लक्ष्य को पाने के लिए तप जरुरी है: विशाश्री माताजी
झांसी। अतिशय क्षेत्र करगुवांजी स्थित विद्यासागर सभागार में पर्युषण पर्व"के सातवें दिन उत्तम तप पर्व पर मंगल देशना देते हुए गणिनी आर्यिका 105 विशाश्री माताजी ने कहा कि किसी भी प्रकार के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जीवन में तप आवश्यक है। कितनी भी परेशानी हो पर नियम नहीं छोड़ना यही तो तप है। जो संयम लेते हैं उनके जीवन में तप स्वयं घटित होता है। जिस प्रकार तिल में तेल, दूध में घी और लकड़ी में आग है उसी प्रकार शरीर के भीतर आत्मा में परमात्मा विराजमान हैं।शरीर पहले तपता है। जो व्यक्ति अपने तन मन और जीवन को परिमार्जित कर शुद्ध करता है उसके जन्म जन्मांतर के कर्म नष्ट हो जाते हैं।छोटे छोटे नियम लेकर उनका पालन करना ही तो तप है।उन्होंने कहा कि सामान्य जीवन में हमारे चारों ओर जो भी सामग्री है वह तप, ताप अथवा अग्नि पर ही सब कुछ निर्भर है। हमारे शरीर की भोजन क्रिया भी ताप पर निर्भर है, क्योंकि शरीर का तापमान अनुकूल नहीं तो पाचन क्रिया प्रभावित हो जाती है और तो और जब आत्मा शरीर को छोड़ती है तो शरीर ठंडा पड़ जाता है। वे कहती हैं कि छोटे छोटे नियम लेकर तप करो क्योंकि तप के माध्यम से ही कर्मों का क्षय कर केवल्य ज्ञान प्राप्त किया जा सकता है। इससे पूर्व भक्तामर महा मण्डल आराधना विधान के इक्यावनवें दिन के पुण्यार्जक श्रीमती रानी भागचंद जैन (निर्माण मंत्री),सौरभ सुवी जैन, मुस्कान, आशु, नियम, भव्य, हर्षिका, सौरवी एवं समस्त चौधरी परिवार करगुवांजी रहे, जिन्होंने शांतिधारा का सौभाग्य प्राप्त किया, माताजी को शास्त्र भेंटकर पाद प्रक्षालन किया एवं पं.कमलेश जैन शास्त्री छतरपुर के मार्गदर्शन में समस्त धार्मिक क्रियायें सम्पन्न कराते हुए अर्घ समर्पित किये। प्रारंभ में पुण्यार्जक परिजनों ने आचार्य श्री विराग सागर एवं विमल सागर जी के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित करने का सौभाग्य प्राप्त किया।संचालन चातुर्मास समिति के अध्यक्ष राजकुमार बाबा एवं एड.शिरोमणि जैन ने संयुक्त रुप से किया।अंत में करगुवां मंत्री संजय सिंघई ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर डा. पी के जैन, डा.मुकेश नजा, सुनील मोदी, विकास जैन, श्रीमती रचना कमल जैन लोकपथ, श्रीमती प्रीति शिरोमणि जैन, अशोक जैन जैनिथ, सहित बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालु मौजूद रहे।
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