'थलापति' विजय का राज: विधानसभा में जीता विश्वास मत, 144 वोटों के साथ पास की अग्निपरीक्षा

दक्षिण की राजनीति में आज एक नया इतिहास रच दिया गया है. सिल्वर स्क्रीन से सियासत के शिखर तक पहुंचे जोसेफ विजय ने बुधवार को तमिलनाडु विधानसभा के रण में अपनी पहली और सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा पास कर ली है. तमाम अटकलों, आरोपों और उठापटक के बीच विजय सरकार ने 144 वोटों के साथ विश्वास मत हासिल कर लिया है. यह जीत सिर्फ संख्या बल की नहीं, बल्कि विजय की उस राजनीति की है जिसने विपक्ष के किले में ऐसी सेंधमारी की कि विरोधी देखते रह गए. सदन में जब वोटों की गिनती शुरू हुई, तो विजय के पक्ष में 144 विधायकों ने हाथ उठाकर अपना समर्थन दिया, जबकि उनके खिलाफ मात्र 22 वोट पड़े. DMK के वॉकआउट ने विजय की राह और आसान बना दी, जिससे बहुमत का जादुई आंकड़ा और भी करीब आ गया.

दरअसल, इस फ्लोर टेस्ट की सबसे बड़ी खबर रही AIADMK के भीतर हुआ महाविस्फोट. जी हां पार्टी महासचिव एडप्पाडी के पलानीस्वामी चिल्लाते रह गए, एकता की दुहाई देते रहे, लेकिन उनके अपने ही धुरंधर सीवी षणमुगम और एसपी वेलुमणि ने बगावत का झंडा बुलंद करते हुए विजय के पक्ष में वोट डाल दिया. AIADMK के 25 बागी विधायकों ने पाला बदलकर विजय का दामन थाम लिया. सदन में स्थिति ऐसी थी कि EPS जिसे अपना सिपाही बता रहे थे, वो विजय के साथ खड़ा मुस्कुरा रहा था. विजय ने अपनी रणनीति से यह सुनिश्चित कर दिया कि अगर कल को सहयोगी दल कांग्रेस, वामपंथी साथ छोड़ भी दें, तो भी उनकी सरकार बागी बैसाखियों के दम पर सीना तानकर खड़ी रहेगी. 

वहीं दूसरी तरफ सियासत की इस जीत के बीच एक रहस्यमय वाकया भी हुआ. अपनी जीत की भविष्यवाणी करने वाले पंडित रिकी राधा वेत्रीवेल को विजय ने 24 घंटे के भीतर ही OSD पद से हटा दिया. विजय ने मंगलवार को अपने पर्सनल ज्योतिषी को सरकारी पद नवाजा था, लेकिन गठबंधन के साथी VCK और लेफ्ट साइंटिफिक सोच की दुहाई देकर बिफर पड़े. विपक्ष ने चुटकी लेते हुए कहा कि "दूसरों का भविष्य देखने वाले पंडित जी अपना भविष्य नहीं देख पाए." गठबंधन बचाने के लिए विजय ने पलक झपकते ही ज्योतिषी की बलि चढ़ा दी और नियुक्ति रद्द कर दी.

वहीं सदन के भीतर माहौल तब गरमा गया जब विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने विजय सरकार को दिखावटी सरकार करार दिया. स्टालिन ने सीधा हमला करते हुए कहा कि यह सरकार विधायकों की खरीद-फरोख्त और बड़े सौदों की नींव पर टिकी है. उन्होंने आरोप लगाया कि विजय की पार्टी TVK ने जनादेश का अपमान किया है. हालांकि, तीखी बहस के बाद जैसे ही डीएमके के 59 विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया, विजय के लिए जीत का दरवाजा पूरी तरह खुल गया.
विजय की इस सुनामी जीत में कई रंगों का मेल दिखा. उन्हें अपनी पार्टी TVK के 105 विधायकों के अलावा:

कांग्रेस के 5, CPI के 2, CPI(M) के 2 विधायकों का साथ मिला.

IUML, VCK और AMMK के विधायकों ने भी विजय पर भरोसा जताया.

लेकिन सबसे निर्णायक रहे AIADMK के 25 बागी, जिन्होंने पलानीस्वामी की सत्ता को हिलाकर रख दिया.

देखा जाए तो भले ही विजय ने फ्लोर टेस्ट जीत लिया हो, लेकिन सौम्या अंबुमणि ने सदन में शराबबंदी और अवैध बिक्री का मुद्दा उठाकर सरकार को घेरा. वहीं, पलानीस्वामी ने चेतावनी दी है कि विधायकों को कैश ऑफर कर पाला बदलवाना लोकतंत्र के लिए खतरा है. ऐसे में आज के फ्लोर टेस्ट ने यह साफ कर दिया है कि तमिलनाडु में अब राजनीति के पुराने समीकरण बदल चुके हैं. विजय ने न सिर्फ अपनी सरकार बचाई है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि वह भविष्य के सबसे बड़े खिलाड़ी हैं. राज्यपाल के पास चार बार चक्कर लगाने वाले विजय आज तमिलनाडु के निर्विवाद कैप्टन बनकर उभरे हैं. अब देखना यह है कि ज्योतिष की सलाह छोड़कर साइंटिफिक राह पर चलने का वादा करने वाली यह सरकार राज्य को किस दिशा में ले जाती है. विजय की सरकार सुरक्षित है, लेकिन विपक्ष के तेवर बता रहे हैं कि तमिलनाडु की विधानसभा में अभी और भी कई सियासी ड्रामे होने बाकी हैं!

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