क्राप्ट मेला मैदान बना अयोध्या ,राम जन्मोत्सव की कथा में झूमे श्रद्धालु श्रोता , संत मोरारी बापू की भारत स्वस्तिक यात्रा में गूंजा वंदेमातरम
झांसी। राष्ट्रीय संत मोरारी बापू की भारत स्वस्तिक यात्रा ओंकारेश्वर के बाद शुक्रवार 16 अक्टूबर की सुबह वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई की वीर भूमि झांसी पहुंची। यहां रानी झांसी दुर्ग की तलहटी में स्थित क्राफ्ट मेला मैदान में प्रातः 9 बजे से दोपहर तीन बजे तक एक दिवसीय रामकथा में भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाते कहा कि राष्ट्रीय संत मुरारी बापू ने कहा कि पति पत्नी एक दूसरे को प्रेम करें, एक दूसरे का आदर करें और परमात्मा के प्रति सच्ची श्रद्धा रखें तो हर घर में जन्म लेने वाला बालक प्रभु राम के समान ही होगा। मुरारी बापू ने अपने श्रीमुख से श्रीराम कथा की अमृत वर्षा करते हुआ कहा कि आज लोगों ने कन्या और वर को एक दूसरे का साधन बना लिया औरयह साधन तो एक न एक दिन क्षीण होना ही है।जबकि पति पत्नी एक दूसरे के लिए साधन नहीं साध्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज के युवा तो कई शादी ही नहीं करना चाहते क्योंकि वे अपने माता पिता को अक्सर लड़ते झगड़ते ही देखते हैं। उन्हें परिस्थितियों ने सोचने पर मजबूर कर दिया है। जीवन में सत्य को प्रधानता देने की बात कहते उन्होंने कहा कि विचार ,आचार आचरण में सत्य हो कहने में सत्य के साथ सत्य को सुनने की शक्ति भी होनी चाहिए। दूसरे के सत्य को विनम्रता के साथ सुनना चाहिए। उन्होंने कहा स्वस्तिक का केंद्र बिंदु परम ब्रह्म है।जीवन में कर्म को प्रधान बताते हुए बापू ने कहा कि कर्मफल तो ब्रह्म के बाप को भी भोगना पड़ता है। इसलिए सदैव मन में कपट को त्याग कर अच्छे कर्म करो। परमात्मा का भजन करो तो बुरे कर्म निश्चय ही क्षीण हो जायेंगे। उन्होंने कहा कि आज लोगों के दिलों में प्रेम, करुणा के स्थान पर कपट और ईर्ष्या भरी पड़ी है इसलिए भाई भाई से पति पत्नी से और बेटा बाप से कपट कर रहा है परिणाम स्वरूप समाज में झगड़े अधिक हैं। उन्होंने इसका निदान बताते हुए सभी से प्रतिदिन मानस का पाठ करने का आवाहन किया। वे कहते हैं कि सभी समस्याओं का समाधान आपको रामचरित मानस में मिल जायेगा। बस आप पढ़ें तो। भरत जी को प्रेम की मूर्ति बताते हुए उन्होंने कहा कि वे तो दिव्य मार्गी है। उनमें राम के प्रति अटूट प्रेम है इसलिए जब भरत जी राम से मिलने चित्रकूट जाते हैं और उन्हें दंडवत प्रणाम करते हैं तो राम उनसे मिलने को ऐसे दौड़ते हैं कि तन पर पड़ी पीताम्बरी और धनुष वाण भी गिर जाते हैं। अर्थात भक्त और भगवान के बीच में कोई कपट रुपी पर्दा नहीं रहता है।
इस मौके पर मंथन भाई पारीवाल उदयपुर, संतोष दास महाराज सतुआ बाबा, चित्रकूटधाम से पधारे महामंडलेश्वर गोपाल बाबा, मोहन बाबा, रामायणी चित्रकूट, झांसी ललितपुर के सांसद डा.पं अनुराग शर्मा, श्रीमती पूनम शर्मा, माताजी श्रीमती अनुराधा शर्मा, राष्ट्रभक्त संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष अंचल अड़जरिया, रवि नीखरा, अग्रवाल कैटर्स के संचालक राजीव अग्रवाल, अनूप शर्मा, चंद्रशेखर इंस्टीट्यूट के संचालक मनीष तिवारी, सांसद प्रतिनिधि अतुल अग्रवाल, मनीष दीक्षित, प्रतीक दुबे सहित अनेकों गणमान्य नागरिक व श्रद्धालु मौजूद रहे।
शंकराचार्य भगवान ने सनातन को जोड़ने के लिए जहां से भारत स्वस्तिक यात्रा शुरू कर समापन की थी, संत मोरारी बापू उसी यात्रा को उन्हीं मार्गो पर लेकर जा रहे है। इस यात्रा का उद्देश्य केवल सनातन को जोड़ने के लिए है जो 10 अक्टूबर से तेईस अक्टूबर तक कन्या कुमारी से कश्मीर तक चलाई जा रही है। दो स्पेशल ट्रेनों से चल रही इस यात्रा में बापू सहित करीब एक हजार के आस पास उनके सेवादार एवं श्रद्धालु साथ हैं जिनमें कई आरएनआई भी हैं । झांसी में रामकथा होने के पश्चात इस यात्रा का अगला पड़ाव मथुरा और उसके बाद कुरुक्षेत्र है।
कथा से पूर्व किले में किया रानी को नमन,गाया राष्ट्रगान।
क्राप्ट मेला मैदान में बने विशाल कथा मंडप में आने से पूर्व मुरारी बापू ने महारानी लक्ष्मीबाई के किले का भ्रमण कर उनके शौर्य को नमन किया तथा वहां राष्ट्रीय ध्वज के समक्ष जन गण मन अधिनायक का गायन किया तो मंच पर आते ही उन्होंने सभी के साथ वंदेमातरम मातरम का गायन करते हुए बुंदेलखंड की वीर भूमि को नमन करते हुए महारानी के शौर्य पराक्रम और बलिदान को बारम्बार नमन किया। उन्होंने बुंदेलखंड की धरा को अति पावन और पवित्र बताते हुए कहा कि जहां चित्रकूट में परम ब्रह्म प्रभु राम बारह वर्षों तक विचरण किये उस धरती को बार बार नमन करने का मन करता है। अंत में राष्ट्रभक्त संगठन के केंद्रीय अध्यक्षअंचल अर्जरिया ने सभी झांसी के श्रद्धालु भक्तजनों का और प्रशासन का कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु आभार प्रकट किया।

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