चिन्मय अमृत यात्रा का 4 दिन का झाँसी प्रवास पूर्ण, आत्मीय विदाई के साथ कानपुर की ओर प्रस्थान

झांसी । आज चिन्मय मिशन के 75 गौरवशाली सेवा वर्षों के उपलक्ष्य में देशभर में संचालित “चिन्मय अमृत यात्रा–2026” का झाँसी प्रवास मंगलवार को आत्मीय एवं भावपूर्ण विदाई के साथ सम्पन्न हुआ। पिछले चार दिनों में झाँसी में आयोजित विभिन्न आध्यात्मिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों के माध्यम से चिन्मय मिशन के ज्ञान, वेदांत, सेवा एवं संस्कारों के संदेश को समाज एवं विशेष रूप से युवा पीढ़ी तक पहुँचाया गया।

 
झाँसी प्रवास के अंतिम दिन श्री विनय गुप्ता के संयोजन एवं श्रीमती मेघना गुप्ता के सह-संयोजन में यात्रा दल की विदाई की व्यवस्था की गई। साधकों एवं चिन्मय मिशन के सदस्यों ने यात्रा दल के आचार्यों, युवा प्रतिभागियों एवं सारथियों को आत्मीय भाव से विदाई दी तथा उनके आगामी यात्रा-क्रम के लिए शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।
 
इस अवसर पर पूज्य स्वामी मित्रानंद जी, ब्र. तारिणी चैतन्य जी एवं ब्र. सुधीर चैतन्य जी सहित समस्त चिन्मय अमृत यात्रा दल उपस्थित रहा। यात्रा दल में युवा प्रतिभागी शुकदेव, सुमुख श्रीपाद, व्रतेश विजयकुमार, मोहित शर्मा, नितिन, चित्तोष, श्रीविद्या, अनन्या एवं स्मृति शर्मा तथा सारथी लक्ष्मण कुमार एवं गोपाल शामिल रहे.
 
चिन्मय अमृत यात्रा के झाँसी प्रवास की शुरुआत 22 अगस्त को विभिन्न स्वागत पड़ावों से हुई थी। बड़ौरा चौराहा, ग्राम घिसौली, जानकी मंदिर बबीना एवं भेल गेट नंबर-1 पर यात्रा का आत्मीय स्वागत किया गया। झाँसी पुलिस द्वारा यात्रा दल के सुचारु एवं सुरक्षित आवागमन के लिए एस्कॉर्ट वाहन उपलब्ध कराया गया।
 
23 अगस्त को यात्रा दल ने झाँसी किला एवं ओरछा धाम के दर्शन किए। शाम को रानी लक्ष्मीबाई पार्क से चिन्मय शोभायात्रा निकाली गई, जो दीन दयाल उपाध्याय सभागार पहुँची। वहाँ आयोजित मुख्य सार्वजनिक कार्यक्रम में स्वामी मित्रानंद जी का उद्बोधन, युवा प्रतिभागियों के यात्रा अनुभव, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, अतिथियों के संबोधन एवं प्रश्नोत्तर विशेष आकर्षण रहे।
 
24 अगस्त को पादुका पूजन के साथ विभिन्न शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थी संवाद आयोजित किए गए। 
स्कूल, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय एवं बी आई ई टी में विद्यार्थियों से संवाद के दौरान युवाओं के जीवन, भारतीय संस्कृति, वेदांत, व्यक्तित्व विकास एवं जीवन-मूल्यों पर चर्चा हुई। दिन का समापन सचिव ई. मुकेश गुप्ता के निवास पर आयोजित रात्रिभोज के साथ हुआ।
 
चिन्मय अमृत यात्रा के झाँसी प्रवास को सफल बनाने में चिन्मय मिशन के पदाधिकारियों, साधकों, स्वयंसेवकों एवं सहयोगी परिवारों ने विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया। यात्रा के स्वागत, आवास, स्थानीय भ्रमण, विद्यार्थी संवाद, शोभायात्रा, सभागार कार्यक्रम, भोजन एवं विदाई तक प्रत्येक व्यवस्था सामूहिक सहयोग से सम्पन्न हुई। चिन्मय मिशन झाँसी के सचिव ई. मुकेश गुप्ता ने यात्रा दल की विदाई के अवसर पर कहा कि “चिन्मय अमृत यात्रा का झाँसी प्रवास हमारे लिए केवल चार दिनों का कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह ज्ञान, सेवा, संस्कार और आत्मीयता का अनुभव रहा। स्वामी जी एवं पूरी यात्रा टीम ने झाँसी के साधकों तथा युवाओं को जो समय और मार्गदर्शन दिया, वह लंबे समय तक प्रेरणा देता रहेगा।” उन्होंने यात्रा के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले झाँसी प्रशासन एवं पुलिस, शिक्षण संस्थानों, सभी अतिथियों, साधकों, संयोजकों, सह-संयोजकों, स्वयंसेवकों एवं सहयोगी परिवारों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।
 
सुबह आत्मीय विदाई के पश्चात चिन्मय अमृत यात्रा दल अपने अगले पड़ाव कानपुर की ओर प्रस्थान कर गया। झाँसी के साधकों ने यात्रा दल के लिए मंगलकामनाएँ करते हुए “हरि ॐ” के साथ विदाई दी।

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