कैफ भोपाली- "दाग दुनिया ने दिए जख़्म ज़माने से मिले"

अपने ज़माने के मशहूर और बाकमाल शायर कैफ भोपाली, जिन्होंने मीना कुमारी और राजकुमार के अभिनय से सजी हुई फिल्म "पाकीज़ा" के लिए "चलो दिलदार चलो... चाँद के पार चलो" जैसा खूबसूरत गीत दिया। इस गीत को सुनकर ज़माना कैफ़ भोपाली साहब की और भी ग़ज़लों, गीतों और शायरियों की तालाब रखने लगी। यूं तो कैफ भोपाली का जन्म उत्तर प्रदेश के लखनऊ में साल 1917 में हुआ था। मगर उनके पूर्वज कश्मीर से आये थे। स्वभाव से घुमक्कड़ कैफ भोपाली साहब की ग़ज़लों और शायरियों के खज़ाने से पेश है आज कुछ चुनिन्दा ग़ज़लें...।
दाग दुनिया ने दिए जख़्म ज़माने से मिले,
हम को तोहफे ये तुम्हें दोस्त बनाने से मिले।
हम तरसते ही तरसते ही तरसते ही रहे,
वो फलाने से फलाने से फलाने से मिले।
ख़ुद से मिल जाते तो चाहत का भरम रह जाता,
क्या मिले आप जो लोगों के मिलाने से मिले।
माँ की आगोश में कल मौत की आगोश में आज,
हम को दुनिया में ये दो वक्त सुहाने से मिले।
कभी लिखवाने गए ख़त कभी पढ़वाने गए,
हम हसीनों से इसी हीले बहाने से मिले।
इक नया जख़्म मिला एक नई उम्र मिली,
जब किसी शहर में कुछ यार पुराने से मिले।
एक हम ही नहीं फिरते हैं लिए किस्सा-ए-गम,
उन के खामोश लबों पर भी फसाने से मिले।
कैसे माने के उन्हें भूल गया तू ऐ ‘कैफ’,
उन के खत आज हमें तेरे सिरहाने से मिले।।
हम को दीवाना जान के क्या क्या जुल्म न ढाया लोगों ने,
दीन छुड़ाया धर्म छुड़ाया देस छुड़ाया लोगो नें।
तेरी गली में आ निकले थे दोश हमारा इतना था,
पत्थर मारे तोहमत बाँधी ऐब लगाया लोगों ने।
तेरी लटों में सो लेते थे बे-घर आशिक बे-घर लोग,
बूढ़े बरगद आज तुझे भी काट गिराया लोगों ने।
नूर-ए-सहर ने निकहत-ए-गुल ने रंग-ए-शफक ने कह दी बात,
कितना कितना मेरी ज़बाँ पर कुफ्ल लगाया लोगों ने।
‘मीर’ तकी के रंग का गाज़ा रू-ए-ग़जल पर आ न सका,
‘कैफ’ हमारे ‘मीर’ तकी का रंग उड़ाया लोगों ने।।
कौन आएगा यहाँ कोई न आया होगा,
मेरा दरवाजा हवाओं ने हिलाया होगा।
दिल-ए-नादाँ न धड़क ऐ दिल-ए-नादाँ न धड़क,
कोई ख़त ले के पड़ौसी के घर आया होगा।
इस गुलिस्ताँ की यही रीत है ऐ शाख़-ए-गुल,
तू ने जिस फूल को पाला वो पराया होगा।
दिल की किस्मत ही में लिक्खा था अँधेरा शायद,
वरना मस्जिद का दिया किस ने बुझाया होगा।
गुल से लिपटी हुई तितली हो गिरा कर देखो,
आँधियों तुम ने दरख़्तों को गिराया होगा।
खेलने के लिए बच्चे निकल आए होंगे,
चाँद अब उस की गली में उतर आया होगा।
‘कैफ’ परदेस में मत याद करो अपना मकाँ,
अब के बारिश ने उसे तोड़ गिराया होगा।।
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