सिद्धि हासिल कीजिए, प्रसिद्धि ज़रूर मिलेगी: श्रीकांत वर्मा बुंदलेखंड लिटरेचर फेस्टिवल के अंतिम दिन सात सत्रों में दिग्गजों ने रखी बात

 
 
झांसी। काम में सिद्धि यानी पारंगत होना ज़रूरी है. अगर एक बार सिद्धि मिल जाए तो प्रसिद्धि मिल ही जाएगी 
ये बातें अभिनेता श्रीकांत वर्मा ने कहीं. वे बुंदेलखंड लिटरेचर फेस्टिवल में मौजूद थे. झांसी किले की तलहटी स्थित तीन दिवसीय कार्यक्रम के अंतिम दिन रविवार को सात सत्र हुए। 
 
पहले सत्र 'मैदान से मंच तक: जीत, हार और सीख'में अर्जुन अवॉर्डी एथलीट रचना गोविल, पूर्व क्रिकेटर अरविंद कपूर मौजूद रहे. इनसे मॉर्डन गर्ल्स कॉलेज लखनऊ में असिस्टेंट प्रोफेसर ऋचा यादव ने बातचीत की. इस दौरान रचना गोविल ने खिलाड़ी के लिए डिसिप्लिन होना अनिवार्य बताया उन्होंने कहा कि कितना भी बड़ा खिलाड़ी हो, इवेंट में किसी के लिए इंतज़ार नहीं किया जाता. अपने समय को याद करते हुए बताया खेल में लगातार अच्छा करने के बावजूद सम्मान नहीं मिलता था रेलवे में सीनियर क्लर्क की नौकरी को हेय दृष्टि से देखा जाता था इसके बावजूद चुनैतियों की सामना करते हुए आगे बढ़ी. उन्होंने कहा आज खेल इतना फास्ट और विविधता से भर गया है कि कई क्षेत्रों में करियर बना सकते हैं. अरविंद कपूर ने यूपी सीनियर टीम के कोच के रूप में अपनी ज़िम्मेदारियों पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि बीसीसीआई यूपी के खिलाड़ियों को काफी प्रोत्साहित कर रहा है खेल के मैदान से लेकर डाइट तक काफी ध्यान दिया जा रहा है. कोच के रूप में वे खिलाड़ियों को लगातार चुनौतियों से जूझने के लिए प्रोत्साहित करते हैं. इसके अलावा उन्होंने बच्चों को खेल के साथ पढ़ाई करने पर भी फोकस किया। 
 
दूसरे सत्र जिंदगी एक सफर है सुहाना में ट्रेवलर और लेखक राहुल नील, महिला सोलो ट्रेवलर डॉ. कायनात काजी से पत्रकार ऋतु भारद्वाज ने संवाद किया. इस सत्र में राहुल ने अनप्लैन्ड ट्रैवलिंग पर फोकस किया। उन्होंने कहा कि झोला उठाइए और निकल पड़िए प्रसिद्ध स्थलों की बजाय अपेक्षाकृत कम चर्चित जगहों पर जाइए. वहां के लोगों से परिचय कीजिए, उनके यहां खाइए-पीजिए और रहिए. इसके बदले में उनके और उनके बच्चों को कुछ दीजिए. उन्होंने चंबा में अपने ऐसी ही एक यात्रा का किस्सा भी सुनाया उन्होंने बुंदेलखंड में बांदा स्थित कलिंजर का किला,महोबा का सूर्य मंदिर, मुरैना के मितावली-पड़ावली का चौसठ योगिनी मंदिर के भ्रमण करने का आग्रह किया कायनात ने कहा कि यात्राएं हमें अपने आप से मिलवाती हैं हालांकि महिलाओं के लिए चुनौतियां ज्यादा हैं. उन्हें इसके लिए खुद को तैयार करना होगा कायनात ने ट्रैवेल के दौरान कपड़ों की अधिकता और सोशल मीडिया कल्चर से बचने के साथ ही ट्रेन से सफर पर ज़ोर दिया कहा कि जब आप अपने दम पर ट्रैवल करेंगे तो व्यक्तित्व में अलग ही निखार आएगा।  
 
