उच्च उपज वाले कठिया गेहूं की किस्में और खेती तकनीक
कठिया गेहूं भारत में एक प्रचलित गेहूं की खेती की पद्धति है, जो मुख्यतः उत्तर भारत के राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, बिहार और मध्यप्रदेश में अपनाई जाती है। इसे शीत ऋतु में बोया जाता है और यह अधिकतर रबी मौसम (अक्टूबर–नवम्बर) में लगाया जाता है। कठिया गेहूं की खेती अधिक उपज देने वाली और रोग प्रतिरोधक किस्मों पर आधारित होती है।
कठिया गेहूं की प्रमुख किस्में
कठिया गेहूं की कई किस्में बाजार में उपलब्ध हैं। इनमें उच्च उपज देने वाली और रोग प्रतिरोधक किस्में शामिल हैं। प्रमुख किस्में निम्नलिखित हैं:
एच.डी. 2967 (HD 2967)
उच्च उपज देने वाली और रोग प्रतिरोधक
अच्छे दानों के लिए उपयुक्त
फसल की अवधि: लगभग 140–145 दिन
एच.डी. 3086 (HD 3086)
सिंचाई और बारिश दोनों में अच्छी उपज देती है
मोल्ड और रस्ट रोगों के प्रति प्रतिरोधक
एच.डी. 3226 (HD 3226)
मध्यम लम्बाई के पौधे
दाने का वजन अच्छा और गुणवत्ता उत्तम
पंजाब 156
विशेषकर उत्तर भारत में लोकप्रिय
उपज अधिक और रोग प्रतिरोधक
केंद्रीय किस्में (जैसे PBW 343, WH 1105)
फसल में टिकाऊ और उच्च गुणवत्तायुक्त
कठिया गेहूं की खेती की विधि
1. भूमि चयन और तैयारी
हल्की दोमट या रेत-मिट्टी वाली भूमि उपयुक्त होती है।
फसल बोने से पहले जमीन को अच्छी तरह जोत लें और समतल कर लें।
2. बीज की मात्रा और बुवाई
बुवाई का समय: अक्टूबर–नवम्बर
बीज की दर: 100-125 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
बीज बुवाई से पहले उपचारित करना चाहिए, जैसे कि थीरम या कार्बेंडाज़िम का छिड़काव।
3. खाद और पोषण
सामान्य तौर पर NPK अनुपात 120:60:40 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर उपयुक्त होता है।
पर्याप्त मात्रा में कम्पोस्ट या गोबर की खाद देना लाभदायक है।
4. सिंचाई
पहली सिंचाई बुवाई के 20-25 दिन बाद
अंतिम सिंचाई फसल फूलने और दाने बनने के समय
कठिया गेहूं को 4-5 बार सिंचाई की आवश्यकता होती है
5. रोग और कीट नियंत्रण
प्रमुख रोग: पाउडरी मिल्ड्यू, ब्लास्ट, रस्ट
कीट: गेहूं का भूरा कीट, सफ़ेद कीट
नियंत्रक उपाय: रोग प्रतिरोधक किस्मों का चयन, फसल चक्र, जैविक या रासायनिक कीटनाशक
6. कटाई और संग्रह
फसल की कटाई तब करनी चाहिए जब दाने कठोर और पीले रंग के हों
मशीन या हाथ से कटाई की जा सकती है
कटाई के बाद धान के समान सुखाकर भंडारण करना चाहिए
कठिया गेहूं की खेती सही किस्मों, उचित कृषि तकनीक और समय पर सिंचाई व पोषण पर निर्भर करती है। उच्च उपज और रोग प्रतिरोधक किस्मों का चयन किसानों के लिए लाभकारी साबित होता है। नियमित देखभाल और फसल प्रबंधन से कठिया गेहूं की खेती आर्थिक रूप से फायदेमंद हो सकती है।

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