राष्ट्रीय लोक अदालत में हुआ दो लाख से ज्यादा मामलों का निस्तारण,16 विवादित जोड़ों के बीच कराई सुलह

झांसी : आज जनपद न्यायाधीश श्रीमती कमलेश कच्छल द्वारा राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्‌घाटन जनपद न्यायालय, झांसी में किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश सहित अन्य न्यायाधीशो द्वारा माँ सरस्वती जी की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलित एवं माल्यार्पण कर किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल अधिकारी शरद कुमार चौधरी, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफ०टी०सी०/14 एफ०सी०) झाँसी, सुमित परासर, प्रभारी सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, झाँसी एवं अन्य न्यायिक अधिकारीगण, वरिष्ठ अधिवक्ता तथा बैंक अधिकारी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर जनपद न्यायाधीश ने अपने सम्बोधन में कहा कि तकनीक के समावेश से न्याय प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति आएगी। उन्होंने आमजनमानस से अपील की कि वे इन लोक अदालतों में सहभागिता कर न्याय प्रक्रिया को सरल एवं सुगम बनाएं एवं इन सुविधाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं ताकि उन्हें छोटे-छोटे कार्यों के लिए भटकना न पड़े ।
इस राष्ट्रीय लोक अदालत में विभिन्न प्रकृति के कुल 2,72,743 वादों का निस्तारण किया गया जिसमें 154 वैवाहिक प्रकरण, 63 अन्य सिविल वाद, 1326 अन्य वाद निस्तारित किए गए। 11614 शमनीय आपराधिक वादों का निस्तारण कर 7,00,731/- रूपये अर्थदण्ड के रूप में वसूल किए गए । जनपद के विभिन्न राजस्व/दाण्डिक न्यायालयों द्वारा 184 राजस्व वाद, 1058 आपराधिक वाद, 10537 विद्युत उपभोक्ता वाद, 142 श्रम विवाद, 88359 जनहित गारन्टी अधिनियम वाद निस्तारित किए गए । इसके अतिरिक्त 6,00,32,082/- रूपये की धनराशि से सम्बन्धित 909 बैंक ऋण एवं मोबाइल बिल सम्बन्धी 10 वाद प्रीलिटिगेशन वाद के रूप में निस्तारित किए गए । मनराज सिंह, पीठासीन अधिकारी, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण, झाँसी द्वारा 48 वादों का निस्तारण किया गया, रविन्द्र कुमार श्रीवास्तव, प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय झाँसी द्वारा 74 पारिवारिक मामलों का निस्तारण किया गया। प्रभारी सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण झाँसी ने विशेष रूप से झाँसी के लोगों का आभार व्यक्त किया, जिनके सहयोग से आज राष्ट्रीय लोक अदालत में रिकार्ड 2,72,743 वादों का निस्तारण हो सका। 
 
ई-सेवा केन्द्र एवं फ्री लीगल हेल्प डेस्क का उद्घाटन-
 स्थानीय जनपद न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत के अवसर पर जनपद न्यायाधीश द्वारा जनहित में कई महत्वपूर्ण सुविधाओं का शुभारंभ किया गया । इस कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण के रूप में 'ई-सेवा केंद्र' (e-Seva Kendra) और 'फ्री लीगल हेल्प डेस्क' का विधिवत उद्घाटन किया गया। जनपद न्यायाधीश द्वारा उद्घाटित 'ई-सेवा केंद्र' न्याय प्रणाली को आधुनिक और सुलभ बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। नोडल अधिकारी (कम्प्युटर) अनुभव द्विवेदी अपर जिला जज द्वारा बताया गया कि इस केंद्र के माध्यम से अधिवक्ताओं और वादकारियों को निम्नलिखित डिजिटल सुविधाएँ प्राप्त होंगी :
केस की जानकारी : मुकदमों की वर्तमान स्थिति और सुनवाई की अगली तारीख की त्वरित जानकारी।
ई-फाइलिंग सहायता: याचिकाओं की स्कैनिंग, ई-हस्ताक्षर और CIS पोर्टल पर अपलोड करने में तकनीकी मदद।
प्रमाणित प्रतियां: न्यायिक आदेशों और फैसलों की प्रमाणित प्रतियों के लिए ऑनलाइन आवेदन।
ई-भुगतान: ई-स्टाम्प पेपर की खरीद और कोर्ट फीस का ऑनलाइन भुगतान।
ई-मुलाकात: जेल में निरुद्ध कैदियों से परिजनों की मुलाकात के लिए ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग।
डिजिटल हस्ताक्षर: आधार-आधारित डिजिटल हस्ताक्षर  प्राप्त करने में सहायता।
अन्य सेवाएँ: ई-कोर्ट्स ऐप डाउनलोड कराना, वाद सूची  की जानकारी और निर्णयों की सॉफ्ट कॉपी व्हाट्सएप/ईमेल पर उपलब्ध कराना।
न्यायालय में आने वाले आम जनमानस की सुविधा के लिए एक 'फ्री लीगल हेल्प डेस्क' भी स्थापित की गई है। यहाँ दो प्रशिक्षित पराविधिक स्वयंसेवक सदैव उपस्थित रहेंगे, जो लोगों को कानूनी सलाह देने के साथ-साथ न्यायालय की प्रक्रियाओं को समझने में मार्गदर्शन करेंगे। 
लोक अदालत के अवसर पर शासन के विभिन्न विभागों द्वारा विशेष स्टॉल भी लगाए गए, इन स्टॉलों का मुख्य उद्देश्य आम जनता को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से रूबरू कराना और उनकी विभागीय समस्याओं का मौके पर ही समाधान सुनिश्चित करना रहा, जिससे दूर-दराज से आए लोगों को अपनी समस्याओं के निवारण के लिए एक ही पटल पर समस्त जानकारी उपलब्ध हो सकी ।
 
