कृषि महोत्सव में मुख्यमंत्री का संबोधन बना चर्चा का विषय,विधायक संजय सत्येंद्र पाठक की खुलकर की सराहना
कटनी - बरही में आयोजित भव्य कृषि महोत्सव केवल विकास कार्यों के लोकार्पण और भूमि पूजन तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि यह कार्यक्रम राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से भी चर्चा का केंद्र बन गया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने संबोधन के दौरान जिस स्पष्टता और आत्मविश्वास के साथ विपक्ष को जवाब दिया उसने उपस्थित जनसमूह के बीच गहरी छाप छोड़ दी।मुख्यमंत्री ने अपने उद्बोधन में विकास कार्यों जनकल्याण योजनाओं और किसानों के हितों पर विस्तार से चर्चा करते हुए यह संदेश दिया कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं लेकिन विकास और जनहित सर्वोपरि होना चाहिए। इसी क्रम में उन्होंने विजयराघवगढ़ विधायक संजय सत्येंद्र पाठक की कार्यशैली और जनसेवा की भावना की खुले मंच से सराहना की।मुख्यमंत्री ने कहा कि संजय सत्येंद्र पाठक केवल एक जनप्रतिनिधि नहीं बल्कि क्षेत्र के विकास के लिए समर्पित ऐसे नेता हैं जो अपने क्षेत्र की जनता के लिए हर संभव प्रयास करते रहते हैं। उनके शब्दों में झलकती आत्मीयता ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि सरकार अपने मेहनती और जनसमर्पित विधायकों के साथ मजबूती से खड़ी है। कार्यक्रम के दौरान विधायक संजय सत्येंद्र पाठक ने भी क्षेत्र के विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण मांगें मुख्यमंत्री के सामने बड़े ही सधे और प्रभावशाली शब्दों में रखीं। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो उनकी वाणी में क्षेत्र की जनता की उम्मीदें और आकांक्षाएं बोल रही हों। मुख्यमंत्री ने भी इन मांगों को गंभीरता से लेते हुए अनेक विकास कार्यों को स्वीकृति प्रदान की जिनकी लागत हजारों करोड़ रुपये तक आंकी जा रही है।कृषि महोत्सव में करीब 100 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया गया जो बरही और आसपास के क्षेत्र के लिए एक बड़ी सौगात माना जा रहा है। इन कार्यों के पीछे विधायक की लंबे समय से की गई मेहनत और सतत प्रयास साफ दिखाई देते हैं। कार्यक्रम की भव्यता सुव्यवस्थित व्यवस्थाएं और बड़ी संख्या में उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण था कि क्षेत्र की जनता अपने जनप्रतिनिधि और सरकार के विकास कार्यों पर विश्वास जताती है। जब मंच से मुख्यमंत्री ने स्वयं विधायक की प्रशंसा की तो वहां मौजूद लोगों ने जोरदार तालियों के साथ उसका स्वागत किया वहीं विरोधियों के चेहरों पर भी खामोशी साफ दिखाई दे रही थी।बरही का यह कृषि महोत्सव केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं रहा बल्कि यह विकास विश्वास और नेतृत्व की ताकत का प्रतीक बनकर उभरा। लोगों का मानना है कि यदि इसी तरह विकास की गति जारी रही तो आने वाले समय में यह क्षेत्र प्रगति की नई ऊंचाइयों को छू सकता है।
रिपोर्टर - सुमित जायसवाल

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