महिला दिवस महिला सशक्तिकरण की तरफ एक बढ़ते कदम

लातेहार :  महिला दिवस यह उन महिला नेताओं और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं को याद करने का दिन है जिन्होंने लैंगिक समानता और लैंगिक न्याय की वकालत की। 1977 में UNGA (संयुक्त राष्ट्र महासभा) के आदेश के बाद, हर साल 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाता है।

8 मार्च का इतिहास क्या है-

इसके अलावा 8 मार्च, 1908 को, सुई व्यापार में महिला श्रमिकों ने बाल श्रम और स्वेट शॉप की कामकाजी स्थितियों का विरोध करने और महिलाओं के मताधिकार की मांग करने के लिए न्यूयॉर्क शहर के लोअर ईस्ट साइड से मार्च निकाला। 1910 से शुरू होकर, 8 मार्च को प्रतिवर्ष अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।इसके अलावा जब क्लारा जेटकिन ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का सुझाव दिया था, तो उनके ज़हन में कोई ख़ास तारीख़ नहीं थी। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस तो 1917 में जाकर तय हुआ था, जब रूस की महिलाओं ने 'रोटी और अमन' की मांग करते हुए, ज़ार की हुक़ूमत के ख़िलाफ़ हड़ताल की थी।  इसके बाद ज़ार निकोलस द्वितीय को अपना तख़्त छोड़ना पड़ा था। उसके बाद बनी अस्थायी सरकार ने महिलाओं को वोट डालने का अधिकार दिया था। 

अन्य देशों में महिला दिवस कैसे मनाया जाता है?
कई देशों में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर राष्ट्रीय अवकाश रहता है. इन देशों में रूस भी शामिल है, जहां आठ मार्च के आस-पास के तीन चार दिनों में फूलों की बिक्री दोगुनी हो जाती है। चीन में राष्ट्रीय परिषद के सुझाव पर बहुत सी महिलाओं को आठ मार्च को आधे दिन की छुट्टी दे दी जाती है। 

इटली में महिलाओं को आठ मार्च को मिमोसा फूल देकर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है. ये परंपरा कब से शुरू हुई, ये तो साफ़ नहीं है. मगर, माना ये जाता है कि इसकी शुरुआत दूसरे विश्व युद्ध के बाद रोम से हुई थी। 

अमरीका में मार्च का महीना महिलाओं की तारीख़ का महीना होता है. हर साल राष्ट्रपति की तरफ़ से एक घोषणा जारी की जाती है, जिसमें अमरीकी महिलाओं की उपलब्धियों का बखान किया जाता है। 

भारत में कैसे मनाया जाता है महिला दिवस

भारत में महिला दिवस पर जगह जगह पे कार्यक्रम किए जाते हैं एवं महिलाओं को सम्मानित किया जाता है। भारत में महिलाओं को  सम्मान करने की  प्राचीन परंपरा रही है। आजादी के बाद महिलाओं को सशक्त करने के लिए सरकार द्वारा अनेकों  कदम उठाए गए हैं तथा संविधान में विशेष प्रावधान भी  महिलाओं के प्रति  बनाया गया है । भारत में हर क्षेत्र में महिलाओं को विशेष दर्जा दिया गया है टीचर आंगनबाड़ी नर्स  सेना  पुलिस इंजीनियर राजनीति  खेल जगत एवम   ग्रामीण  विकास में महिलाएं  पुरुषों से कंधा से कंधा मिलाकर बढ़-चढ़कर  देश की सहभागिता में भाग ले रही है। आज भारत की महिलाएं पुरुषों से कम नहीं है । इन्होंने ये पूरी दुनिया को दिखा दिया।

झारखंड की सिंधु मिश्रा है महिलाओं के लिए प्रेरणा

दहेज मुक्त झारखंड की राष्ट्रीय अध्यक्ष
एवं मानव अधिकार एवं सामाजिक न्याय आयोग की झारखंड प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती सिंधु मिश्रा महिलाओं के लिए मिसाल  है । इन्होंने महिलाओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाकर कितने महिलाओं पर हो रहे अत्याचार को बंद कराई है और टूटते   हुए घरों को बसाने का काम की  है। 3 मार्च  2024 को ही दहेज मुक्त झारखंड की सिंधु मिश्रा को नारी शक्ति सम्मान एवं इंटरनेशनल स्टार अवार्ड से सम्मानित किया गया है। झारखंड के लिए गर्व की बात है।

