रांची में छात्रों का महामार्च! विधानसभा की ओर बढ़े हजारों युवा, CBI जांच पर अड़े

झारखंड की राजधानी रांची आज छात्रों के गुस्से का गवाह बनी...सड़कों पर हजारों युवा उतरे...हाथों में तिरंगा था, पोस्टर थे और जुबान पर एक ही सवाल था कि JSSC-CGL और दूसरी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों का आखिर न्याय कब मिलेगा? सरकार कह रही है कि छात्रों की 98 फीसदी मांगें मान ली गई हैं, लेकिन छात्र कह रहे हैं कि अगर 98 फीसदी मांगें मान ली गईं, तो फिर आंदोलन खत्म क्यों नहीं हुआ? यही वो सवाल है, जिसने आज झारखंड की सियासत से लेकर प्रशासन तक को हिला दिया। तो आखिर ऐसा क्या है कि सरकार 98 फीसदी मांगें मानने का दावा कर रही है, लेकिन छात्र सिर्फ उन दो फीसदी मांगों को लेकर अड़े हैं और वही दो फीसदी आज पूरे आंदोलन की सबसे बड़ी वजह बन गई है? क्या JSSC-CGL परीक्षा रद्द होगी? क्या CBI जांच का आदेश मिलेगा? क्या सरकार और छात्रों के बीच फिर बातचीत होगी? और अब जब ED ने भी केस दर्ज कर लिया है, तो क्या इस पूरे मामले की जांच एक नए मोड़ पर पहुंच गई है? रांची से आई आज की तस्वीरें कई बड़े सवाल खड़े कर रही हैं। देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट...

रविवार को सरकार और छात्रों के बीच करीब पांच घंटे तक मैराथन बैठक चली...तीन दौर की बातचीत हुई...लेकिन बात नहीं बनी। सरकार अपनी दलील देती रही...छात्र अपनी सबसे बड़ी मांग पर अड़े रहे। और फिर आज सुबह रांची की सड़कों पर वो तस्वीर दिखाई दी, जिसका ऐलान छात्र पहले ही कर चुके थे। जी हां पुरानी विधानसभा से नई विधानसभा तक छात्रों ने विशाल मार्च निकाला। रास्ते में पुलिस की बैरिकेडिंग थी...सुरक्षा के कड़े इंतजाम थे...विधानसभा के आसपास नो-एंट्री लागू थी...दो हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात थे...लेकिन प्रदर्शनकारी छात्र बैरिकेड पार करते हुए आगे बढ़ते रहे। और इस पूरे आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा बना रहा...CBI जांच। दरअसल, छात्र साफ कह रहे हैं कि जब तक JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को लेकर उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और कथित गड़बड़ियों की CBI जांच का लिखित आदेश नहीं मिलता, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा। वहीं दूसरी तरफ सरकार कह रही है कि CGL परीक्षा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई थी, इसलिए उसे रद्द करना और सीधे CBI जांच का आदेश देना राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। लेकिन आपको बता दें कहानी यहीं खत्म नहीं हुई...अब इस पूरे मामले में ED की भी एंट्री हो गई है। JPSC परीक्षा में कथित वित्तीय अनियमितताओं और पैसों के लेन-देन की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय ने PMLA के तहत केस दर्ज किया है। यानी जिस मामले को लेकर छात्र सड़क पर हैं, उसमें अब केंद्रीय जांच एजेंसी भी पैसों के एंगल की पड़ताल करेगी।

उधर बीजेपी ने भी छात्रों के आंदोलन को समर्थन देते हुए हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सीएम आवास का घेराव किया और इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी और राज्यसभा सांसद आदित्य साहू समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया। बीजेपी ने सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया। और इन सबके बीच आंदोलन का सबसे भावुक चेहरा बने छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो। जी हां कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे देवेंद्र महतो की तबीयत कमजोर हो चुकी है। चलने की स्थिति नहीं थी, तो साथी छात्रों ने उन्हें कंधे पर उठाकर मार्च में शामिल कराया। हाथ में तिरंगा था...चेहरे पर थकान थी...लेकिन तेवर वही थे कि मांग पूरी होने तक पीछे नहीं हटेंगे। लेकिन इस पूरे आंदोलन का सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर सरकार और छात्रों के बीच सहमति क्यों नहीं बन रही? दरअसल सरकार का कहना है कि छात्रों की करीब 98 फीसदी मांगें मान ली गई हैं। 

