आवासीय योजना, बुन्देलखंड वृत्त, खण्ड-1, तालपुरा, झाँसी को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने को ग्रामीणों ने लिखा पत्र
झांसी: आज कोछाभांवर, मुस्तरा, टांकोरी एवं पिछोर के ग्रामीणों ने लिखित पत्र देते हुए बताया कि आवास विकास परिषद द्वारा बुन्देलखंड वृत्त, खण्ड-1, तालपुरा, झांसी अंतर्गत आवासीय योजना-4 हेतु मौजा कोछाभाँवर, मुस्तरा, टकोरी एवं पिछोर की कृषकों की भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है।
इस संबंध में समस्त कृषक, व्यापारी एवं श्रमिक वर्ग अपनी भूमि इस योजना हेतु देने को तैयार नहीं हैं तथा पूर्व में अपनी लिखित आपत्तियाँ प्रस्तुत कर चुके हैं।
नियोजन समिति की बैठक में भी सर्वसम्मति से भूमि न देने का निर्णय संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।
उक्त भूमि नगर निगम सीमा एवं Jhansi Development Authority की सीमा में स्थित है तथा पूर्णतः विकसित, उपजाऊ एवं सिंचित बहु फसली कृषि भूमि है।
महोदय, हमें यह भी ज्ञात हुआ है कि अधिशासी अभियंता डी.वी. यादव द्वारा प्रेषित प्रतिवेदनों में यह दर्शाया गया है कि किसान इस योजना हेतु सहमत हैं, जबकि वास्तविक स्थिति इसके विपरीत है। साथ ही जनपद झांसी के अन्य क्षेत्रों में पर्याप्त सरकारी एवं अनुपयोगी भूमि उपलब्ध है, जहाँ अभी विकास नहीं हुआ है तथा कोई आवासीय योजना संचालित नहीं है। यदि उक्त योजना को ऐसे किसी वैकल्पिक क्षेत्र में स्थानांतरित किया जाए तो—
सरकार का अधिग्रहण व्यय कम होगा,
उपजाऊ एवं सिंचित कृषि भूमि सुरक्षित रहेगी,
तथा जनविरोध की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी।
वर्तमान चुनावी वर्ष में उपजाऊ एवं सिंचित फसली भूमि का अधिग्रहण क्षेत्रीय जनता में गहरी नाराजगी उत्पन्न कर रहा है। जनभावनाओं की उपेक्षा से अनावश्यक सामाजिक असंतोष की स्थिति बन सकती है, जो शासन एवं प्रशासन की छवि के लिए भी हितकारी नहीं होगी। हम सभी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश के विकास में विश्वास रखते हैं और नहीं चाहते कि किसी भी स्तर पर तथ्यहीन या भ्रामक जानकारी के कारण शासन की छवि प्रभावित हो। ग्रामीणों ने अनुरोध किया कि आवासीय योजना-4 को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए अथवा वैकल्पिक सरकारी भूमि पर स्थानांतरित किया जाए।
प्रेषित प्रतिवेदनों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जाए।
प्रस्तावित अधिग्रहण से हमारी भूमि को मुक्त किया जाए।
अन्यथा समस्त ग्रामवासी लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण ढंग से अपने अधिकारों की रक्षा हेतु आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
आशा है कि आप कृषक हित एवं जनभावनाओं का सम्मान करते हुए न्यायोचित निर्णय प्रदान करेंगे।
रिपोर्ट अंकित साहू
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