कन्या पूजन अष्टमी को करें या नवमी को? एक छोटी-सी गलती बिगाड़ सकती है पूजा!
नवरात्रि में कन्या पूजन का विशेष धार्मिक महत्व है। मान्यता है कि छोटी कन्याओं में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का वास होता है। यही वजह है कि अष्टमी और महानवमी के दिन भक्त कन्याओं को भोजन कराकर उनका आशीर्वाद लेते हैं। लेकिन सवाल है कि कन्या पूजन के लिए कौन सा दिन शुभ है और इसकी सही विधि क्या है? आइए जानते हैं।
कन्या पूजन कब करना चाहिए?
देवीभागवत पुराण के छठे और सातवें स्कंध में कन्या पूजन से संबंधित वर्णन बताया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि की प्रतिपदा से लेकर महानवमी तक कन्या पूजन किया जा सकता है। यदि नौ दिनों तक पूजा करना संभव न हो, तो अष्टमी या नवमी पर भी यह अनुष्ठान कर सकते हैं।
कन्या पूजन मुहूर्त 2026: पूजा की तारीख और शुभ समय तय करने से पहले अपने शहर के पंचांग में अष्टमी-नवमी की तिथि और मुहूर्त जरूर जांच लें।
कन्या पूजन में कितनी कन्याएं होनी चाहिए?
परंपरा के अनुसार, एक से नौ कन्याओं को पूजन के लिए आमंत्रित किया जा सकता है। कई परिवारों में बटुक भैरव के प्रतीक के रूप में एक बालक को भी भोजन कराया जाता है। मान्यता है कि नौ कन्याओं का पूजन नवदुर्गा की आराधना का प्रतीक है।
कन्या पूजन के लिए कितनी उम्र होनी चाहिए?
आमतौर पर दो से दस वर्ष तक की बालिकाओं को कन्या पूजन के लिए उपयुक्त माना जाता है। पारंपरिक मान्यताओं में दो वर्ष की कन्या को कुमारी, तीन वर्ष की कन्या को त्रिमूर्ति, चार वर्ष की कन्या को कल्याणी और नौ वर्ष की कन्या को मां दुर्गा का स्वरूप माना गया है।
कन्या पूजन की विधि क्या है?
कन्या पूजन के दिन सबसे पहले मां दुर्गा की पूजा करें। इसके बाद कन्याओं का आदरपूर्वक स्वागत करके तिलक लगाएं और परंपरा के अनुसार पूजन करें। फिर उन्हें हलवा, पूरी और चने का भोजन कराएं। भोजन के बाद फल, दक्षिणा या उपहार देकर सम्मानपूर्वक विदा करें।
कन्या पूजन का महत्व: धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक कन्या पूजन करने से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है। यह परंपरा बालिकाओं के सम्मान, श्रद्धा और नारी शक्ति के प्रति आदर का संदेश भी देती है।
ध्यान दें: वर्ष 2026 की अष्टमी-नवमी की तारीख और पूजा के सटीक मुहूर्त को प्रकाशित करने से पहले स्थानीय पंचांग से सत्यापित करें।

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