तीसरे सत्र साहित्यिक चेतना और सामाजिक यथार्थ में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और साहित्यकार सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज व लेखक दीपक मशाल मौजूद रहे. इनसे अपनी हिंदी के संपादक नितेश प्रसाद रूबरू हुए. युवा पीढ़ी के पाठन में कम रुचि लेने की बात पर सत्यार्थ अनिरुद्ध ने कहा कि साहित्यकार जेनी जी और अल्फा के मन की बातें नहीं लिख रहे हैं. इसलिए पाठकों से जुड़ाव नहीं हो पा रहा है. दीपक मशाल ने स्थानीय गायन, वादन और साहित्य को संजोने, उसे मुख्यधारा में लाने का आग्रह किया उन्होंने यह भी कहा कि केवल मनोरंजन के लिए लिखा गया साहित्य कालजयी नहीं होगा. जिसके लिखे से समाज सीखेगा, बदलाव आएगा, वही कालजयी बनेगा दोनों ही लेखकों ने हर भाषा के अच्छे साहित्य के अनुवाद पर ज़ोर दिया।
 
इस दौरान बुकऑडियो के संस्थापक राजीव की संपादित मासिक पत्रिका के मन की बात संस्करण का लोकार्पण हुआ।
 
चौथे सत्र 'जनजातीय विरासत से वैश्विक मंच तक की यात्रा' विषय पर विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव अंजु रंजन से आदिवासी विषयों के लेखक संदीप मुरारका ने चर्चा की अनु ने झारखंड के चतरा में बीते बचपन को याद करते हुए प्रदेश की पहली सिविल सर्वेंट बनने का किस्सा याद किया. उन्होंने बताया कि विदेश मंत्रालय के अधिकारी के रूप में कहीं जाने पर झारंखड के उत्पादों को गिफ्ट के रूप में देती हैं. ICCR में रहते हुए उन्होंने झारखंड-बिहार की नृत्य-संगीत-पेंटिंग दलों को कई देशों में भेजा बातचीत में उन्होंने बताया कि शिक्षा मंत्रालय की कंसल्टेंट एजेंसी Edcil नियुक्त कर विदेशी इनवेस्टमेंट, विदेशी छात्रों के भारत में पढ़ने और आदिवासी बच्चों के विदेश में पढ़ने की व्यवस्था करता है मोदी सरकार आने पर सुषमा स्वराज ने विदेश मंत्रालय में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए पद बनाया.आज उस पद पर मैं काम आगे बढ़ा रही हूं।
 
इस दौरान फ्लाईड्रीम्स प्रकाशन की दो पुस्तकों, गोलू सेन कुंभराजी की पुस्तक रैंक-80 और संजय सिंह 'लफ्ज' की पुस्तक ज़िंदगी बनाम ज़िंदगी का लोकार्पण हुआ. इस दौरान फ्लाईड्रीम्स के प्रकाशन प्रमुख जयंत कुमार बालोच मौजूद रहे.          
 
पांचवे सत्र 'ये हौसला कैसे झुके' में कर्नल सुकेश वर्मा से डीयू में ऐसोसिएट प्रो. मुन्ना कुमार पांडेय रूबरू हुए।
 इस दौरान कर्नल सुकेश ने युवाओं से आउटडोर खेलों से जुड़े रहने, सोशल मीडिया का न्यूनतम प्रयोग करने का आग्रह किया उन्होंने कहा कि जीवन में सफल होने के लिए अनुशासन ज़रूरी है. अनुशासित रहते हुए खुद को काबिल बनाइए सफलता ज़रूर कदम चूमेगी. उन्होंने बार-बार पीछे मुड़कर देखने की बजाय हमेशा आगे बढ़ने का आग्रह किया। 
 
