व्रतों का राजा है ब्रह्मचर्य धर्म : विशाश्री माताजी ब्रह्मचर्य धर्म व्रत के साथ दसलक्षण पर्व का समापन
झांसी। अतिशय क्षेत्र करगुवांजी स्थित विद्यासागर सभागार में पर्वराज पर्युषण पर्व"के अंतिम दिन उत्तम ब्रह्मचर्य व्रत के साथ साथ भगवान वासुपूज्य स्वामी का निर्वाण दिवस मनाते हुए लाडू समर्पित किये। इस अवसर पर मंगल देशना देते हुए गणिनी आर्यिका 105 विशाश्री माताजी ने कहा कि उत्तम ब्रह्मचर्य का मतलब शारीरिक ही नहीं मानसिक पवित्रता भी अर्थात बुरे विचारों और वासनाओं से दूर रहना है। ब्रह्मचर्य जीवन की नींव के साथ साथ शिखर भी है। कोई भी अनुष्ठान, तप, साधना, विधान अथवा उपवास बिना ब्रह्मचर्य के सफल नहीं होते। कोई भी व्रत धारण करने या अनुष्ठान से पूर्व ब्रह्मचर्य व्रत धारण करना पड़ता है । इसलिए इसे सभी व्रतों का राजा भी कहा जाता है।उन्होंने कहा कि ब्रह्मचर्य धर्म का पालन करने वालों को मोक्ष लक्ष्मी की प्राप्ति अवश्य होती है। दसलक्षण पर्व के महान अवसर पर जो मनुष्य उपरोक्त दस धर्मों को अपनाकर उनका पालन करके अपने जीवन का उद्धार करता है तथा अपने आत्म कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर अजर अमर पद निर्वाण की प्राप्ति कर सकता है।इससे पूर्व भक्तामर महा मण्डल आराधना विधान के चऊवन वें दिन शुक्रवार के पुण्यार्जक अनिल कुमार श्रीमती अलका जैन, राजीव जैन, श्रीमती मंजू जैन,सुशांत जैन, निशांत जैन, संभव जैन,रोहित, शोभित, चारु, स्वस्ति एवं समस्त मसौरा वाला परिवार अंसल पाम कोर्ट एवं प्रभावना ग्रुप महिला मंडल करगुवां जी झांसी रहे, जिन्होंने शांतिधारा का सौभाग्य प्राप्त किया, माताजी को शास्त्र भेंटकर पाद प्रक्षालन किया एवं पं.कमलेश जैन शास्त्री छतरपुर के मार्गदर्शन में समस्त धार्मिक क्रियायें सम्पन्न कराते हुए अर्घ समर्पित किये। प्रारंभ में पुण्यार्जक परिजनों ने आचार्य श्री विराग सागर एवं विशुद्ध सागर जी के चित्र के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलित करने का सौभाग्य प्राप्त किया।संचालन एड.शिरोमणि जैन एवं कमल जैन लोकपथ ने संयुक्त रुप से किया।अंत में विनोद जैन ठेकेदार ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन आदित्य, इंजीनियर बालचंद्र जैन, प्रकाशचंद्र जैन, अशोक जैन जैनिथ, भागचंद जैन,संजय सिंघई,अनुराग जैन एलआईसी, वीरेंद्र जैन नेडा, श्रीमती रानी जैन, श्रीमती प्रीति जैन,बबली चाची, श्रीमती रचना जैन,सहित बड़ी संख्या में जैन श्रद्धालु मौजूद रहे।
पूर्णाहुति एवं शोभायात्रा आज एडवोकेट शिरोमणि जैन ने बताया कि अतिशय क्षेत्र करगुवां जी में गणिनी आर्यिका 105 विशाश्री माताजी के पावन सानिध्य में चल रहे पचपन दिवस भक्तामर महामंडल आराधना विधान का समापन शनिवार को आचार्य विद्यासागर सभागार में पूर्णाहुति के साथ होगा। आपने बताया कि पूर्णाहुति के उपरांत माताजी के पावन सानिध्य में सकल जैन समाज द्वारा ढोल नगाड़ों के साथ श्री जी शोभायात्रा निकाली जायेगी। तदुपरांत सभागार में विराजमान श्रीजी को पुनः मंदिर के गर्भ गृह में उच्च पद पर विराजमान किया जायेगा।

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