दलित के साथ गाली गलौज, मारपीट कर गंभीर रूप से घायल करने के मामले में दो अभियुक्तों की जमानत अर्जी निरस्त
झांसी। जाति सूचक शब्दों से अपमानित कर,गाली गलौज, मारपीट कर गंभीर रूप से घायल करने के मामले में दो अभियुक्तों की जमानत अर्जी विशेष न्यायाधीश अनु. जाति और अनु. जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम नेत्रपाल सिंह के न्यायालय ने निरस्त कर दी।
विशेष लोक अभियोजक केशवेन्द्र प्रताप सिंह व कपिल करौलिया के अनुसार वादी मुकेश बाल्मीकि ने थाना बरुआसागर में रिपोर्ट दर्ज करायी थी कि उसके पुत्र विकास बाल्मीकि को पिछले कई महीनों पहले गोपी कुशवाहा ने मोबाइल पर फोन कर जातिसूचक शब्दों के साथ गाली गलौज करते हुए मारपीट की धमकी दी थी। जिसकी शिकायत 28 अप्रैल 2022 को उसके पुत्र ने थाना बरुआसागर में भी की थी। गोपी कुशवाहा व संतोष कुशवाहा ने इसके बाद कई बार विकास बाल्मीकि को जातिसूचक शब्दों से अपमानित कर गालियां दी व बेईज्जत किया। इसके बाद 31 जुलाई 2022 को दोपहर 01. 45 बजे गोपी कुशवाहा, संतोष कुशवाहा, कल्लू, सुनील कुशवाहा, मुन्ना रायकवार व कुछ अज्ञात लोगों के साथ जिसमें निखिल कुशवाहा सहित एकजुट होकर सनौरा में विकास का रास्ता रोककर एकराय होकर उसके पुत्र को मारने के लिए आये और धारदार हथियारों लाठी, चैन से हमला कर दिया। सभी ने विकास को बहुत बुरी तरह मारा जिससे उसे काफी चोटे आयी। घायल अवस्था में हमलावर विकास को वहां छोडकर भाग गये। जानकारी मिलने पर विकास को तुरन्त जिला अस्पताल ले गये जहां उसको ईलाज हेतु भर्ती कराया। सभी हमलावर मिलकर विकास को जान से खत्म करने आये थे। तहरीर के आधार पर धारा 147, 148, 149,341,323,504, 506,325 भा. द. सं एवं धारा 3 (2) व्हीए एससी. / एसटी एक्ट के तहत थाना बरुआसागर में मुकदमा दर्ज किया गया था।
उक्त मामले में अभियुक्त धर्मेन्द्र व संतोष कुशवाहा द्वारा प्रस्तुत जमानत प्रार्थना पत्रों पर सुनवाई उपरांत पर्याप्त आधार नहीं पाते हुए न्यायालय ने प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिये।
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