प्रकृति और लोक परंपरा का संगम है टुसू परब : सविता महतो

बिष्णुगढ़ : प्रखंड अंतर्गत खरना पंचायत में झारखंड की समृद्ध लोक परंपरा से जुड़े टुसू परब का आयोजन प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी हर्षोल्लास और पारंपरिक विधि-विधान के साथ किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ रंग-बिरंगे कागजों से सजी लकड़ी एवं बांस की पालकी में विराजमान टुसूमनी की विधिवत पूजा-अर्चना से हुआ।
इस अवसर पर झारखंड की कला, संस्कृति और सभ्यता से जुड़े टुसू नृत्य एवं झूमर नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं, जिसमें ग्रामीण ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमते नजर आए। तत्पश्चात सैकड़ों ग्रामीणों ने बाजे-गाजे के साथ टुसू परब विदाई यात्रा निकाली और नजदीकी जलाशय में टुसूमनी का विसर्जन किया।
झारखंड आंदोलनकारी सह शिक्षिका सविता महतो ने कहा कि “टुसू परब पूरे एक माह तक चलने वाला लोक पर्व है। यह धान की मड़ाई, ओसाई, सिझावन, प्रसंस्करण, अनुरक्षण और संरक्षण से जुड़ा पवित्र काल होता है। इस दौरान टुसू की आराधना कर प्रकृति, परिश्रम और अन्न-संस्कृति के प्रति कृतज्ञता प्रकट की जाती है।”
उन्होंने बताया कि टुसू भसान में पालकी में सजी धान-रूपी टुसू को बहती जलधारा में अर्पित किया जाता है, ताकि जंगलों में बसे अन्य मानव समुदाय भी इससे लाभान्वित हों।
झारखंड आंदोलनकारी प्रेमचंद महतो ने कहा कि टुसू परब केवल पर्व नहीं, बल्कि लोक परंपरा और प्रकृति के संगम का प्रतीक है। यह मानव जीवन और प्रकृति के बीच आस्था का जीवंत रूप है तथा सामाजिक चेतना को सुदृढ़ करता है।
झारखंड आंदोलनकारी सह पूर्व जिला परिषद सदस्य जय प्रकाश सिंह पटेल ने कहा कि टुसू पर्व एक कुंवारी कन्या टुसूमनी के प्रेम, वीरता और बलिदान की स्मृति में मनाया जाता है। यह नई धान की फसल की खुशी का प्रतीक है और किसानों के परिश्रम को सम्मान देता है।
वहीं झारखंड आंदोलनकारी सह पूर्व मुखिया राजेंद्र महतो ने कहा कि टुसू परब कुड़मी समाज एवं आदिवासियों का प्रमुख पर्व है, जिसे फसल कटाई के बाद पौष माह में मनाया जाता है। इसके पीछे कई लोककथाएं प्रचलित हैं, जिनमें टुसूमनी के त्याग और बलिदान की कथा प्रमुख है।
उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में प्रखंड मुख्यालय में बृहद स्तर पर टुसू परब का आयोजन किया जाएगा।
इस अवसर पर पूर्व जिला परिषद सदस्य जय प्रकाश सिंह पटेल, पूर्व मुखिया राजेंद्र कुमार महतो, पूर्व मुखिया रीना देवी, राधा देवी, संगीता देवी, सीता देवी, डॉ. थानेश्वर महतो, सुशील महतो, जोधा महतो, सोहर महतो (पूर्व बीएसएफ), भोला महतो, जेएलकेएम प्रखंड उपाध्यक्ष सुरेश कुमार महतो सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे।

रिपोर्टर : संदीप मिश्रा 
 

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