राष्ट्रीय लोक अदालत में रिकॉर्ड 2,78,154 मामलों का हुआ निस्तारण

झांसी: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) एवं राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (SALSA) के तत्वावधान में आज दीवानी न्यायालय परिसर, झांसी में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा वर्ष 2026 की तृतीय राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, झांसी श्रीमती कमलेश कच्छल द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
इस अवसर पर लोक अदालत के नोडल अधिकारी शरद कुमार चौधरी, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफटीसी/14 एफसी), श्रीमती ईशा त्रिपाठी, सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, झांसी सहित अन्य न्यायिक अधिकारीगण, बार संघ के पदाधिकारी एवं बैंक अधिकारीगण उपस्थित रहे। राष्ट्रीय लोक अदालत की विभिन्न खंडपीठों द्वारा आपसी सहमति एवं सुलह-समझौते के आधार पर विभिन्न प्रकृति के कुल 2,78,154 वादों का रिकॉर्ड निस्तारण किया गया। इनमें 49 वैवाहिक प्रकरण, 67 अन्य सिविल वाद तथा 7,049 अन्य वाद निस्तारित किए गए। इसके साथ ही 8,641 शमनीय आपराधिक वादों का निस्तारण करते हुए 6,45,295 रुपये अर्थदण्ड के रूप में वसूल किए गए। जनपद के विभिन्न राजस्व एवं दाण्डिक न्यायालयों द्वारा 144 राजस्व वाद, 1,309 आपराधिक वाद, 10,816 विद्युत उपभोक्ता वाद, 149 श्रम विवाद तथा 94,885 जनहित गारंटी अधिनियम से संबंधित वादों का निस्तारण किया गया। इसके अतिरिक्त प्री-लिटिगेशन स्तर पर 2,86,77,026 रुपये की धनराशि से संबंधित 1,349 बैंक ऋण वादों तथा मोबाइल बिल से संबंधित 06 वादों का भी निस्तारण किया गया। 
मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, झांसी के पीठासीन अधिकारी मनराज सिंह द्वारा कुल 55 वादों का सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण किया गया। आदित्य चतुर्वेदी, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, न्यायालय संख्या-01 द्वारा 02, नेत्रपाल सिंह, विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट द्वारा 01, कमलकान्त श्रीवास्तव, विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, विशेष न्यायालय संख्या-01 द्वारा 01 तथा शिवकुमार तिवारी, विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट द्वारा 208 वादों का निस्तारण किया गया। इसी क्रम में देवाशीष, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, न्यायालय संख्या-02 द्वारा 01, हरीष चन्द्र, अपर प्रधान न्यायाधीश, अपर पारिवारिक न्यायालय द्वारा 49 पारिवारिक मामलों, शरद कुमार चौधरी, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफटीसी/सीएडब्ल्यू) द्वारा 01 तथा अनिल कुमार-सप्तम, अपर सिविल जज (सीडि.) न्यायालय संख्या-01/अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा 2,009 वादों का निस्तारण किया गया। दुर्गेश नन्दनी, लघुवाद न्यायाधीश द्वारा 04, श्रीमती सुधा यादव, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा 3,119, मुन्नालाल, सिविल जज (सीडि.) द्वारा 31,मयंक प्रकाश, सिविल जज (सीडि.) गरौठा द्वारा 1,475, सुमित परासर, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, न्यायालय संख्या-01 द्वारा 1,157 तथा प्रतीक त्रिपाठी, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रेलवे द्वारा 1,980 वादों का निस्तारण किया गया। गरिमा सक्सेना, सिविल जज (जू.डि.) मऊरानीपुर द्वारा 1,103, शुभम चौधरी, सिविल जज (जू.डि.) मोंठ द्वारा 1,371, श्रीमती नंदिनी अग्निहोत्री, सिविल जज (जू.डि.) द्वारा 19, प्रेरणा यादव, अपर सिविल जज (जू.डि.) न्यायालय संख्या-01 द्वारा 765, श्रीमती सृष्टि शुक्ला, सिविल जज (जू.डि.) गरौठा द्वारा 1,419 वादों का निस्तारण किया गया। श्रीमती खुशबू धनकर, न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय संख्या-02 द्वारा 1,058,अमन राय, सिविल जज (जू.डि.) न्यायालय संख्या-02 द्वारा 963, श्रेयांश निगम, न्यायाधिकारी ग्राम न्यायालय टहरौली द्वारा 515, अंजली, सिविल जज (जू.डि.) एफटीसी (सीएडब्ल्यू) द्वारा 749, धीरेन्द्र कुमार, सिविल जज (जू.डि.) एफटीसी (14 एफसी) द्वारा 607, नवल किशोर, विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय द्वारा 11 तथा मनोज खरे, विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम द्वारा 27 वादों का निस्तारण किया गया।
जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, झांसी श्रीमती कमलेश कच्छल ने राष्ट्रीय लोक अदालत की विभिन्न पीठों एवं स्टॉलों का निरीक्षण किया तथा वादकारियों को आपसी सुलह-समझौते के माध्यम से अपने वादों का निस्तारण कराने के लिए प्रेरित किया। लोक अदालत के नोडल अधिकारी शरद कुमार चौधरी एवं सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती ईशा त्रिपाठी ने राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने में सहयोग प्रदान करने वाले समस्त न्यायिक अधिकारियों, प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों/कर्मचारियों, बैंक एवं विद्युत विभाग के अधिकारियों, स्वास्थ्य टीम, बार संघ के पदाधिकारियों तथा अधिवक्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी के समन्वित प्रयासों एवं सहयोग से दिनांक 12 सितंबर 2026 को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में रिकॉर्ड 2,78,154 वादों का निस्तारण संभव हो सका, जिससे बड़ी संख्या में वादकारियों को त्वरित एवं सुलभ न्याय की सुविधा प्राप्त हुई।
 
रिपोर्ट अंकित साहू

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