सदग्रंथों में मिलता है भगवान की महिमा का वर्णन :विभाश्री माताजी
झांसी। अतिशय क्षेत्र करगुवांजी में चल रहे 48 दिवसीय 1008 भक्तामर महा मण्डल आराधना विधान के अठारहवें दिन शुक्रवार को गणिनी आर्यिका 105 विशाश्री माताजी ने मंगल देशना देते हुए कहा कि भगवंत और संतों ने जीवों पर उपकार करके हमें मां जिनवाणी जैसा महान ग्रंथ दिया जिसके माध्यम से भगवान की भक्ति क रहम अपने जीवन को धन्य बना सकते हैं। सबसे पहला उपकार जिनेन्द्र भगवान ने अपनी वाणी देकर किया फिर दूसरा उपकार संतों भगवंतों ने भगवान की वाणी को लिपिबद्ध कर हम सबके समक्ष रखा जिसके अध्ययन करने से उस परम पिता परमेश्वर को हम जान पा रहे हैं।वे कहती हैं की यदि यह सदग्रन्थ न होते तो हम भगवान की महिमा क्यों और कैसी है जान ही नहीं पाते।
अठारहवें दिवस शुक्रवार के प्रथम पुण्यार्जक अर्चना सतीश चंद्र जैन, बंदना विनय जैन, नीरु ललित जैन,कविता विपुल जैन, मंजू पुष्पेंद्र जैन एवं समस्त चौधरी परिवार सीपरी बाजार झांसी रहे,जिन्होंने शांतिधारा का सौभाग्य प्राप्त किया एवं माताजी को शास्त्र भेंटकर पाद प्रक्षालन किया। इससे पूर्व पं दीपक जैन करैरा के मार्गदर्शन में समस्त धार्मिक क्रियायें सम्पन्न कराते हुए अर्घ समर्पित किये। संचालन दिगम्बर जैन पंचायत के महामंत्री कमलजैन लोकपथ एवं करगुवांजी मंत्री शिरोमणि जैन ने किया।अंत में निर्माण मंत्री भागचंद्र जैन ने सभी का आभार व्यक्त किया।इस मौके पर चौधरी जितेंद्र जैन तालबेहट, कुलदीप जैन रानू जैन, रौनक जैन, राजेंद्र जैन बिजना वाले, इंजीनियर बालचंद जैन,नरेंद्र जैन नारायण बाग आदि मौजूद रहे।
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