जीवन में आने वाले सुख -दुख जीव के कर्मो का फल हैं: विशाश्री माताजी
झांसी। अतिशय क्षेत्र करगुवांजी में चल रहे 48 दिवसीय 1008 भक्तामर महा मण्डल आराधना विधान के सप्तम दिवस रविवार को मंगल देशना देते हुए आर्यिका 105 विशाश्री माताजी ने कहा कि अहंकार का विसर्जन कर जो लघुता के साथ भक्ति करता है। राजा बनकर नहीं तीर्थंकर के चरणों में दास बनकर जो आता है वहीं भक्ति कर पाता है। जो भाव सहित भगवान के मुख मंडल का अवलोकन कर लेता है उसके जन्म जन्मांतर के पाप कट जाते हैं। उन्होंने कहा कि जीव के जीवन में आने वाले सुख दुख उसके द्वारा पूर्व में किये गये कर्मों का फल हैं। किस कर्म के उदय से जीवन में आनंद बरस रहा है, किस कर्म से दुखी हैं तथा किस कर्म से जीवन में आध्यात्म और वैराग्य बरस रहा है। यह हम नहीं जान पाते हैं लेकिन भगवान की महत्ता को हमें जानना होगा इसलिए हमें छिपकर भी कोई ग़लत काम नहीं करना चाहिए क्योंकि भगवान तो सब कुछ देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूजा में लज्जा का अनुभव न करें अथवा कोई क्या कहेगा ऐसा न सोचें बल्कि तन, मन और काया समर्पण कर भगवान की भक्ति करें तभी मोक्ष का मार्ग मिलेगा।
सप्तम दिवस के पुण्यार्जक प्रकाशचंद्र जैन, श्रीमती ऊषा जैन ,सचिन जैन, शिवम जैन समत्व मती श्री माताजी के ग्रहस्थ जीवन के परिवार जन ग्वालियर म.प्र. रहे। पं.दीपक कुमार जैन करैरा एवं पारस भैया के संयुक्त संचालन में समस्त धार्मिक क्रियायें सम्पन्न कर अर्घ समर्पित किये। संचालन दिगम्बर जैन पंचायत समिति के महामंत्री कमल जैन एवं करगुवां मंत्री एड. शिरोमणि जैन ने किया।अंत में विनोद जैन ने सभी का आभार व्यक्त किया।
इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य, निर्माण मंत्री भागचंद जैन,विधि सलाहकार अशोक जैन, डा.अमित जैन, राजीव जैन शिवाजी, डा.जिनेंद्र जैन,दीपक जैन वैद्य, अशोक जैन रत्न सेल्स, संजुल जैन,सुकुमाल जैन, प्रियांशु जैन, हर्ष जैन,कुलदीप जैन, श्रीमती प्रीति जैन, दीपक जैन रेलवे, एड.पवन सिंघई, सिद्धार्थ जैन सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।
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