महापुरुषों के साहित्य को पढ़ें विद्यार्थी: हरगोविंद कुशवाहा

झांसी। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष और दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री हरगोविंद कुशवाहा ने कहा कि विद्यार्थियों को महाराजा छत्रसाल और अन्य महापुरुषों के बारे में उपलब्ध साहित्य को गौर से पढ़ना चाहिए। सभी विद्यार्थियों को अपने महापुरुषों के बारे में जानना चाहिए।
उन्होंने यह उद्गार शनिवार को बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय पुस्तक मेले के उद्घाटन अवसर पर व्यक्त किया।
उन्होंने गीता के प्रसंग का उल्लेख करते हुए ईश्वर और भक्त के पारस्परिक संबंध का कारण रेखांकित किया। बकौल कुशवाहा भगवान कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश में ज्ञानी का विस्तार से लक्षण बताया। उन्होंने महाराजा छत्रसाल के पौरुष और कथनों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनके बारे में सभी विद्यार्थियों को बताया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों और उनकी पुस्तकों के बारे में भी विद्यार्थियों को जानकारी दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में एक करोड़ से अधिक पुस्तकें हैं। उन्होंने महाराजा छत्रसाल की एक रचना आवत देख गुनी जन को छत्रसाल कहें उठ आदर दीजै सुनाकर विद्वतजनों का सम्मान करने का आह्वान किया। उन्होंने नई पीढ़ी को पुस्तकों की ओर उन्मुख करने पर भी जोर दिया।
शुरुआत में राष्ट्रीय पुस्तक मेले के संयोजक और कला संकाय अधिष्ठाता प्रो पुनीत बिसारिया ने मेले के लिए प्रस्तावित सभी कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हर दिन लेखकों का दर्शकों से सीधा संवाद भी आयोजित किया जाएगा।
विशिष्ट अतिथि और राष्ट्रीय संग्रहालय के उपनिदेशक डा मनोज गौतम ने कहा कि पुस्तकों का संग्रह अच्छी आदत है। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि पुस्तकों के संपर्क में आएं ताकि समुचित ज्ञान मिल सके। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई की कि अब विद्यार्थियों का समूह पुस्तकालयों की ओर ठीक से नहीं जा रहा है। डा गौतम ने कहा कि पुस्तकें हमें ज्ञान देती हैं। इसलिए हमें निरंतर इनके संपर्क में रहना चाहिए।
 
इससे पहले राज्यमंत्री कुशवाहा ने फीता काटकर राष्ट्रीय पुस्तक मेले का शुभारंभ किया। उन्होंने विभिन्न स्टालों पर जाकर वहां उपलब्ध पुस्तकों के बारे में जानकारी हासिल की। उद्घाटन कार्यक्रम में प्रो एसके कटियार, प्रो अवनीश कुमार, प्रो मुन्ना तिवारी, डा सुधा दीक्षित, डा प्रेमलता, लोक भूषण पन्ना लाल असर, डा रामशंकर भारती, निहाल चंद्र शिवहरे, राजकुमार अंजुम, भगवान सिंह कुशवाहा, श्याम नायक सत्य, पंकज अभिराज, विजय प्रकाश सैनी, अर्जुन सिंह चांद, हिमांशु चौधरी, सत्य नारायण ताम्रकार, डा विपिन प्रसाद, जनसंचार एवं पत्रकारिता संस्थान के शिक्षक उमेश शुक्ल, डा अभिषेक कुमार, संस्कृत शिक्षक डा शंभूनाथ घोष समेत अनेक लोग मौजूद रहे। उद्घाटन सत्र में सभी अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। संचालन डा अचला पाण्डेय ने किया। 
हिंदी विभाग के विद्यार्थियों ने किताबें बोलती हैं लघु नाटिका प्रस्तुत की। दर्शकों ने तालियां बजाकर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया।
कवियों ने रचनाओं से मोहा मन
 
राष्ट्रीय पुस्तक मेले में बही काव्य की धारा
 
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय पुस्तक मेले के पहले दिन कवियों ने बहुरंगी रचनाओं से दर्शकों का मन मोहा।
 
कवि सम्मेलन की शुरुआत में पन्ना लाल असर ने सरस्वती वंदना पेश की। इसमें हैदर ललितपुरी ने
तुम अपने मुल्क की तहजीब को रुसवा नहीं करना रचना पेश की। कल्याण दास साहू ने रे मन राम राम को रट रे रचना पेश की।
निहालचंद शिवहरे ने एक रचना से युवा पीढ़ी का आह्वान किया कि प्रकृति संग वैलेंटाइन मनाइए। बेटियों को भी एक रचना समर्पित की कि मैं बनी परवाज़ के लिए पेश की।
रामशंकर भारती ने तुम्हारी देह का चंदन अबीर हो जाऊं रचना पेश की।
पंकज अभिराज ने खुशबू के जैसे मुझमें वो भरता चला गया,पागल वो मुझे इश्क़ में करता चला गया रचना सुनाई। एक अन्य रचना जब से मैं अपने हक का तलबगार हो गया, हर शख्स मेरी राह की दीवार हो गया,,, रचना सुनाई। 
भगवान सिंह राही ने जब तुम जीवन की धारा में रसमय रसमय हो जाते हो रचना पेश की। महामना राजा दशरथ को यज्ञ समापन होवन पर रचना भी सुनाई।
व्यंग्यकार सत्य प्रकाश सत्य ने भी अपनी रचनाएं पेश की। कवि सम्मेलन का संचालन अर्जुन सिंह चांद ने किया।
इस कार्यक्रम में मेला संयोजक प्रो पुनीत बिसारिया, डा अचला पाण्डेय, सह संयोजक डा श्रीहरि त्रिपाठी, डा सुधा दीक्षित, डा विपिन प्रसाद, डा प्रेमलता, डा सुनीता वर्मा, डा द्युतिमालिनी, उमेश शुक्ल, डा जय सिंह, डा अतुल गोयल समेत अनेक लोग मौजूद रहे।

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