छठे सत्र बदलते परिवेश में आस्था के स्वरूप विषय पर यूपी सीएम के मीडिया सलाहकार डॉ. रहीस सिंह और वरिष्ठ पत्रकार राम मोहन शर्मा से साहित्यकार डॉ. अनिरुद्ध रावत और शिक्षक डॉ. बृजेश दीक्षित ने संवाद किया. डॉ. रहीस ने अपनी नवीनतम पुस्तक कैकेयी के राम का वर्णन करते हुए बताया कि राम अगर वन न जाते तो कैसे पता कर पाते कि राष्ट्र प्रहरी केवल सैनिक ही नहीं, वनवासी पशु-पक्षी भी होते हैं. उन्होंने कहा कि राम के वन से लौटने पर वशिष्ठ ने बताया कि उन्होंने ही कैकयी को वनगमन का वरदान मांगा था ताकि वे इन अनुभवों से रूबरू हो सकें. आस्था के विषय को उन्होंने अंतरात्मा का, धर्म को समग्र परिवेश का विषय बताया. इस दौरान राम मोहन शर्मा ने राम और कृष्ण के विभिन्न गुणों का वर्णन करते हुए स्वरचित कविताएं सुनाईं।   
 
इसके बाद पर्ल्स ऑफ बुन्देलखंड सम्मान समारोह हुआ 
 
सातवें सत्र अभिनय और अस्तित्व में अभिनेता श्रीकांत वर्मा से आरजे शाहनवाज ने चर्चा की श्रीकांत ने कहा कि बचपन में चित्रकला और गायन का शौक था. बाद में एक नाटक किया तो पता चला कि इसमें तो सभी कलाएं निहित हैं. फिर इसी में मन रमता गया। पारंपरिक व्यवसाय न करके थियेटर करने की वजह से पिता ने घर से निकाल दिया फिर कई निराशा के पल आए, लेकिन डटकर काम करता रहा आज पिता होते तो सफलता पर बहुत खुश होते अभिनय की बारीकियों पर चर्चा करते हुए कहा कि एक्टिंग सीखने की नहीं समझने की ज़रूरत है। शब्द सिर्फ माध्यम होते हैं आपको किरदार की परिस्थिति में ढलना होता है. युवाओं को प्रेरणा देते कहा कि अगर काम में सिद्धि यानी पारंगत होना ज़रूरी है. अगर एक बार सिद्धि मिल जाए तो प्रसिद्धि मिल ही जाएगी।
 
कार्यक्रम के समापन समारोह में मुख्य अतिथि सीएम योगी के मीडिया सलाहकार और शिक्षाविद रहीस सिंह, अध्यक्ष बुदेलखंड विवि के कुलपति मुकेश पांडेय, विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार राम मोहन शर्मा, झांसी की म्यूनसिपल कमिश्नर आकांक्षा  राणा और अभिनेता श्रीकांत वर्मा रहे. संचालन बृजेश दीक्षित और अनुपम व्यास ने किया।
 इस दौरान पल्स ऑफ बुंदेलखंड सम्मान दिया गया. यह इस पुरस्कार का लगातार तीसरे वर्ष था. जिसे दो समाजसेवी मुकुंद मल्होत्रा और इतिहासविद देवेद्र सिंह को दिया गया।
 
इसके बाद सांस्कृतिक संध्या में प्रख्यात नर्तक रवि प्रताप सिंह ने शानदार कथक नृत्य प्रस्तुत किया. वहीं, विशाल सागर ब्रदर्स ग्रुप ने म्यूजिक नाइट की प्रस्तुति दी. कार्यक्रम के तीन दिवसों में बड़ी संख्या में शहरवासी कार्यक्रम में पहुंचे वहीं, पूरे फेस्टिवल के दौरान बुंदेलखंड लिटरेचर फेस्टिवल के तहत हुई निबंध-पेटिंग प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया।
 इस दौरान बुक स्टॉल, कैलीग्राफी स्टॉल और स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लिया।

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.