बारह गुणों से युक्त भक्त ही प्रभु के श्रेष्ठ भक्त होते हैं:कथा व्यास

झांसी। मेंहदी बाग स्थित राम-जानकी मंदिर में चल‌ रही भक्त माल कथा में पंचम‌ दिवस का प्रसंग सुनाते हुए पूज्य महाराज मदन‌ मोहन‌ ने कहा  कि भक्त की कोई जाति नही होती,न कोई भक्त को बन्धन है कि वह अमुक जाति में ही पैदा होगा।भक्त तो जिस जाति में पैदा होता है भगवत भक्ति से वह उसी जाति का तारन कर देता है।महाराज श्री ने कहा  रैदास जैसे भक्त सौ ब्राह्मणों से भी श्रेष्ठ हुए।ब्राह्मण के 12 गुण है अगर उसमें वह 12 गुण विद्यमान है तो वह सर्वश्रेष्ठ होता है,बल,बुद्धि,विद्या,तप,यश,क्षमा,तुलसी धारण,कंठी धारण, संतोषी,आदि ब्राह्मण के गुण बताये है।एक प्रसंग सुनाते हुए महाराज श्री ने बताया कि श्री जी का जब विवाह होकर आया तो पता चला कि कमल से भी कोमल है ,साशु मां ने करोड़ों कोमल कमल मंगाकर उनके परागो को श्री जी के रास्ते में बिछा दिया,फिर भी श्री जी के कोमल होंठ कुम्हलाने लगे तब माता ने कहा कि मेरी बहु श्री जी को हम अपनी गोद में बैठा लेंगे। जब जब भी काम वासना या कामना सताये तब हरि चरणों में ध्यान लगाओ कामनाओं से मन हट जायेगा।भागवताचार्य और हरिवंश जी महाराज ने सुंदर भजन सुनाया जहां आप रख लोगे वहीं मैं रहूंगा जहां ले चलोगे वहीं मैं चलूंगा जिसे श्रोता  मंत्रमुग्ध होकर खूब झूमे।अंत में अंचल अडजरिया, आलोक शांडिल्य,सुशील‌ भार्गव, प्रमोद सीरोठिया आदि ने महाराज श्री का माल्यार्पण कर पुराण की आरती उतारी।

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