सरकार ने 14वीं JPSC PT परीक्षा रद्द करने की मांग स्वीकार की है।

ACF परीक्षा को रद्द करने की बात भी मानी गई है।

TDPL एजेंसी की परीक्षाओं की जांच कराने पर सहमति जताई गई है।

भर्ती परीक्षा की पूरी व्यवस्था में सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने की बात कही गई है।

इस समिति में IIT-ISM धनबाद, IIM रांची और XLRI जमशेदपुर जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों को शामिल करने का प्रस्ताव है।

सरकार ने भर्ती परीक्षाओं के लिए एक तय रिक्रूटमेंट कैलेंडर बनाने और उसके पालन की बात भी कही है।

वहीं इसके अलावा JSSC-CGL से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए रिटायर्ड हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाने और वित्तीय अनियमितताओं की जांच ED से कराने का प्रस्ताव भी रखा गया। लेकिन...यहीं आकर पूरी कहानी अटक गई। क्योंकि छात्रों की सबसे बड़ी मांग है कि CBI जांच कराई जाए। छात्रों का कहना है कि JSSC-CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष और व्यापक जांच CBI से कराई जाए। सिर्फ इतना ही नहीं...छात्र JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग पर भी अड़े हुए हैं। छात्र नेताओं का कहना है कि जब तक CGL परीक्षा रद्द नहीं होती और CBI जांच का लिखित आदेश जारी नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। यानी सरकार कह रही है कि 98 फीसदी मांगें मान ली गईं। और छात्र कह रहे हैं....“हमें वो दो फीसदी चाहिए, जो सबसे अहम है।” इसी बात को छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने भी जोर देकर कहा कि सरकार जिस 98 फीसदी मांगों को मानने की बात कर रही है, उसमें सबसे अहम मांगें शामिल नहीं हैं। आपको बता दें कि देवेंद्र महतो कई दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। लगातार अनशन के कारण उनकी हालत कमजोर हो गई है। आज जब विधानसभा मार्च निकला तो वह खुद चलने की स्थिति में नहीं थे। छात्रों ने उन्हें अपने कंधों पर उठा लिया। उनका फूल बरसाकर स्वागत किया गया। देवेंद्र महतो ने तिरंगा लहराया और मार्च में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। यानी शरीर कमजोर था...लेकिन आंदोलन का तेवर कमजोर नहीं हुआ। एंबुलेंस के जरिए वह विधानसभा मार्च में पहुंचे।

वहीं दूसरी तरफ इस पूरे आंदोलन के बीच JPSC के तीन सदस्यों अजीता भट्टाचार्य, जमाल अहमद और अनिमा हांसदा के राज्यपाल को इस्तीफा सौंपने की खबर भी सामने आई। JPSC सदस्य डॉ. अजीता भट्टाचार्य से पूछताछ भी होनी है। इससे परीक्षा व्यवस्था और आयोग की भूमिका को लेकर सवाल और ज्यादा गहरे हो गए हैं। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर आगे क्या होगा?

क्या सरकार छात्रों के साथ फिर बातचीत करेगी?

क्या CBI जांच को लेकर कोई नया रास्ता निकलेगा?

क्या JSSC-CGL परीक्षा रद्द होगी?

क्या ED की जांच से कोई बड़ा खुलासा होगा?

क्या 98 फीसदी मांगें मानने का सरकारी दावा छात्रों को आंदोलन खत्म करने के लिए मना पाएगा?

फिलहाल तो तस्वीर साफ है। JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन आज विधानसभा मार्च तक पहुंच गया। अब इस मामले में ED की एंट्री ने भी पूरे विवाद को नया मोड़ दे दिया है। लेकिन इन तमाम राजनीतिक बयानबाजियों के बीच सबसे जरूरी सवाल छात्रों का है...जिस युवा ने सालों मेहनत करके सरकारी नौकरी की उम्मीद लगाई, अगर वही परीक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है, तो उसके भरोसे का जवाब कौन देगा? क्योंकि मामला सिर्फ एक परीक्षा का नहीं है...मामला उन हजारों युवाओं के भविष्य का है, जो सालों से तैयारी कर रहे हैं। सरकार के सामने चुनौती सिर्फ आंदोलन खत्म कराने की नहीं है...चुनौती है छात्रों के भरोसे को वापस जीतने की। अब देखना होगा कि हेमंत सोरेन सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच अगली बातचीत किस दिशा में जाती है...फिलहाल रांची की सड़कों से लेकर झारखंड की सियासत तक एक ही मुद्दा गरम है कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी का इंसाफ कब होगा? इसी सवाल के साथ फिलहाल इतना ही। 

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