क्षमा धारण करने से जीवन की सभी कुटिलतायें समाप्त हो जाती हैं:विशाश्री माताजी
झांसी : अतिशय क्षेत्र करगुवांजी स्थित विद्यासागर सभागार में पर्युषण पर्व "दसलक्षण पर्व"के पहले दिन उत्तम क्षमा पर्व पर मंगल देशना देते हुए गणिनी आर्यिका 105 विशाश्री माता जी कहा कि यह शास्वत पर्व आत्मा से परमात्मा को जोड़ने का पर्व है,जो अनादि काल से चला आ रहा है और अनंत काल तक चलता रहेगा।इसे धर्म पर्व और दस लक्षण पर्व भी कहते हैं।यह सभी लक्षण हमारी आत्मा की पहचान परमात्मा से कराते हैं। उन्होंने कहा कि पर्व 56 प्रकार के व्यंजन बनाकर आनंद लेने का नहीं बल्कि आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का पर्व है।पर्युषण पर्व का मंगलाचरण क्षमा पर्व से शुरु होता है। क्षमा हमारी आत्मा का गुण है जो हमारे भीतर ही है जिसे क्रोध रुपी मिट्टी ने ठीक उसी प्रकार छिपा लिया है जिस प्रकार खदानों में मिट्टी और कोयले के बीच हीरा मोती छिपे होते हैं। उन्होंने कहा कि क्षमा धारण करने से जीवन की समस्त कुटिलतायें समाप्त हो जाती हैं। इसीलिए धर्म रुपी कुदाली से पुरुषार्थ कर क्रोध रुपी मिट्टी को हटाकर क्षमा को प्रकट करो। क्रोध तो विवेक खो देता है और तमाम रोगों को जन्म देता है जबकि क्षमा धारण करने से शरीर की सुंदरता और विवेक बढ़ता है। क्षमा वीरों का आभूषण है। इससे पूर्व भक्तामर महा मण्डल आराधना विधान के पेंतालीसवें दिन बुधवार के पुण्यार्जक श्रीमती प्रेमवाई जैन, श्रीमती भुवनवाई कुलदीप जैन, राजीव जैन, अरुण जैन एवं समस्त सिर्स वाले परिवार झांसी रहे, जिन्होंने शांतिधारा का सौभाग्य प्राप्त किया, माताजी को शास्त्र भेंटकर पाद प्रक्षालन किया एवं पं.कमलेश जैन शास्त्री छतरपुर के मार्गदर्शन में समस्त धार्मिक क्रियायें सम्पन्न कराते हुए अर्घ समर्पित किये।
तदुपरांत पुण्यार्जक परिवारों को शाल,माला एवं पगड़ी पहनाकर दिगम्बर जैन पंचायत समिति के पदाधिकारियों ने सम्मानित किया।संचालन पंचायत समिति के महामंत्री कमल जैन लोकपथ एवं करगुवांजी मंत्री एड.शिरोमणी जैन ने संयुक्त रूप से किया। इस मौके पर विकास जैन, वीरेंद्र जैन नेडा,श्रीमती रानी भागचंद जैन, श्रीमती प्रीति शिरोमणि जैन सहित बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालु मौजूद रहे।
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