आत्मा की कर्मो से मुक्ति ही मोक्ष है: विशाश्री माताजी
झांसी : अतिशय क्षेत्र करगुवांजी में चल रहे 48 दिवसीय 1008 भक्तामर महा मण्डल आराधना विधान के तेतालीसवें दिन सोमवार को गणिनी आर्यिका 105 विशाश्री माताजी ने ईश्वर की दिव्य ध्वनि (वाणी) पर व्याख्यान देते हुए कहा कि ईश्वर की दिव्य ध्वनि (वाणी) मन को हरण करने वाली है। उनकी वाणी किसी को दुख देने वाली नहीं होती । ईश्वर की वाणी तो वेदों की वाणी है, जैन आगम के अनुसार ईश्वर की वाणी ही जिनवाणी है, वह सभी को शीतलता प्रदान करती है जो इसे आत्मसात कर अपने जीवन में उतार लेता है, उसे मोक्ष का मार्ग प्राप्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि मोक्ष ऊपर नहीं है वह तो धरती पर ही है जितने भी तीर्थंकरों का जब जब निर्वाण हुआ उन्हें भी इसी भूमि पर उस मोक्ष की प्राप्ति हुई और वे सिद्धिलोक में विराजमान हो गये। वे कहती हैं कि आत्मा की कर्मों से मुक्ति ही मोक्ष है अर्थात सभी कर्मों का क्षय जब हो जाता है तब आत्मा को मुक्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि मनुष्य को वाणी बोलते बोलते अनंत काल हो गये फिर भी दिव्य नहीं बन पायी।अत: अपनी वाणी में मधुरता और शीतलता लाये और ऐसा बोले जो सभी को प्रिय लगे। उन्होंने कहा कि गाय बैल भैंस, घोड़ा, चिड़िया कबूतर आदि सभी बोलते हैं पर उनकी भाषा हम समझ नहीं सकते उनकी तो केवल आवाज आती है। इससे पूर्व सोमवार के पुण्यार्जक श्रीमती संध्या डा.उदय जैन, श्रीमती संगीता विजय जैन पचकुंइया, इंजीनियर ईसा जैन, इंजीनियर मयंक जैन,डा.ज्योति डा.नमन जैन, प्रियंका जैन पायलेट एवं समस्त जैन परिवार झांसी रहे, जिन्होंने शांतिधारा का सौभाग्य प्राप्त किया, माताजी को शास्त्र भेंटकर पाद प्रक्षालन किया एवं पं विनोद जैन बबीना के मार्गदर्शन में समस्त धार्मिक क्रियायें सम्पन्न कराते हुए अर्घ समर्पित किये।
तदुपरांत पुण्यार्जक परिवारों को शाल,माला एवं पगड़ी पहनाकर दिगम्बर जैन पंचायत समिति के पदाधिकारियों ने सम्मानित किया।संचालन पंचायत समिति के महामंत्री कमल जैन लोकपथ एवं करगुवांजी मंत्री एड.शिरोमणी जैन ने संयुक्त रूप से किया।अंत में विधि सलाहकार अशोक जैन ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर विकास जैन, इंजीनियर उमेशचंद्र जैन, वीरेंद्र जैन नेडा,शशांक जैन,श्रीमती रानी भागचंद जैन, श्रीमती प्रीति शिरोमणि जैन, नरेन्द्र जैन, नारायण बाग मौजूद रहे।
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