रेस्क्यू के दावों के बीच दम तोड़ गया बायसन: ‘पूरी तरह स्वस्थ’ बताकर छोड़ा, इलाज के अभाव में मौत
कवर्धा - कुकदूर वन क्षेत्र में घायल बायसन को लेकर वन विभाग के दावे आखिरकार सवालों के घेरे में आ गए हैं। शनिवार रात करीब 9:30 बजे बायसन की मौत हो गई। आरोप है कि पर्याप्त इलाज और निगरानी के अभाव में उसने दम तोड़ दिया, जबकि विभाग उसे पहले ही “पूर्णतः स्वस्थ” बताकर जंगल में छोड़ने का दावा कर चुका था।
मामले की शुरुआत तब हुई थी, जब शिकारियों ने बायसन को तीर मारकर घायल कर दिया था। वन विभाग ने रेस्क्यू कर उसके शरीर से तीन तीर निकालने और विशेषज्ञों की निगरानी में उपचार का दावा किया था। इसके बाद विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्तियों में बायसन को स्वस्थ बताते हुए जंगल में छोड़ने की जानकारी दी गई।
हालांकि, जमीनी स्तर पर तस्वीर अलग थी। स्थानीय ग्रामीणों और सामने आए वीडियो में बायसन को कमजोर हालत में जंगल में भटकते देखा गया। वह ठीक से चल नहीं पा रहा था और भोजन भी नहीं कर पा रहा था। घाव में संक्रमण बढ़ने और कीड़े पड़ने जैसी आशंकाएं भी जताई जा रही थीं।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के गंभीर मामलों में केवल तीर निकालना पर्याप्त नहीं होता। लंबे समय तक एंटीबायोटिक उपचार, घाव की नियमित सफाई और लगातार निगरानी जरूरी होती है। आशंका है कि इन पहलुओं में लापरवाही हुई, जिससे बायसन की हालत बिगड़ती गई और अंततः उसकी मौत हो गई।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब बायसन को “पूर्णतः स्वस्थ” घोषित किया गया था, तो उसकी हालत इतनी खराब कैसे हो गई? क्या उसे बिना पूरी तरह ठीक हुए ही जंगल में छोड़ दिया गया, या फिर बाद में उसकी निगरानी नहीं की गई?
वन विभाग ने इस मामले में शिकार के आरोपियों की गिरफ्तारी की बात जरूर कही है, लेकिन बायसन की मौत ने विभाग की कार्यप्रणाली और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।
रिपोर्टर - दीपेश जांगड़े

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