बुराईयों को त्याग कर सात्विक जीवन जिए:विशाश्री माताजी
झांसी। अतिशय क्षेत्र करगुवांजी में चल रहे 48 दिवसीय 1008 भक्तामर महा मण्डल आराधना विधान के पेंतीसवें दिन रविवार को गणिनी आर्यिका 105 विशाश्री माताजी ने मंगल देशना देते हुए कहा कि दोष रुपी अवगुणों को अंगीकार न करते हुए सदैव दूरी बनाकर सात्विक जीवन जीना चाहिए। उन्होंने कहा कि जितने भी लोग दोषों अथवा बुराईयों से न बचकर उनमें रमे रहते हैं यही कारण है कि दोष अथवा बुराईयां उनका पीछा नहीं छोड़ती और उसको घेरे ही रहती हैं जिससे जीव संसार सागर में अनंतकाल तक भटकता रहता है और ईश्वर की शरण पाकर सद्गति प्राप्त नहीं कर पाता है। उन्होंने अभक्ष वस्तुओं के सेवन से बचने की सलाह देते हुए कहा कि कम से कम एवं सात्विक आहार लेना चाहिए।
इससे पूर्व रविवार के पुण्यार्जक श्रीमती लक्ष्मी जैन, सत्यजीत श्वेता जैन, शास्वत जैन बड़कुल परिवार करगुवां, सेवानिवृत्त उद्यान निरीक्षक नरेन्द्र कुमार जैन, श्रीमती मेघा डा.अमित जैन सहायक कुलसचिव कृषि विश्व विद्यालय , श्रीमती मोनल साइंटिफिक आफीसर , इंजीनियर अंकित जैन,गुंजन, स्वरा, मनस्वी, प्राकृति एवं तृतीय पुण्यार्जक श्रीमती किरन जैन, कल्पना जैन, अंजली जैन, प्रभा जैन, अर्चना जैन रहे, जिन्होंने शांतिधारा का सौभाग्य प्राप्त किया, माताजी को शास्त्र भेंटकर पाद प्रक्षालन कर पं दीपक जैन करैरा के मार्गदर्शन में समस्त धार्मिक क्रियायें सम्पन्न कराते हुए अर्घ समर्पित किये।
तदुपरांत पुण्यार्जक परिवारों का माला एवं पगड़ी पहनाकर दिगम्बर जैन पंचायत समिति के पदाधिकारियों ने सम्मानित किया।संचालन करगुवांजी मंत्री एड.शिरोमणी जैन ने किया।अंत में निर्माण मंत्री भागचंद जैन ने सभी काम आभार व्यक्त किया।
No Previous Comments found.