 क्या कहती है सिंधु मिश्रा

महिलाओं को अब हर क्षेत्र में आगे आना चाहिए अपने ऊपर हो रहे अत्याचार को खुद से आगे आकर  आवाज उठाना चाहिए । महिलाएं अब किसी से काम नहीं है और मैं हमेशा महिलाओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाऊंगी और लडूंगी। 

गढ़वा की बबिता है महिलाओं के लिए  मिशाल

2 वर्ष के अंतराल में बबिता ने सौ से अधिक प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) को पूर्ण कराने में पाई है सफलता

सीआरपी बबिता को पीएम ने भेजा है  प्रशस्ति पत्र

 शहर के दिपुआं मोहल्ला निवासी बबिता कुमारी को प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में बेहतर कार्य करने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम प्रशस्ति पत्र मिला है। प्रशस्ति पत्र में प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के जरिए घर के निर्माण के लिए मैं आपके पूरे परिवार का अभिनंदन करता हूं। यह घर आपके दृढ़ संकल्प और सभी के लिए आवास के हमारे प्रयासों का परिणाम है। आपने सुख-समृद्धि की दिशा में एक और कदम आगे बढ़ाया है। पीएम ने कहा है कि मुझे खुशी है कि आपके इस सपने को साकार करने में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। शहरों
में रह रहे आप जैसे अनेक भाई बहनों ने अपना घर प्राप्त किया है। यह मेरे लिए अत्यंत संतोषजनक है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि एक परिवार अपने घर को केंद्र में रखकर ही जीवन के सपने बुनता है। इस मकान के जरिए वह न केवल अपने आज को सुरक्षित करता है, बल्कि अगली पीढ़ी के सफल भविष्य की बुनियाद भी तैयार करता है। ये मकान में रहने वाली महिलाओं के सशक्तीकरण और बच्चों के स्वर्णिम भविष्य का। 

कौन है बबिता कुमारी
मनिका बुधन बैठा की सुपुत्री मनिका हाई स्कूल से पढ़ाई की हुई। 
बबिता कुमारी गढ़वा शहर के वार्ड संख्या नौ दिपुआं मोहल्ला निवासी आशीष कुमार रजक की पत्नी है। बबिता कुमारी दो वर्ष पहले गढ़वा नगर परिषद में बतौर कम्यूनिटी रिसोर्स पर्सन के रूप में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) का काम देखना शुरू की। इस दो वर्ष के दौरान उन्होंने सौ से अधिक आवास योजना को जीओ टैग करा उसे पूर्ण कराने में सफलता अर्जित की। जबकि सौ के करीब आवास योजना का काम तेजी से चल रहा है।

विश्वास दिलाते हैं। आज अगर योजनाओं का सीधा लाभ जन- सामान्य तक पहुंच रहा है और इससे लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है, तो इससे बड़ी संतुष्टि कुछ और नहीं हो सकती।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की वेबसाइट के मुताबिक़, जामुनी, हरा और सफ़ेद अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के रंग हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर पर्पल रंग पहना जाता है. ये सम्मान और न्याय का प्रतीक अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर पर्पल रंग पहना जाता है। 

लोग इस दिन जामुनी रंग के कपड़े क्यों पहनते हैं?
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पहचान अक्सर जामुनी रंग से होती है क्योंकि इसे 'इंसाफ़ और सम्मान' का प्रतीक माना जाता है। 
वेबसाइट के मुताबिक़, जामुनी रंग इंसाफ़ और सम्मान का प्रतीक है.हरा रंग उम्मीद जगाने वाला है, तो वहीं सफ़ेद रंग शुद्धता की नुमाइंदगी करता है। 
हालांकि इस रंग से जुड़ी परिकल्पना को लेकर विवाद भी है. महिला अधिकार कार्यकर्ता कहते हैं , "महिला दिवस से ताल्लुक़ रखने वाले इन रंगों की शुरुआत 1908 में ब्रिटेन में महिलाओं के सामाजिक और राजनीतिक संघ (WSPU) से हुई थी। 

रिपोर्टर : बब्लू खान

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