पर्यावरण संरक्षण की ओर एक सुंदर कदम
झांसी। आज कैंटोनमेंट बोर्ड स्कूल में बच्चों के साथ Home Composting एवं Bio-Enzyme जैसे उपयोगी और पर्यावरण-अनुकूल विषयों पर संवाद करने का अवसर मिला।
मानव विकास संस्थान, डॉ अशोक अग्रवाल ‘काका’ के मार्गदर्शन एवं सहयोग से हम बच्चों के बीच यह संदेश लेकर पहुँचे कि घर के किचन वेस्ट को कचरा समझकर फेंकने के बजाय हम उसे प्रकृति के लिए उपयोगी खाद में बदल सकते हैं।
हमारे साथ हमारी दो सहेलियों ने बच्चों को Bio-Enzyme के बारे में भी बहुत रोचक ढंग से जानकारी दी।
सबसे सुखद अनुभव रहा बच्चों का उत्साह और उनकी जिज्ञासा। एक नए विषय को समझने और उसे अपने जीवन में अपनाने की उनकी उत्सुकता देखकर मन प्रसन्न हो गया।
लेकिन आज इस विद्यालय की एक और बात ने हम सभी का मन जीत लिया।
विद्यालय में प्रवेश करते ही वहाँ की स्वच्छता, सुव्यवस्था और सुंदर वातावरण देखकर बहुत प्रसन्नता हुई। हर दीवार पर शैक्षिक एवं प्रेरणादायक स्लोगन, राष्ट्र के गौरवपूर्ण स्तंभों की जानकारी और संविधान के प्रति जागरूक करने वाले संदेश—पूरा विद्यालय एक सकारात्मक और संस्कारपूर्ण वातावरण का अनुभव करा रहा था।
बच्चों को देखकर तो कहीं से भी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि हम किसी सरकारी विद्यालय में हैं। उनका अनुशासन, आत्मविश्वास और सीखने की उत्सुकता देखकर ऐसा लगा जैसे हम किसी बड़े, सुव्यवस्थित पब्लिक स्कूल में हों।
कहते हैं—“किसी भी संस्था की दिशा और दशा में उसके मुखिया की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है।”
इस अवसर पर मैं विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती अर्चना जैन को हृदय से धन्यवाद एवं साधुवाद देना चाहती हूँ। मैं स्वयं भी विद्यालय में शिक्षिका रही हूँ, इसलिए यह भली-भाँति समझती हूँ कि किसी विद्यालय को इस प्रकार स्वच्छ, अनुशासित, सुव्यवस्थित और जीवंत बनाए रखने के पीछे प्रधानाचार्य का कुशल नेतृत्व, निरंतर प्रयास और टीम को प्रेरित करने की क्षमता कितनी महत्वपूर्ण होती है।

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