“यहां मत जाओ, देर रात पार्टी न करो…” पाबंदियों से परेशान बहू ने उठाया खौफनाक कदम?

“रिश्तों पर जब शक का साया छाता है,
तो अपना ही घर...सवालों का घर बन जाता है।”

जी हां आज हम बात करेंगे कानपुर के उस सनसनीखेज हत्याकांड की, जिसने एक परिवार के रिश्तों को ही सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया है। मामला एक ऐसे दवा कारोबारी की हत्या का है, जो शहर के बड़े कारोबारियों में गिने जाते थे...लेकिन अपने ही घर में उनकी जिंदगी का खौफनाक अंत कर दिया गया। नाम है विनीत मिनोचा...उम्र 63 साल।
कल्याणपुर के इंदिरानगर स्थित रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट में शनिवार देर रात उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई। पुलिस के मुताबिक, कारोबारी के शरीर पर चाकू के 26 से ज्यादा वार किए गए। शुरुआत में कहानी बिल्कुल अलग नजर आई...पहली नजर में मामला किसी बेरहम लूट या रंजिश का लगा, लेकिन महज 12 घंटे के भीतर जब पुलिस ने इस ब्लाइंड मर्डर केस का पर्दाफाश किया, तो जो सच निकलकर सामने आया उसने पूरे शहर के होश उड़ा दिए। जिस बहू ने ससुर की लाश देखकर आंसू बहाए, बिलख-बिलख कर रोने का नाटक किया...वही बहू इस सनसनीखेज हत्याकांड की असली मास्टरमाइंड निकली! ससुर की पाबंदियां, सीसीटीवी की निगरानी और पैसों पर कंट्रोल से तंग आकर बहू शालू ने पूर्व नौकर विशाल को 6 लाख रुपये की सुपारी दी और अपने ही ससुर को रास्ते से हटवा दिया। आइए जानते हैं इस दिल दहला देने वाली वारदात की पूरी कहानी। 

कानपुर के कल्याणपुर इलाके में स्थित रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट...यहीं पहली मंजिल के C-104 फ्लैट में दवा कारोबारी विनीत मिनोचा रहते थे। शनिवार की रात उनका बेटा सुब्रत, बहू शालू और छह साल का बेटा पार्टी में गए थे। उस वक्त विनीत घर में अकेले थे। रात करीब 3 बजे परिवार वापस लौटा। दरवाजा खुला मिला...अंदर पहुंचे तो बेडरूम का मंजर देखकर उनके होश उड़ गए। विनीत मिनोचा की खून से लथपथ लाश पड़ी थी। कमरे में खून के निशान थे और शुरुआती जांच में संघर्ष के संकेत भी मिले। पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। जांच में सामने आया कि कारोबारी पर धारदार हथियार से हमला किया गया था। पोस्टमॉर्टम के मुताबिक शरीर पर कई चोटों के निशान मिले। सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि घर से लूटपाट के कोई सबूत नहीं मिले। न सामान गायब...न कीमती चीजों को हाथ लगाया गया...यानी पुलिस को शक हुआ कि मकसद चोरी नहीं...सिर्फ हत्या था। जिसके बाद पुलिस ने अपार्टमेंट के CCTV कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। फुटेज में दो संदिग्धों की गतिविधियां दिखाई दीं। एक था विशाल गौतम...जो विनीत मिनोचा की दवा फर्म में पहले काम कर चुका था। दूसरा था उसका साथी राजकिशोर। पुलिस के मुताबिक, दोनों अपार्टमेंट में पहुंचे और फ्लैट तक गए। इसके बाद पुलिस ने दोनों की तलाश शुरू की और रविवार देर रात उन्हें मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, दोनों के पैर में गोली लगी।

