रामचंद्र नारायणजी द्विवेदी:देशभक्ति की अमर आवाज़

रामचंद्र नारायणजी द्विवेदी, जिन्हें हम कवि प्रदीप के नाम से जानते हैं, भारतीय साहित्य और सिनेमा के ऐसे महान कवि‑गीतकार थे जिन्होंने देशभक्ति की भावना को शब्दों में अमर किया। उनका जन्म 6 फरवरी 1915 को मध्यप्रदेश के छोटे से शहर बड़नगर (उज्जैन) में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। 
 
बचपन से ही उनकी हिंदी कविता और लेखन में गहरी रूचि थी। कॉलेज के समय उन्होंने अपना साहित्यिक नाम “प्रदीप” चुना, जिसका अर्थ है “प्रकाश”, और इसी नाम से वे देश के हर कोने में प्रसिद्ध हुए। 
 
1939 में लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा पूरी करने के बाद वे मुंबई आए, जहां उन्होंने फिल्मी गीतों और कविताओं के माध्यम से देशभक्ति का संदेश दिया। उन्होंने लगभग 1700 गीत और कविताएँ लिखीं, जिनमें से कई गीत भारतीय सिनेमा के अमर गीतों में गिने जाते हैं। 
 
उनका सबसे प्रसिद्ध गीत “ऐ मेरे वतन के लोगों” है, जिसे 1962 के भारत‑चीन युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की श्रद्धांजलि में लिखा गया था। यह गीत लता मंगेशकर ने 26 जनवरी 1963 को रामलीला मैदान में गाया था और उसे सुनकर प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू तक भावविभोर हो गए थे। 
 
कवि प्रदीप को उनके जीवन‑काल में कई सम्मान मिले, जिनमें दादा साहब फाल्के पुरस्कार भी शामिल है। वे 11 दिसंबर 1998 को मुंबई में नहीं रहे, लेकिन उनकी कविताएँ और गीत आज भी भारतवासियों के दिल में जीवित हैं। 

Leave a Reply



comments

Loading.....
  • No Previous Comments found.