रेलवे कर्मचारी की मौत के मामले में लापरवाही में दोषी तीन चिकित्सकों व बीमा कम्पनी को भुगतना होगा 9 लाख रुपये जुर्माना
झांसी। चिकित्सकों की लापरवाही से रेलवे कर्मचारी की मौत के मामले में जिला उपभोक्ता फोरम ने तीन चिकित्सकों व बीमा कम्पनी को दोषी ठहराते हुए 9 लाख रुपये से अधिक जुर्माना लगाया है।
यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, अध्यक्ष अमर पाल सिंह, सदस्य देवेश अग्निहोत्री व
श्रीमती ज्योती प्रभा जैन ने दिया है।
परिवादियों की ओर से अधिवक्ता सुबोध वर्मा के अनुसार नैनागढ़ नगरा निवासी देवेन्द्र सिंह , राजेन्द्र सिंह तोमर पुत्रगण स्व. ओम प्रकाश सिंह ,रामदास ठाकुर पुत्र जाहिर सिंह ठाकुर निवासी ( दौरान मुकदमा मृत)अनीता सिंह व साधना सिंह पुत्रियां स्व. ओमप्रकाश सिंह ने विपक्षीगण डा० डीसी गोबिल निवासी मेडीकल कालेज केम्पस, झांसी,डा0 गनेश दत्त शुक्ला निवासी सिविल लाइन झांसी।(मृतक दौरान मुकदमा),डा० आर०के०अग्रवाल , मेवा चौधरी मेमोरियल नर्सिंग होम मेडीकल कालेज के सामने झांसी तथा दि० न्यू इंडिया इंश्योरेंस कं० लिमिटेड व जरिये ब्रांच मैनेजर, कचहरी चौराहा के खिलाफ परिवाद में बताया था कि देवेन्द्र सिंह आदि के पिता ओमप्रकाश सिंह रेलवे कारखाने में नौकरी करते थे, जहाँ से उन्हें 9 हजार रुपये मासिक वेतन एवं अन्य भत्ते मिलते थे। 23 मई 2001 को सिर दर्द होने पर उन्हें डॉ. जीडी शुक्ला को दिखाया गया। डॉ शुक्ला की दवा से ओमप्रकाश के शरीर में लाल दाने होने और घबराहट होने पर उन्हें रेलवे अस्पताल में दिखाया गया, जहाँ से मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक डॉ. डीसी गोविल ने डॉ. आरके अग्रवाल के नर्सिंग होम में भर्ती करवा दिया। जहाँ बिना जाँच किए अधिक दवाएं दिए जाने और गलत इंजेक्शन लगाये जाने से उनकी मौत हो गयी। उपभोक्ता फोरम में दायर परिवाद में चिकित्सकों व बीमा कम्पनी से हर्जाना दिलाए जाने की मांग की गयी।
उपभोक्ता फोरम के अध्यक्ष अमरपाल सिंह, सदस्य ज्योति प्रभा जैन एवं देवेश अग्निहोत्री ने तीनों चिकित्सकों को लापरवाही बरतने पर दोषी मानते हुए उनके साथ ही दि न्यू इण्डिया इश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड के शाखा प्रबंधक को 8,94,352 रुपये 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ 2 माह के अन्दर अदा करने तथा निर्धारित अवधि में धनराशि अदा न करने पर 9 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान का आदेश दिया। विपक्षियों को 15 हजार रुपये हर्जाने के रूप में भी अदा करने होंगे।कुल धनराशि का आधा-आधा भाग विपक्षी सं 01 डा० डी०सी० गोबिल व विपक्षी सं०3 डा० आर०के०अग्रवाल अदा करेगें। चूंकि विपक्षी सं०3 विपक्षी सं04 बीमा कंपनी के यहां से बीमित रहा है. ऐसी दशा में विपक्षी सं०3 के हिस्से की धनराशि विपक्षी बीमा कंपनी अदा करेगी। समस्त धनराशि में से परिवादी सं० 1, 3, 4 एवं 5 बराबर बराबर धनराशि प्राप्त करेगें।

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