साईबर धोखाधड़ी से आय अर्जित करने के मामले में आरोपी का जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त

झांसी :  साईबर धोखाधड़ी के माध्यम से आय अर्जित करने के मामले में आरोपी का जमानत प्रार्थना पत्र  अपर सत्र न्यायाधीश/ विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट)मोहम्मद नेयाज अहमद अंसारी के न्यायालय ने निरस्त कर दिया। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता प्रीति चतुर्वेदी ने बताया कि थाना मोंठ प्रभारी निरीक्षक ने रिपोर्ट दर्ज करायी थी कि साइबर धोखाधड़ी सिंडिकेट ऑनलाइन माध्यमों से निर्दोष नागरिकों को धोखा देकर संचालित हो रहे हैं।उन्हें निवेश, पार्ट टाइम नौकरी के प्रस्तावों, डिजिटल अरेस्ट या ऐसी अन्य भ्रामक योजनाओं के झूठे बहाने से फंड ट्रांसफर करने के लिए प्रेरित किया जाता है और इस तरह के अवैध धन को विभिन्न खातों में डायवर्ट (स्थानांतरित) करते हैं। पोर्टल्स पर दर्ज संबंधित शिकायतों और इन शिकायतों में शामिल बैंक खातों का विश्लेषण किया तो पता चला कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ए.सी.बी. मोंठ तथा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शाखा बकुंआं बुजुर्ग में स्थित खातों का उपयोग साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त अपराध की आय को प्राप्त करने व स्थानान्तरित करने व निकासी के लिए किया गया है तथा उक्त खाते नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल की शिकायत जो कि पुलिस स्टेशन नवगढ़ महाराष्ट्र में पंजीकृत है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ए.सी.बी. मोंठ में स्थित बैंक खाता धारक की पहचान राकेश कुमार पुत्र कालीचरण निवासी ग्राम पाडरी थाना मोंठ के रूप में हुई है तथा दूसरे खाता धारक  की पहचान मनोज कुमार पुत्र वीर सिंह के रूप में हुई है। प्रारंभिक जाँच से यह पता चला है कि वह एक ऐसे समूह/गिरोह के सदस्य हैं जो धोखाधड़ी के कार्य में शामिल है। वह साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क द्वारा उत्पन्न ठगे गए धन को छिपाने और वितरित करने में सुविधा प्रदान कर रहा है। खाताधारक साइबर धोखाधड़ी नेटवर्क के अन्य सदस्यों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है। अवलोकनों के आधार पर राकेश कुमार व मनोज कुमार के विरूद्ध धारा-112(2),318(4) भा.न्या.सं.के तहत थाना मोंठ में मुकदमा दर्ज किया गया। उक्त मामले में अभियुक्त राकेश कुमार पुत्र काली चरन द्वारा प्रस्तुत द्वितीय जमानत प्रार्थनापत्र न्यायालय ने निरस्त कर दिया।

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