डीएम ने किया टारगेट फिक्स, 30 अप्रैल पूरा करवाएं फार्मर रजिस्ट्री का काम

झांसी: कृषि एवं राजस्व विभाग द्वारा संयुक्त रूप से भारत सरकार की ऐग्रीस्टैक योजना के अन्तर्गत प्रदेश में कृषकों के किसान पहचान पत्र (फार्मर आईडी) बनाए जा रहे हैं तथा वर्तमान में लगभग 77% प्रतिशत कृषकों के किसान पहचान पत्र तैयार किए जा चुके हैं। जनपद में शेष कृषर्को के किसान पहचान पत्र तैयार किए जाने का कार्य भी शीर्ष प्राथमिकता पर किया जा रहा है तथा इस उद्देश्य से जनपद में 30 अप्रैल, 2026 कार्य पूर्ण करने के लिए संचालित 66 गेहूं क्रय केंद्रों पर विशेष कैम्प लगाकर किसान पहचान पत्र बनाने का अभियान चलाया जा रहा है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा भविष्य में प्रदान की जाने वाली प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की किश्तों को उन्हीं कृषकों को प्रदान किया जाएगा, जिनके किसान पहचान पत्र जारी किए गए हों। राज्य सरकार द्वारा भी इसी नीति का अनुसरण करते हुए कृषि विभाग एवं सहयोगी विभार्गों यथा उद्यान, पशुपालन, मत्स्य, सहकारिता, लघु सिंचाई इत्यादि की लाभार्थी परक योजनाओं का क्रियान्वयन किसान पहचान पत्र के आधार पर किए जाने का निर्णय लिया गया है। उपर्युक्त नीति के अनुसार जिलाधिकारी मृदुल चौधरी द्वारा ज़ूम ऐप के माध्यम से समीक्षा करते हुए द्वारा बताया कि प्रथम चरण में कृषि विभाग द्वारा अपनी लाभार्थी परक योजनाओं यथा उर्वरक, बीज, कीटनाशी एवं अन्य इनपुट के वितरण व लाभार्थियों के चयन में किसान पहचान पत्र को आधार बनाया गया। इसके अतिरिक्त जनपद में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर क्रय किए जाने वाले कृषि उत्पाद (गेहूँ / धान/दार्ले / सरसों इत्यादि) के क्रय के लिए किसान पहचान पत्र भी अनिवार्य रहेगा तथा क्रय केन्द्र पर कृषकों से खरीद से पूर्व उनके किसान पहचान पत्रों का सत्यापन अनिवार्य रूप से किया जाएगा। तदोपरान्त अब अन्य विभागों द्वारा भी किसान पहचान पत्र के आधार लाभार्थी परक योजनाओं में चयन / लाभ वितरण की कार्यवाही की जा रही है। जूम ऐप के माध्यम से फार्मर रजिस्ट्री की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी मृदुल चौधरी ने बताया कि जनपद में अनुदानित रासायनिक उर्वरकों का वितरण कृषि विभाग द्वारा प्रदत्त आवण्टन के आधार पर सहकारिता विभाग द्वारा प्राथमिक सहकारी समितियो तथा निजी विक्रेताओं द्वारा किया जाता है। वर्तमान में उर्वरकों का वितरण पीओएस मशीनों के माध्यम से इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम ( आईएफएमएस ) पोर्टल की सहायता से किया जाता है। माह मई, 2026 से यह वितरण किसान पहचान पत्र व फार्मर रजिस्ट्री के आधार पर ही किया जाएगा और इसके लिए कृषि विभाग द्वारा भारत सरकार से समन्वय स्थापित कर आईएफएमएस पोर्टल को ऐग्रीस्टैक पोर्टल से जोड़कर अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।
समीक्षा करते हुए उन्होंने कृषि विभाग की समस्त लाभार्थी परक योजनाओं में किसान पहचान पत्र एवं फार्मर रजिस्ट्री की मदद से लाभार्थियों का चयन करने हेतु कृषि विभाग द्वारा अपने पोर्टल को 01 मई, 2026 तक तैयार करने के निर्देश दिए। खाद्य एवं रसद विभाग तथा कृषि विभाग द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर की जाने वाली समस्त खरीद में तत्काल प्रभाव से किसान पहचान पत्र / फार्मर आई०डी० को अनिवार्य करते हुए मात्र उन्हीं कृषकों से खरीद की जाएगी, जिनके पास किसान पहचान पत्र होंगे। उन्होंने बताया कि अन्य विभागों द्वारा भी लाभार्थी परक योजनाओं के लिए किसान पहचान पत्र का प्रयोग अनिवार्य करने के लिए कृषि विभाग से समन्वय कर 01 मई, 2026 से अनुपालन हेतु तैयारी पूर्ण कर लिए जाने का सुझाव दिया।
जूम ऐप के माध्यम से जनपद में फार्मर रजिस्ट्री की प्रगति को बढ़ाने के लिए आयोजित समीक्षा बैठक में उप कृषि निदेशक श्री एम पी सिंह ने बताया कि जनपद में लगभग 77% प्रतिशत कार्य पूर्ण कर लिया गया है, शेष कार्य के लिए अभियान चलाते हुए पूर्ण कर लिया जाएगा। जनपद के 2,07,655 किसानों के सापेक्ष अब तक 1,91,755 किसानों की फार्मर रजिस्ट्री पूर्ण कर ली गई है।
इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व वरुण कुमार पांडेय, उप कृषि निदेशक एम पी सिंह एवं विषय वस्तु विशेषज्ञ राजकुमार यादव उपस्थित रहे।
 
रिपोर्ट अंकित साहू

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.