दोनो से पूछताछ हुई...और यहीं से इस केस की दिशा बदल गई। पुलिस के मुताबिक, विशाल ने दावा किया कि हत्या के पीछे विनीत की बहू शालू की भूमिका थी। इसके बाद पुलिस ने शालू को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। शुरुआत में वह इंकार करती रही, लेकिन जब पुलिस ने पति, सास और सिक्योरिटी गार्ड के सामने 15 कड़े सवाल दागे और 330 कॉल्स का ब्योरा रखा, तो शालू टूट गई। उसने रोते हुए कबूल किया कि ससुर का उनके खर्चों पर पूरा कंट्रोल था, छोटी-छोटी बात के लिए गिड़गिड़ाना पड़ता था और देर रात पार्टी में जाने पर ससुर डांटते थे। इसी रंजिश में उसने हत्या कराई। वहीं अब आते हैं इस केस की सबसे अहम कड़ी पर...कॉल डिटेल रिकॉर्ड। जी हां पुलिस ने शालू और विशाल के मोबाइल की CDR खंगाली। पुलिस के मुताबिक, हत्या से पहले के करीब 21 दिनों में दोनों के बीच कई बार बातचीत हुई। अलग-अलग जांच विवरणों में शालू और विशाल के बीच करीब 30 से 40 कॉल का जिक्र सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, शनिवार को शालू और विशाल के बीच 14 बार फोन पर बातचीत हुई। सुबह करीब 9 बजे पहली बातचीत से लेकर देर रात तक दोनों के बीच संपर्क बना रहा। वहीं जांच में एक और आंकड़ा सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, विनीत के बेटे सुब्रत और विशाल के बीच भी हत्या से पहले करीब 300 बार फोन पर बातचीत हुई थी। ये आंकड़ा सामने आने के बाद स्वाभाविक तौर पर पुलिस ने सुब्रत से भी पूछताछ की। लेकिन सुब्रत ने पुलिस को बताया कि विशाल पहले उनके परिवार के साथ काम कर चुका था और छोटे-मोटे काम के लिए उससे फोन पर बातचीत होती थी। वहीं पुलिस अब को ये पता लगाना है कि इनमें कितनी बातचीत सामान्य कामकाज की थी और कितनी का संबंध कथित साजिश से था।

आपको बता दें इस हत्याकांड में पुलिस ने एक और गंभीर दावा किया है। कानपुर वेस्ट के DCP एसएम कासिम आब्दी के मुताबिक, हत्या को सामान्य मौत या हार्ट अटैक जैसा दिखाने की योजना बनाई गई थी। पुलिस का आरोप है कि विशाल को विनीत के सोने के बाद वारदात करने के लिए कहा गया था। लेकिन घटनाक्रम पुलिस के अनुसार अलग दिशा में चला गया और विनीत ने आरोपियों को घर के अंदर देख लिया। इसके बाद हमला हुआ और कारोबारी की हत्या कर दी गई। आपको बता दें विनीत मिनोचा कानपुर के प्रमुख दवा कारोबारियों में गिने जाते थे। वह बिरहाना रोड पर ‘फार्मा ट्रेडर्स’ नाम से दवा की फर्म चलाते थे। परिवार के मुताबिक कारोबार का सालाना टर्नओवर करोड़ों रुपये में था। रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट में 1056 फ्लैट और 27 बंगले बताए जा रहे हैं। सुरक्षा के लिए करीब 45 गार्ड तैनात होने और पूरे परिसर में करीब 650 CCTV कैमरे लगे होने की बात सामने आई है। लेकिन इसके बावजूद दो संदिग्ध फ्लैट तक पहुंच गए।

देखा जाए तो कानपुर का यह विनीत मिनोचा हत्याकांड रिश्तों के कत्ल की एक ऐसी खौफनाक दास्तान बन चुका है, जिसने हर किसी को सन्न कर दिया है। पाई-पाई के हिसाब और पाबंदियों से परेशान होकर बहू ने जिस खूनी साजिश की नींव रखी थी, उसका अंत सलाखों के पीछे हुआ। पुलिस ने महज 12 घंटे के भीतर न सिर्फ दोनों शार्पशूटरों को मुठभेड़ में ढेर कर गिरफ्तार किया, बल्कि साजिश रचने वाली बहू शालू को भी जेल भेज दिया है। हालांकि, सुब्रत की 300 कॉल्स और परिवार के बाकी पहलुओं की जांच अब भी जारी है। पुलिस हर एक सुराग को जोड़कर कोर्ट में ऐसा पुख्ता केस तैयार कर रही है, ताकि इस सनसनीखेज वारदात के सभी गुनहगारों को सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।

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