पारिवारिक न्यायालय, झाँसी की मध्यस्थता से 16 घर बसे
आज जनपद न्यायालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत केवल कानूनी निस्तारण का मंच नहीं, बल्कि बिखरते परिवारों को जोड़ने का केंद्र भी बनी। जनपद न्यायाधीश  के मार्गदर्शन में आज पारिवारिक न्यायालय ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 16 विवादित जोड़ों के मध्य सफल सुलह कराई।
पारिवारिक न्यायालय में वर्षों से लंबित विवादों को खत्म करने के लिए  जनपद न्यायाधीश एवं प्रधान न्यायाधीश (पारिवारिक न्यायालय) की उपस्थिति में काउंसलिंग की गई। काउंसलिंग के सकारात्मक परिणाम स्वरूप 16 जोड़ों ने अपने पुराने मतभेदों को भुलाकर पुनः साथ रहने का निर्णय लिया। इस भावुक पल में न्यायाधीशों के अतिरिक्त नोड़ल अधिकारी एवं प्रभारी सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, झाँसी की उपस्थिति में जोड़ों ने एक-दूसरे को माला पहनाई और मिष्ठान खिलाकर अपने वैवाहिक जीवन की नई शुरुआत की।
कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारीगण रविन्द्र कुमार श्रीवास्तव, प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय झाँसी, सुनील कुमार यादव, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, न्यायालय संख्या-01, झाँसी, आदित्य चतुर्वेदी, विशेष न्यायाधीश, एससी/एसटी एक्ट, झाँसी, नेत्रपाल सिंह, विशेष न्यायाधीश, दस्यु प्रभावित क्षेत्र, झाँसी, कमलकान्त श्रीवास्तव, विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, विशेष न्यायालय सं० 1, झाँसी, अनुभव द्विवेदी, विशेष न्यायाधीश, ई०सी० एक्ट, झाँसी, मनोज कुमार जाटव, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, एफ०टी०सी० (सी०ए०डब्लू०), हरिश्चन्द्र, अपर प्रधान न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय, झाँसी, विजय कृष्ण सिंह, अध्यक्ष स्थायी लोक अदालत, अनिल कुमार सप्तम, अपर सिविल जज (सी०डि०), न्यायालय स० 1 / अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, झाँसी, ओम पाल सिंह, लघुवाद न्यायाधीश, झाँसी, मुन्नालाल, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, झाँसी, प्रतीक त्रिपाठी, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रेलवे, झाँसी, श्रीमती ईशा त्रिपाठी, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, न्यायालय स० 1, झाँसी,  नन्दनी अग्निहोत्री, सिविल जज (जू०डि०), श्रीमती खुशबू धनखड़, न्यायिक मजिस्ट्रेट, न्यायालय सं० 2, झाँसी,अंजली, सिविल जज (जू०डि0) / एफ०टी०सी० (सी०ए०डब्लू०) झाँसी, धीरेन्द्र कुमार, सिविल जज (जू०डि०), एफ०टी०सी० (14 एफ०सी०), अमन राय, सिविल जज (जू०डि०) न्यायालय सं० 02, झाँसी, सूबा सिंह, पीठासीन अधिकारी, अतिरिक्त न्यायालय, झाँसी, प्रमोद शिवहरे, अध्यक्ष जिला अधिवक्ता संघ, झाँसी,  छोटेलाल वर्मा, सचिव जिला अधिवक्ता संघ, झाँसी और बड़ी संख्या में वादकारी उपस्थित रहे।
 
रिपोर्ट अंकित साहू

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.