ऑपरेशन सिंदूर के कमांडर से राम मंदिर CEO तक, जितेंद्र मिश्रा का नया सफर

एक तरफ देश की सरहद पर दुश्मन के खिलाफ मोर्चा संभालने वाला फौजी अफसर...और दूसरी तरफ अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर की व्यवस्था की जिम्मेदारी...जी हां...जिस अफसर ने आसमान में फाइटर जेट उड़ाए...जिसने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वेस्टर्न कमांड की कमान संभाली...जिसने युद्ध के मैदान में देश की सुरक्षा का जिम्मा उठाया...अब वही रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा अयोध्या में रामलला की सेवा और राम मंदिर की व्यवस्थाओं की कमान संभालेंगे। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर का पहला CEO नियुक्त कर दिया है। 43 सालों तक देश की रक्षा करने वाले और देवरिया की मिट्टी से निकले जितेंद्र मिश्रा की इस सरप्राइज एंट्री से एक तरफ जहां भक्त गदगद हैं, तो वहीं दूसरी तरफ सियासी गलियारों में बहुत बड़ा भूचाल आ गया है! आइए जानते हैं एयर मार्शल से राम मंदिर के CEO बनने की पूरी दिलचस्प कहानी!

दरअसल, यह पूरा मामला तब गरमाया जब राम मंदिर को मिले चंदे में कथित चोरी की खबरों ने तूल पकड़ा। विवाद इतना बढ़ा कि मामले में 8 लोगों की गिरफ्तारी हुई और ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा समेत एक अन्य पदाधिकारी को इस्तीफा देना पड़ गया। वहीं डैमेज कंट्रोल और व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए ट्रस्ट ने एक दो महीने लंबी और बेहद हाई-टेक प्रक्रिया शुरू की। राम मंदिर के पहले CEO बनने के लिए देश भर से 5,585 आवेदन आए थे! आपको बता दें बीते दिन बुधवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में जितेंद्र मिश्रा नाम पर आम सहमति बनी। आवेदनों की स्क्रीनिंग के बाद उम्मीदवारों को कई स्तरों पर परखा गया और बातचीत तथा इंटरव्यू की प्रक्रिया के बाद अंतिम नाम पर फैसला हुआ। ट्रस्ट की ओर से बताया गया कि चयन प्रक्रिया में स्क्रीनिंग के साथ मैनुअल मूल्यांकन भी किया गया। इसके बाद उम्मीदवारों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए बातचीत हुई और अंतिम चरण में उम्मीदवारों के इंटरव्यू लिए गए। आखिरकार रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नाम पर सर्वसम्मति से मुहर लगी। वहीं नियुक्ति के बाद जितेंद्र मिश्रा ने इसे प्रभु श्रीराम की कृपा बताया। उन्होंने कहा कि...

अब तक फौज में रहकर देश की सेवा की और अब रामलला की सेवा का अवसर मिला है। उन्होंने यह भी कहा कि CEO के तौर पर वे सकारात्मक तरीके से मंदिर की व्यवस्थाओं को आगे बढ़ाएंगे।

वहीं आइए अब जरा जितेंद्र मिश्रा के सैन्य सफर पर नजर डाल लेते है। दरअसल, देवरिया, उत्तर प्रदेश से आने वाले जितेंद्र मिश्रा ने भारतीय वायुसेना में करीब चार दशक से ज्यादा समय तक सेवा दी। उन्होंने फाइटर स्ट्रीम में अपना करियर शुरू किया और अलग-अलग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वे फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर रहे। इसके अलावा इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में ऑपरेशन्स के डिप्टी चीफ और डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइजेशन एंड ट्रेनिंग से जुड़ी जिम्मेदारियां भी संभालीं। इसके बाद वे वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ बने। उनके पास तीन हजार घंटे से ज्यादा का फ्लाइट एक्सपीरियंस बताया जाता है और उन्होंने फाइटर, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर समेत कई तरह के विमान उड़ाए हैं। उनके करियर का एक अहम पड़ाव कारगिल युद्ध के शुरुआती दौर से भी जुड़ा रहा। वे उस टीम का हिस्सा थे जिसने मिराज-2000 विमानों पर लेजर गाइडेड बमों को ऑपरेशनल बनाने में भूमिका निभाई थी।

बाद में इन्हीं हथियारों का इस्तेमाल ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान महत्वपूर्ण हमलों में हुआ। जितेंद्र मिश्रा को अति विशिष्ट सेवा मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल जैसे सम्मान भी मिल चुके हैं। वहीं 30 अप्रैल 2026 को वे वायुसेना से रिटायर हुए...और कुछ ही महीनों बाद अब उन्हें राम मंदिर की व्यवस्थाओं की बड़ी जिम्मेदारी मिल गई है। वहीं अब आते हैं उस कड़ी पर जिसने जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को और ज्यादा चर्चा में ला दिया...और वो है....ऑपरेशन सिंदूर। जी हां ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जितेंद्र मिश्रा वेस्टर्न कमांड की कमान संभाल रहे थे। ऑपरेशन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब आदमपुर एयरफोर्स स्टेशन पहुंचे, तब जितेंद्र मिश्रा ने उन्हें वहां की सैन्य तैयारियों और ऑपरेशन से जुड़ी जानकारी दी। यही वजह है कि आज जब वही एयर मार्शल राम मंदिर के CEO बनाए गए हैं तो उनके पुराने सैन्य करियर और ऑपरेशन सिंदूर की भूमिका भी चर्चा के केंद्र में है।

वहीं आपको बता दें राम मंदिर ट्रस्ट में सिर्फ CEO की नियुक्ति नहीं हुई है...ट्रस्ट में तीन नए चेहरों को भी शामिल किया गया है। दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद की डॉ. निर्मला यादव को नए ट्रस्टी के तौर पर शामिल किया गया है। महेश भागचंदका व्यवसायी और समाजसेवी हैं। वहीं मदन मोहन पांडेय अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। वे राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद से जुड़े मामलों में हिंदू पक्ष की ओर से पैरवी करने वाले वकीलों में शामिल रहे हैं। और तीसरा नाम है डॉ. निर्मला यादव का। शिकोहाबाद की रहने वालीं निर्मला यादव हिंदी और संस्कृत की शिक्षित हैं, पीएचडी धारक हैं और लंबे समय तक विश्वविद्यालय प्रशासन से जुड़ी रही हैं। वे ट्रस्ट की इकलौती महिला सदस्य हैं और पहली महिला OBC सदस्य के तौर पर भी चर्चा में हैं।

देखा जाए तो, एक तरफ चंदा चोरी के आरोपों से घिरे राम मंदिर ट्रस्ट ने देश के जांबाज एयर मार्शल को CEO बनाकर व्यवस्थाओं को बुलेटप्रूफ करने की पूरी तैयारी कर ली है, तो दूसरी तरफ विपक्ष ने इस पर सवालों की बौछार कर दी है! अब देखने वाली बात यह होगी कि आसमान में दुश्मनों को पछाड़ने वाले एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा, अयोध्या में राम मंदिर की व्यवस्थाओं को कितनी मुस्तैदी से संभालते हैं और विपक्ष के इन तीखे हमलों का जवाब अपने काम से कैसे देते हैं!

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