सनातन संस्कृति, संस्कृत एवं लोकमंगल के संवाहक वेदपाठी आचार्यों का हुआ सम्मान

झांसी। ब्राह्मण समाज झांसी द्वारा "सनातन धर्म, लोकमंगल एवं वैदिक परंपरा" विषय पर आयोजित संगोष्ठी में भारतीय वैदिक परंपरा, संस्कृत भाषा तथा सनातन सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वेदपाठी आचार्यों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि वेदपाठी आचार्य वर्षभर महामृत्युंजय जप, श्री दुर्गा सप्तशती पाठ, श्री विष्णु सहस्रनाम पाठ, रुद्राभिषेक एवं अन्य वैदिक अनुष्ठानों के माध्यम से विश्वशांति, आरोग्य, राष्ट्र की समृद्धि तथा जनमंगल की प्रार्थना करते हैं। उनका योगदान केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि वे संस्कृत भाषा, भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और वैदिक ज्ञान परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण दायित्व भी निभा रहे हैं। संगोष्ठी में इस बात पर भी चिंता व्यक्त की गई कि बुंदेलखंड समय-समय पर अल्पवर्षा एवं पेयजल संकट जैसी चुनौतियों का सामना करता रहा है। इसी भावना से वेदपाठी आचार्य पिछले कई दिनों से भगवान शिव की आराधना, महामृत्युंजय जप तथा वर्षा के अधिष्ठाता वरुण देव से अनुकूल वर्षा की प्रार्थना करते हुए विशेष वैदिक अनुष्ठान संपन्न कर रहे हैं, जिससे क्षेत्र में हरियाली बढ़े, किसानों की फसलें लहलहाएं, जलस्रोत समृद्ध हों और प्रत्येक नागरिक को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध हो सके। ब्राह्मण समाज के प्रांतीय संयोजक डॉ. जितेन्द्र कुमार तिवारी ने कहा कि सनातन परंपरा केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि "सर्वे भवन्तु सुखिनः" के आदर्श पर आधारित जीवन-दर्शन है। वेदपाठी आचार्य अपनी साधना, तप और विद्वत्ता से समाज को आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं नैतिक दिशा प्रदान कर रहे हैं। ऐसे विद्वानों का सम्मान हमारी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने नई पीढ़ी को संस्कृत, भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपराओं से जोड़ने के लिए समाज के सभी वर्गों से आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों का संवर्धन तथा किसानों की समृद्धि भारतीय संस्कृति के मूल आदर्श हैं। प्रकृति के साथ संतुलित जीवन ही आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित और समृद्ध भविष्य का आधार बन सकता है। संगोष्ठी के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण एवं राष्ट्रहित के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया। तत्पश्चात वेदपाठी आचार्यों को अंगवस्त्र, सम्मान-पत्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया तथा विश्व, राष्ट्र और बुंदेलखंड की सुख, शांति, समृद्धि एवं उत्तम वर्षा के लिए सामूहिक प्रार्थना की गई।उमेश दुबे, आदित्य चौबे, राहुल मिश्रा,अजय भार्गव, हरीशंकर खेबारिया, अमित गोस्वामी,प्रणव बुधोलिया, शिरोमणि शर्मा, आर एन शर्मा  महेश चंद्र गौतम, महेश द्विवेदी, मोतीलाल द्विवेदी, रामनारायण शर्मा, पंकज झा, अजय तिवारी, बद्री प्रसाद नायक,आर एन उपाध्याय आदि मौजूद रहे।

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