदाधिकारियों ने सम्मानित किया।संचालन करगुवांजी मंत्री एड.शिरोमणी जैन ने किया।अंत में विनोद जैन ठेकेदार ने सभी का आभार व्यक्त किया।
इस मौके पर राजकुमार जैन बाबा,विधि सलाहकार अशोक जैन, श्रीमती रानी भागचंद जैन, श्रीमती प्रीति शिरोमणि जैन, एड.अनूप जैन, प्रमोद जैन पड़रा,श्रीमती कल्पना जैन,विकास जैन रानू,अक्षत जैन मौजूद रहे।
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