ईश्वर तो अनंतानंत हैं: विशाश्री माताजी
झांसी। अतिशय क्षेत्र करगुवांजी में चल रहे 48 दिवसीय 1008 भक्तामर महा मण्डल आराधना विधान के अष्टम दिवस सोमवार को मंगल देशना देते हुए आर्यिका 105 विशाश्री माताजी ने कहा कि आदिनाथ भगवान गुण समुद्र हैं।
आचार्य मानतुंग स्वामी ने भक्तामर के चौथे काव्य के माध्यम से अपनी भक्ति में महास्रोत की रचना की है, जिसमें उन्होंने अपने चिंतन और मंथन में भगवान के अवर्णनीय गुणों की चर्चा की है। आचार्य मानतुंग स्वामी ने लिखा है कि चंद्रमा की कांति के समान भगवान के सभी गुण धवल हैं। उनके गुण अनंत हैं जिनकी आज तक कोई पूर्ण भक्ति नहीं कर पाया है अथवा भगवान की भक्ति करने में कोई भी समर्थ नहीं है, फिर मैं अल्प बुद्धि बाला आपके गुणों की आराधना करने को तैयार और तत्पर हूं क्योंकि आपकी कृपा से मोक्ष का द्वार खुला हुआ है।
यद्यपि भक्ति का मार्ग बहुत कठिन है किंतु जिन्होंने आपकी सच्चे मन से आराधना की है वे भक्ति के शिखर पर विराजमान हुए।
अषटम दिवस के पुण्यार्जक
श्रीमती मेघना जैन , श्रीमती नीलमा जैन, प्राची जैन, संजना जैन, रागिनी, राखी, सुरभी, प्रीति,रुपाली, अर्चना सहित जिनालय बडा बाजार महिला मंडल रहा जिन्होंने पं.दीपक कुमार जैन करैरा के संचालन में समस्त धार्मिक क्रियायें सम्पन्न कर अर्घ समर्पित किये।
इससे पूर्व महिला मंडल की सभी सदस्याओं ने माताजी को शास्त्र भेंट किये।संचालन दिगम्बर जैन पंचायत समिति के महामंत्री कमल जैन एवं करगुवां मंत्री एड. शिरोमणि जैन ने किया।अंत में चातुर्मास समिति के कोषाध्यक्ष बाहुबलि जैन ने सभी का आभार व्यक्त किया।इस मौके पर श्रीमती रानी भागचंद जैन निर्माण मंत्री,डा.कैलाश जैन,संजय जैन डीके, संजय सिंघई,डा.अमित जैन,विधि सलाहकार अशोक जैन, डा.अमित जैन,डा.कैलाश जैन, बालचंद्र जैन, विनोद जैन,शुवी जैन, रानू नरेन्द्र जैन, अशोक जैन रतन सेल्स, ऋषभ कुमार, समय जैन,दीपक जैन वैद्य, श्रीमती प्रीति जैन सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।
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