राधा कृष्ण संग मित्र सुदामा हुए विराजमान, भक्तिभाव से गूंज उठा निलकंठेश्र्वर धाम
कटनी : विजयराघवगढ़ सलैया पडखुरी स्थित निलकंठेश्वर भक्ति धाम आज किसी पहचान का मोहताज नहीं रहा। यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि आस्था विश्वास और सनातन संस्कृति की जीवंत धरोहर बन चुका है।धन्य है वह पुण्यभूमि और धन्य है ग्रोवर परिवार जिनकी अनन्य भक्ति और संकल्प से महादेव की इस पावन नगरी में देवी देवताओं के भव्य मंदिरों का निर्माण हुआ और विधिवत प्राण-प्रतिष्ठा कराई गई। आज दिनांक 6 फरवरी 2026 को निलकंठेश्वर भक्ति धाम के इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया जब भगवान श्रीकृष्ण राधारानी एवं मित्र सुदामा की दिव्य प्रतिमाएं वैदिक मंत्रोच्चार शंखनाद और धार्मिक गुरुओं की उपस्थिति मे विधि विधान से विराजमान हुईं।
पूरे धाम में भक्ति का ऐसा प्रवाह बहा कि वातावरण श्रद्धा प्रेम और करुणा से सराबोर हो उठा। पूजा-अर्चना के पश्चात कन्याभोज एवं ब्राह्मण भोज का आयोजन हुआ जिसमें सेवा और समर्पण की अद्भुत मिसाल देखने को मिली। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि मानवता करुणा और सामाजिक समरसता का संदेश भी बन गया।
निलकंठेशवर भक्ति धाम महाशिवरात्रि पर फिर रचेगा इतिहास, दिव्यता की होगी पराकाष्ठा
निलकंठेश्वर भक्ति धाम पर मनाई जाने वाली महाशिवरात्रि हर वर्ष भक्तों के लिए अविस्मरणीय बन जाती है।
हरिश्चंद्र पद्मभूषण से सम्मानित श्री मदनलाल ग्रोवर द्वारा प्रारंभ की गई इस परंपरा को आज भी उसी श्रद्धा और भव्यता से आगे बढ़ाया जा रहा है। यह आयोजन कटनी जिले का सबसे दिव्य और भव्य धार्मिक आयोजन माना जाता है।महाशिवरात्रि पर शिवलिंग निर्माण भव्य शिवबारात पूर्णाहुति विशाल भंडारे जैसे आयोजन श्रद्धालुओं को अलौकिक अनुभूति प्रदान करते हैं।इस वर्ष भी निलकंठेश्वर भक्ति धाम समिति एवं आयोजक मदनलाल ग्रोवर
विजयराघवगढ़ विधायक संजय सत्येंद्र पाठक बाबू ग्रोवर एवं रुद्राक्ष ग्रोवर के मार्गदर्शन में आधुनिकता और परंपरा के समन्वय के साथ भव्य आयोजन की तैयारियां पूर्ण की जा रही हैं। विशेष आकर्षण के रूप में ब्रजवासी कलाकारों द्वारा प्रस्तुत की जाने वाली धार्मिक कलाएं भक्तों का मन मोह लेंगी और वृंदावन की अनुभूति कराएंगी।बाबू ग्रोवर एवं रुद्राक्ष ग्रोवर ने समस्त श्रद्धालुओं से भावपूर्ण अपील करते हुए कहा है कि महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर अधिक से अधिक संख्या में पधारकर शिवबारात का आनंद लें और बाबा नीलकंठ की कृपा प्राप्त करें।निलकंठेश्वर भक्ति धाम आज केवल एक मंदिर नहीं बल्कि आस्था का इतिहास भक्ति की पहचान और सनातन संस्कृति का गौरव बन चुका है।
रिपोर्टर : सुमित जायसवाल


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