मेहनत जुनून और सपनों की उड़ान, अदाणी फाउंडेशन के खिलाड़ियों ने दिल्ली में लहराया परचम

कटनी  :  कैमोर अडानी फाउंडेशन एसीसी सीमेंट प्लांट के छात्रों ने दिनांक 03 से 05 अप्रैल 2026 तक जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित दिल्ली स्टेट ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं रही बल्कि यह उन सपनों का मंच बनी जहां छोटे शहरों के खिलाड़ी अपनी मेहनत से इतिहास लिखते नजर आए।मध्यप्रदेश से पहुंचे 49 खिलाड़ियों के बीच जब अडानी फाउंडेशन कैमोर एवं अमेहटा सीमेंट वर्क्स के स्पोर्ट्स प्रोजेक्ट से जुड़े युवा मैदान में उतरे तो उनके कदमों में आत्मविश्वास और आंखों में एक नया आसमान साफ दिखाई दे रहा था।इनमें से 5 खिलाड़ियों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया लेकिन जो कहानी उन्होंने लिखी वह हर किसी के दिल को छू गई। अंकिता बड़गैयां ने 100 मीटर हर्डल्स में 15 सेकंड का शानदार समय निकालते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। यह सिर्फ एक जीत नहीं थी बल्कि उस संघर्ष की गूंज थी जो उन्होंने हर दिन मैदान पर बहाए पसीने से अर्जित की। इसी प्रदर्शन के दम पर उन्होंने इंडियन एथलेटिक्स सीरीज-2026 के लिए भी क्वालिफाई कर लिया।वहीं कुमकुम गौतम ने भाला फेंक में 27.06 मीटर का थ्रो कर रजत पदक हासिल किया। उनका हर प्रयास यह बता रहा था कि सीमित संसाधन भी बड़े सपनों को रोक नहीं सकते।सागर मांझी ने हेप्थलॉन में 5000 से अधिक अंक अर्जित कर स्वर्ण पदक जीता और 24वीं नेशनल जूनियर (U-20) एथलेटिक्स फेडरेशन प्रतियोगिता 2026 के लिए अपना स्थान पक्का किया। यह जीत उनके धैर्य समर्पण और निरंतर अभ्यास की कहानी बयां करती है।द्रक्षा नाज़ और पूर्णिमा गुप्ता भले ही पदक से दूर रहीं। लेकिन उन्होंने जिस जज्बे के साथ मैदान में खुद को साबित किया वह आने वाले समय की बड़ी सफलताओं का संकेत है। इन सभी खिलाड़ियों की सफलता सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है बल्कि यह उस विश्वास का परिणाम है जो अडानी फाउंडेशन ने स्थानीय प्रतिभाओं में जगाया है। यह जीत उन परिवारों की उम्मीदों की जीत है उन कोचों की मेहनत की जीत है और उन सपनों की जीत है जो कभी छोटे कस्बों की गलियों में जन्म लेते हैं।कैमोर क्लस्टर की सीएसआर हेड ऐनेट एफ. बिश्वास एचआर हेड दिनेश पाठक और प्लांट हेड अतुल दत्ता ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी।आज इन खिलाड़ियों ने यह साबित कर दिया कि अगर हौसले बुलंद हों तो छोटे शहरों से निकलकर भी देश के बड़े मंचों पर अपनी पहचान बनाई जा सकती है। यह कहानी सिर्फ पदकों की नहींबल्कि विश्वास संघर्ष और सपनों की है जो अब उड़ान भर चुके हैं।

रिपोर्टर : सुमित जायसवाल 

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