यूनानी चिकित्सा पद्धति से ईलाज कराने में कोई साईड इफेक्ट नहीं - डॉ अरविन्द वर्मा, चेयरमैन
खगड़िया : विश्व यूनानी दिवस के अवसर पर ज़िला संयुक्त औषधालय परिसर में यूनानी चिकित्सा पद्धति के प्रणेता और प्रसिद्ध समाज सुधारक हकीम अजमल खां की जयंती मनाई गई । इस कार्यक्रम में चिकित्सा पदाधिकारियों, कर्मचारियों तथा समाजसेवियों ने उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। ज़िला देशी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ सुनील कुमार साहू ने यूनानी दिवस पर आमजनों के बीच व्यापक प्रचार प्रसार हेतु एक चलंत जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर विदा किया। एक विशेष कार्यक्रम के तहत जागरुकता शिविर का भी आयोजन किया गया, जिसका उद्घाटन ज़िला देशी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ सुनील कुमार साहू ने किया। जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता यूनानी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ हेना प्रवीण ने की। बतौर विशिष्ठ अतिथि बिहारी पॉवर ऑफ इंडिया के चेयरमैन डॉ अरविन्द वर्मा ने कहा यूनानी चिकित्सा पद्धति में योगदान के लिए हर वर्ष 11 फरवरी को हकीम अजमल खां की जयंती पर विश्व यूनानी दिवस मनाया जाता है। जिसका मुख्य उद्देश्य है देश में यूनानी चिकित्सा पद्धति के विकास में उनके योगदान को याद करना और इसके निवारक व उपचारात्मक दृष्टिकोण के प्रति आमजन में जागरूकता बढ़ाना। आगे डॉ अरविन्द वर्मा ने कहा यूनानी पद्धति से चिकित्सा कराने पर रोगी के शरीर में कोई साईड इफेक्ट नहीं होता क्योंकि यूनानी की दवाइयों का निर्माण हर्बल पर आधारित है। ज़िला देशी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ सुनील कुमार साहू ने कहा आयुष मंत्रालय, भारत सरकार ने वर्ष 2016 में इस दिवस को मनाने की घोषणा की थी, और पहला विश्व यूनानी दिवस 2017 में केंद्रीय अनुसंधान संस्थान यूनानी चिकित्सा, हैदराबाद में आयोजित हुआ। यूनानी चिकित्सा पदाधिकारी हेना प्रवीण ने कहा भारत में यूनानी चिकित्सा पद्धति का इतिहास 10वीं शताब्दी से जुड़ा है। हालांकि, इसे पुनर्जीवित कर आधुनिक स्वरूप देने का श्रेय हकीम अजमल खां को जाता है। उनका जन्म 11 फरवरी 1868 को हुआ था। वे एक प्रसिद्ध यूनानी चिकित्सक, विद्वान, समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी और यूनानी चिकित्सा शिक्षा के अग्रदूत थे। उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।आगे डॉ हेना प्रवीण ने कहा हकीम अजमल खां जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली और आयुर्वेदिक एवं यूनानी तिब्बिया कॉलेज, नई दिल्ली के संस्थापकों में से एक थे। उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें ‘मसीह-उल-मुल्क’ की उपाधि से सम्मानित किया गया था। उक्त अवसर पर उपस्थित थे चिकित्सा विभाग के कई कर्मचारी, समाज सेवी और गणमान्य लोग आदि।
रिपोर्टर : उमर खान


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