पूर्णाहुति के साथ 55 दिवसीय भक्तामर महामंडल आराधना विधान का समापन

झांसी :  अतिशय क्षेत्र करगुवांजी में चल रहे 55 दिवसीय 1008 भक्तामर महा मण्डल आराधना विधान का छप्पनवें दिन शनिवार को गणिनी आर्यिका 105 विशाश्री माताजी के ससंघ सानिध्य में हवन, पूजन पूर्णाहुति के साथ समापन हो गया। इस मौके पर गाजे बाजे के साथ धूमधाम से श्रीजी की शोभायात्रा निकाली गयी तदुपरांत उन्हें पालकी में विराजमान कर वापस मंदिर के गर्भगृह में उच्चासन पर विराजमान कराया गया। जैन श्रद्धालुओं ने प्रातः 6 बजे भौंरे में बडे बाबा का अभिषेक एवं शांति धारा की फिर विद्यासागर सभागार में विराजमान श्री जी के सम्मुख 105 गणिनी आर्यिका विशाश्री माताजी के पावन‌ सानिध्य में सकल जैन समाज, चातुर्मास समिति एवं दिगम्बर जैन पंचायत समिति के तत्वावधान में सामूहिक पूजन विधान हुआ जिसमें सभी 56 दिनों के पुण्यार्जक परिवारों ने सामूहिक रुप से विश्व-कल्याण की भावना से यज्ञ वेदियों में आहुतियां दी।  पूर्णाहुति उपरांत माताजी के सानिध्य में श्री जी के विग्रह को स्वर्ण जडित पालकी में  विराजमान कराकर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में डीजे बैंड पर बज रही धार्मिक गीतों की धुनों पर थिरकते महिला पुरुष जैन श्रद्धालु चल रहे थे। पालकी के साथ पूज्य गणिनी आर्यिका 105 विशाश्री माताजी स्वयं ससंघ चल रही थी , उनके पीछे थिरकते हुए श्रद्धालु महिलायें एवं पुरुष चंवर ढुराते हुए चल रहे थे। करगुवां जैन मंदिर से प्रारंभ हुयी शोभायात्रा मेडिकल कालेज के गेट नं 1 व 2 से वापस आकर मंदिर प्रांगण में विसर्जित हुयी। शोभायात्रा के बाद भगवान को वापस मंदिर के गर्भगृह में उच्चासन पर विराजमान कराया गया। तदुपरांत सभी ने सामूहिक भोज का आनंद‌ लिया।इस मौके पर मंगल देशना देते हुए विशाश्री माताजी ने कहा कि संकल्प के बिना किसी कार्य की सफलता नहीं हो सकती। संकल्प के साथ कार्य करने का फल अनौखा होता है। किसी कार्य की सिद्धि का संकल्प लेकर एकता, साहस,सम्यक धैर्य, श्रद्धा, उत्साह के साथ आगे बढ़ने वालों की विजय अवश्य होती है। उन्होंने कहा कि संकल्प  दो प्रकार का होता है एक किया जाता है और दूसरा कराया जाता है। वन में पर्ण कुटी के सामने लक्ष्मण ने रेखा  खींचकर माता ‌‌सीताजी को संकल्प दिलाया था जो टूट गया क्योंकि उन्होंने संकल्प लिया नहीं था किंतु वहीं संकल्प माता सीता ने जब अशोक वाटिका में लिया तो लंकाधिपति रावण के द्वारा किये गये सभी प्रयास,अनेकों बार रावण ने आकर उनके चरणों में सारा धन दौलत एवं वैभव लुटाने की बात कही पर वह सीता को तनिक भी  डिगा न सका और माता सीता ने एक नजर उठाकर भी उसकी ओर नहीं देखा। उन्होंने कहा कि भक्ति से धर्म की प्रभावना बढ़ती है ।यहां पर जिन्होंने भक्ति कर अपने पुण्य की झोलियां भरी वे धन्य है साथ ही जिन्होंने दूसरों को बुलाकर पुरुषार्थ किया वे सभी सुगंधित पुष्प के समान हैं जो स्वयं तो सुगंधित हैं ही साथ में खुशबू बिखेर कर दूसरों को अथवा आसपास के वातावरण को भी महकाता है।इस आयोजन की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए माताजी ने कहा कि यह सब समाज की एकजुटता का ही परिणाम है ।संचालन कमल जैन लोकपथ एवं एडवोकेट शिरोमणि जैन ने संयुक्त रूप से किया।अंत में विनोद जैन ठेकेदार ने सभी का आभार व्यक्त किया।इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य,अजय जैन,संजय सिंघई, इं बालचंद्र जैन, संजय जैन तालबेहट, भागचंद जैन, अशोक जैन जैनिथ, रवींद्र जैन रेल्वे, वीरेंद्र जैन नेडा,डा.जिनेंद्र जैन, रंजो आलोक जैन अमित जैन, संजय जैन छतरपुर, डा.राखी जैन,यश जैन, अतिशय जैन, विश्व परिवार,श्रीमती अलका डा.रुचि  जैन, डा.निर्देश जैन, डा.राजीव सिंघई  ,नीलेश मोदी, गोली मोदी,रौनक जैन, अनिल बाजा,ऋषभ जैन, कुलदीप जैन, सिद्धार्थ जैन सत्यजीत जैन सचिन जैन रेलवे,डा.अक्षत जैन,डा.अभय जैन, डा.अमित जैन, रानू जैन,राजेंद्र जैन, संतोष जैन जल निगम अक्षत जैन सुभाष जैन बिजली ,दीपक जैन रेल्वे, दीपक जैन वैद्यराज, बाहुबलि जैन, राजकुमार जैन बाबा, श्रीमती इंद्रा जैन, विजय जैन,अशोक जैन जैनिथ, सुनील जैन, कुलदीप जैन  संजय जैन छतरपुर रौनक जैन श्रीमती सरोज जैन, श्रीमती प्रीति जैन श्रीमती रचना जैन,अनीता जैन, श्रीमती रानी जैन श्रीमती शैली जय श्रीमती श्वेता जैन श्रीमती आरती जैन श्रीमती वैशाली जैन श्रीमती रचना जैन,श्रीमती बबली चाची, श्रीमती ज्योति जैन श्रीमती किरण जैन श्रीमती शुभी श्रीमती प्रीति कुलदीप  जैन, मनोज अछरौनी रवि कंधारी विजय जैन पंचकुइया ,राजीव शिवाजी, कमल‌ जैन शिवाजी  राजेंद्र जैन बिजना,अमित जैन, रौनक जैन, सत्यजीत जैन सिद्धार्थ जैन, विकास जैन प्रदीप जैन,  राजेंद्र मुनीम अक्षय जैन, प्रिंस जैन श्रेयांश जैन , दिनेश जैन डीके नरेंद्र जैन नारायण बाग, राजेन्द्र चौधरी, भागचंद जैन,विमल जैन दबोह,आदि मौजूद रहे।

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