माटी संस्कृति और जनसेवा का संगम, विधायक संजय सत्येंद्र पाठक का पारंपरिक स्वरूप बना जनमानस की प्रेरणा

कटनी : विजयराघवगढ़ की धरती एक बार फिर अपने जननायक के सादगीपूर्ण और संस्कारमयी स्वरूप पर गौरवान्वित हुई जब विधायक संजय सत्येंद्र पाठक पारंपरिक धोती कुर्ता और अंगवस्त्र धारण किए जनसमुदाय के बीच पहुंचे। माथे पर रोली का तिलक सहज मुस्कान और विनम्र व्यक्तित्व ने हर किसी का मन मोह लिया। यह केवल एक पहनावा नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, बुंदेलखंडी परंपरा और अपनी मिट्टी से जुड़े होने का जीवंत संदेश है। संजय सत्येंद्र पाठक हमेशा से अपनी संस्कृति सभ्यता और संस्कारों को सम्मान देने वाले जनप्रतिनिधि माने जाते हैं। आधुनिक राजनीति के दौर में जहां लोग अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे हैं वहीं संजय सत्येंद्र पाठक अपनी वेशभूषा और व्यवहार से यह संदेश देते हैं कि विकास और परंपरा साथ-साथ चल सकते हैं। उनका यह पारंपरिक स्वरूप युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन रहा है कि अपनी संस्कृति पर गर्व करना ही असली भारतीयता है। जनसेवा को बनाया जीवन का उद्देश्य विधायक संजय सत्येंद्र पाठक केवल राजनीति का नाम नहीं बल्कि जनसेवा का पर्याय बन चुके हैं। विजयराघवगढ़ क्षेत्र में शिक्षा स्वास्थ्य सड़क पेयजल और धार्मिक स्थलों के विकास में उनके योगदान को लोग आज भी सम्मान से याद करते हैं। गरीबों की सहायता हो विद्यार्थियों के लिए बेहतर शिक्षा की व्यवस्था हो या क्षेत्र के विकास कार्य संजय सत्येंद्र पाठक हमेशा अग्रणी भूमिका में दिखाई देते हैं। क्षेत्र की जनता कहती है कि संजय सत्येंद्र पाठक के दरवाजे से कोई निराश लौटता नहीं। उनकी उदारता सरलता और लोगों के प्रति आत्मीय व्यवहार ने उन्हें जन जन का प्रिय बना दिया है। सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में उनकी सहभागिता यह दर्शाती है कि वे केवल नेता नहीं बल्कि समाज के हर वर्ग के सुख दुख के सहभागी हैं। धोती-कुर्ता में सजे संजय सत्येंद्र पाठक का यह स्वरूप लोगों को भारतीय संस्कृति की उस गरिमा का एहसास कराता है जहां सादगी ही सबसे बड़ा आभूषण मानी जाती है। उनका व्यक्तित्व यह संदेश देता है कि अपनी माटी अपनी संस्कृति और अपने लोगों से प्रेम करने वाला ही सच्चा जननायक होता है।

रिपोर्टर : सुमित जायसवाल 

 

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