वझर सर्कल में बदलाव की लहर
जिंतूर : तालुका अंतर्गत वझर सर्कल में इन दिनों जिला परिषद चुनाव का बिगुल बज चुका है। इसके साथ ही भाजपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस के खेमों में जबरदस्त असहजता देखी जा रही है। सत्ता की बिसात पर किसका पलड़ा भारी पड़ेगा, इसकी राजनीतिक गणनाएं अब गांव-गांव की चौपालों, चाय होटलों और बस स्टैंडों पर खुलकर की जा रही हैं।
विशेष रूप से सोशल मीडिया पर चल रही ‘ट्रोलिंग’ की जंग ने इस चुनाव को एक अलग ही मोड़ दे दिया है। भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा अंबरवाड़ीकर बालासाहेब घुगे को ‘बाहरी उम्मीदवार’ बताकर निशाना बनाया जा रहा है और यह प्रचार किया जा रहा है कि, “पराया उम्मीदवार गांव का क्या विकास करेगा?”
हालांकि, इस आलोचना का जवाब बालासाहेब घुगे ने बेहद आक्रामक और तार्किक अंदाज में देकर विरोधियों की बोलती बंद कर दी है। उन्होंने तीखा सवाल उठाते हुए कहा, “पिछले 20 वर्षों से जो स्थानीय नेता राजनीति में सक्रिय रहे, उन्होंने गांव की सूरत क्यों नहीं बदली? दो दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद यदि बरसात के मौसम में गांव की मुख्य सड़क पर घुटनों तक कीचड़ भर जाता है और ग्रामीणों को नारकीय यातनाएं सहनी पड़ती हैं, तो फिर आपका विकास आखिर गया कहां?”
घुगे ने प्रस्थापित नेतृत्व की कार्यशैली पर उंगली उठाते हुए कहा कि वझर गांव के प्रवेश द्वार की बदहाल सड़क को राष्ट्रवादी कांग्रेस के तडफदार सरपंच अर्जुन मत्ते ने साधारण मुरूम डालकर दुरुस्त किया, लेकिन भाजपा के नेताओं से यह काम क्यों नहीं हो सका—यह सवाल अब आम जनता पूछ रही है।
“बस एक बार मुझ पर भरोसा कर अवसर दीजिए, मैं क्या बदलाव लाकर दिखाता हूं, यह आप स्वयं देखेंगे,” ऐसा सीधा आह्वान बालासाहेब घुगे द्वारा किए जाने से वझर सर्कल में अब “एक बार बालासाहेब को मौका देकर देखना चाहिए” जैसी भावना जोर पकड़ती नजर आ रही है।
सामान्य मतदाता अब विकास के मुद्दे पर एकजुट होते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में वझर सर्कल में इस बार बड़ा राजनीतिक उलटफेर होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
रिपोर्टर : कुमार साळेगावकर


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